अमेरिका में एक भारतीय IT कर्मचारी ने बच्चे की देखभाल के लिए काम के घंटे बदलने का अनुरोध किया। मैनेजर की सहायक प्रतिक्रिया ने भारत के 'टॉक्सिक' वर्क कल्चर के विपरीत एक बेहतर माहौल को दर्शाया, जिससे कर्मचारी ने भारत लौटने में डर व्यक्त किया।
भारत में वर्कप्लेस को लेकर अक्सर यह शिकायत रहती है कि यहां का माहौल बहुत 'टॉक्सिक' है। जैसे- छुट्टी मांगने पर नहीं मिलती, ज़्यादा घंटे काम करना पड़ता है लेकिन उसकी पेमेंट नहीं होती, परिवार-दोस्तों के लिए वक्त नहीं मिलता और ऊपर से मैनेजर का खराब बर्ताव। ये लिस्ट काफी लंबी है। लेकिन, कई लोग कहते हैं कि विदेशों में ऐसा नहीं होता। इसी से जुड़ी एक पोस्ट सोशल मीडिया पर सबका ध्यान खींच रही है।
अमेरिका में आईटी सेक्टर में काम करने वाले एक भारतीय युवक ने रेडिट पर अपना अनुभव शेयर किया है। उसने बताया कि जब उसने अपने बच्चे की देखभाल के लिए काम के घंटों में बदलाव की बात की, तो मैनेजर का जवाब दिल छू लेने वाला था।
युवक ने बताया कि उसके 7 महीने के बच्चे की देखभाल करने वाली नैनी (आया) शाम 4:30 बजे चली जाती है। वहीं, ऑफिस जाने वाली उसकी पत्नी रात 7:30 बजे तक घर लौटती है। इस बीच के तीन घंटे, वर्क फ्रॉम होम कर रहे इस युवक को ही बच्चे को संभालना होता है। उसने यह पूरी स्थिति अपने मैनेजर को मैसेज करके बताई। उसने कहा कि वह शाम 4:30 से 7:30 बजे तक काम से ब्रेक लेगा और इसकी भरपाई के लिए सुबह जल्दी लॉग-इन कर लेगा या रात में देर तक काम कर लेगा।
इस पर मैनेजर का जवाब आया, 'यह तो बहुत अच्छी बात है। मुझे उम्मीद है कि आपका बच्चा नैनी के साथ एन्जॉय करता होगा और नई चीजें सीखता होगा। यह जानकारी देने के लिए शुक्रिया। बस अपने कैलेंडर में उस समय को 'आउट ऑफ ऑफिस' (OOO) मार्क कर देना, ताकि शेड्यूल को लेकर कोई कन्फ्यूजन न हो।'
युवक का कहना है कि मैनेजर का यह जवाब पढ़कर वह इमोशनल हो गया। उसने यह भी लिखा कि भारत में ऐसे हालात नहीं हैं, इसलिए अब उसे वहां जाकर काम करने में डर लगता है। युवक ने कहा, "भले ही मुझे अपने देश, लोगों और त्योहारों की याद आती है, लेकिन अमेरिका के इस बेहतरीन वर्क कल्चर को छोड़कर भारत वापस जाकर काम करना अब मुमकिन नहीं लगता।" इस पोस्ट पर कई लोगों ने कमेंट्स किए। ज्यादातर लोगों ने कहा कि हर कोई ऐसे ही मैनेजर डिजर्व करता है।


