UPSC Success Story: भोपाल के पुलकित जैन ने यूपीएससी में 4 बार असफलता के बाद भी हार नहीं मानी। जानिए कैसे पुलकित जैन ने खुद को मोटिवेट किया और सही स्ट्रेटजी के दम पर UPSC CSE 2025 में AIR 242 हासिल की। उनकी UPSC स्ट्रेटेजी हर उम्मीदवार के लिए काम की है।
Pulkit Jain UPSC Success Story: मध्य प्रदेश के भोपाल जिले के रहने वाले पुलकित जैन एक बिल्कुल साधारण परिवार से आते हैं। उनके पिता एक छोटी सी किराना दुकान चलाते हैं और मां घर संभालती हैं। लेकिन इस साधारण माहौल में भी पुलकित ने हमेशा कुछ बड़ा करने का सपना देखा। उनके लिए यह सिर्फ नौकरी पाने की बात नहीं थी, बल्कि अपने परिवार को एक नई पहचान देने और समाज में सम्मान हासिल करने की इच्छा थी, जो उन्हें लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती रही। जानिए भोपाल के पुलकित जैन की UPSC सक्सेस स्टोरी, प्रिपरेशन स्ट्रेटजी और खुद को मोटिवेटेड रखने की शानदार ट्रिक।
ग्रेजुएशन के दौरान बदला पुलकित जैन का नजरिया, UPSC क्रैक करने की ठानी
पुलकित ने एक्सीलेंस कॉलेज, भोपाल से बायोटेक्नोलॉजी में बीएससी की पढ़ाई की। कॉलेज के शुरुआती सालों में उनका लक्ष्य इतना स्पष्ट नहीं था, लेकिन जैसे-जैसे पढ़ाई आगे बढ़ी, उन्होंने अपने करियर को लेकर गंभीरता से सोचना शुरू किया। ग्रेजुएशन के अंतिम साल में उन्हें एहसास हुआ कि सिविल सर्विसेज ही वह रास्ता है, जहां से वह अपने सपनों को साकार कर सकते हैं। इसी सोच ने धीरे-धीरे उनके भीतर एक मजबूत संकल्प पैदा किया।
UPSC में कई असफलताओं के बाद पुलकित जैन को मिली बड़ी जीत
पुलकित जैन की UPSC सफलता के पीछे लंबा संघर्ष छिपा है। उन्होंने एक-दो नहीं बल्कि चार बार परीक्षा दी, जिसमें तीन बार मेन्स तक पहुंचे और दो बार इंटरव्यू दिया। हर बार थोड़ा-थोड़ा सुधार करते हुए उन्होंने अपनी गलतियों से सीखा और खुद को बेहतर बनाया। आखिरकार साल 2025 में उन्होंने UPSC CSE में ऑल इंडिया रैंक 242 हासिल कर ली। यह सफलता उनके धैर्य, मेहनत और लगातार प्रयासों का नतीजा है।
पुलकित जैन की UPSC प्रिपरेशन का फॉर्मूला: तैयारी को रखा सिंपल, लेकिन असरदार
पुलकित का मानना था कि UPSC की तैयारी को जितना सरल रखा जाए, उतना बेहतर होता है। उन्होंने अपनी पढ़ाई को जटिल बनाने के बजाय बेसिक्स को मजबूत करने पर ध्यान दिया। पिछले साल के प्रश्नों को समझना और करंट अफेयर्स पर पकड़ बनाना उनकी रणनीति का अहम हिस्सा था। उन्होंने कभी भी बहुत ज्यादा किताबें इकट्ठा करने की कोशिश नहीं की, बल्कि सीमित संसाधनों को बार-बार पढ़कर उनमें गहराई से समझ विकसित की।
UPSC प्रीलिम्स और मेन्स के लिए अलग-अलग स्ट्रेटजी
पुलकित जैन ने हर स्टेज की तैयारी को उसके हिसाब से ढाला। प्रीलिम्स के लिए उन्होंने खूब प्रैक्टिस की और लगभग 100 मॉक टेस्ट दिए, जिससे उन्हें पेपर का पैटर्न समझ में आया और टाइम मैनेजमेंट बेहतर हुआ। वहीं मेन्स के लिए उन्होंने उत्तर लिखने की आदत डाली। रोजाना आंसर राइटिंग करने से उनकी सोच स्पष्ट हुई और लिखने की क्षमता में भी सुधार आया, जो इस स्टेज के लिए बेहद जरूरी होता है।
UPSC के लिए 13 घंटे पढ़ाई… लेकिन स्मार्ट तरीके से
पुलकित जैन ने अपनी तैयारी के दौरान लंबे समय तक पढ़ाई की, लेकिन यह सिर्फ घंटों का खेल नहीं था, बल्कि स्मार्ट तरीके से पढ़ने का था। प्रीलिम्स के समय वह देर रात तक पढ़ते थे, कभी-कभी सुबह 4 बजे तक भी जागते थे। रोज करीब 13 घंटे पढ़ाई की। वहीं मेन्स के दौरान उन्होंने अपनी दिनचर्या को थोड़ा व्यवस्थित किया। फिक्स रूटीन रखा सुबह 7 बजे से रात 1 बजे तक। इस दौरान उन्होंने बीच-बीच में छोटे ब्रेक लेकर खुद को थकान से बचाए रखा।
सबसे बड़ा चैलेंज: FOMO और तुलना
पढ़ाई के अलावा पुलकित के सामने सबसे बड़ी चुनौती मानसिक थी। तैयारी के दौरान उन्हें अक्सर दूसरों से तुलना और FOMO जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। जब आसपास के लोग आगे बढ़ते दिखते हैं, तो मन में असमंजस पैदा होता है। लेकिन उन्होंने खुद को समझाया और अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखा। यही मानसिक मजबूती उन्हें इस लंबी दौड़ में टिके रहने में मदद करती रही।
ब्रेक लेना भी UPSC प्रिपरेशन स्ट्रेटेजी का बना हिस्सा
पुलकित ने अपनी तैयारी में एक खास चीज अपनाई, जो कई लोग नजरअंदाज कर देते हैं। उन्होंने हर स्टेज के बाद खुद को छोटा सा ब्रेक दिया। कभी-कभी वह छोटी ट्रिप पर चले जाते थे, जिससे उनका दिमाग फ्रेश हो जाता था। इस तरह के ब्रेक ने उन्हें मानसिक रूप से संतुलित बनाए रखा और वे हर बार नई ऊर्जा के साथ पढ़ाई में लौटे।
यूपीएससी के लिए साइंस से ह्यूमैनिटीज: आसान नहीं था बदलाव
बायोटेक्नोलॉजी से पढ़ाई करने के बाद ह्यूमैनिटीज में शिफ्ट होना उनके लिए आसान नहीं था। नए विषयों को समझने में उन्हें समय लगा, लेकिन उन्होंने धीरे-धीरे इस बदलाव को स्वीकार किया। इसके साथ ही लंबे समय तक तैयारी करने के कारण उनके सामाजिक जीवन पर भी असर पड़ा और दोस्तों से दूरी बढ़ गई। हालांकि उन्होंने इसे अपने लक्ष्य के लिए जरूरी समझा और आगे बढ़ते रहे।
बड़ा फैसला: IFoS इंटरव्यू छोड़ दिया
पुलकित जैन ने उसी साल IFoS इंटरव्यू भी क्वालिफाई किया था, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि होती है। लेकिन उन्होंने उसे छोड़ने का फैसला लिया, ताकि वह पूरी तरह UPSC पर फोकस कर सकें। यह निर्णय आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य को प्राथमिकता दी और आखिरकार उसी का परिणाम उन्हें सफलता के रूप में मिला।


