IT छंटनी में 40 लाख की नौकरी जाने पर एक इंजीनियर 1.4 करोड़ के फ्लैट की 95,000 की EMI चुकाने के लिए रैपिडो ड्राइवर बन गया है। यह घटना बड़ी सैलरी वाली नौकरियों से जुड़े वित्तीय जोखिमों और अनिश्चितता को दर्शाती है।
नई दिल्ली: एक वक्त था जब हाथ में 40 लाख रुपये सालाना की नौकरी थी, शानदार जिंदगी थी और बड़े-बड़े सपने थे। लेकिन आईटी सेक्टर में आई छंटनी (Layoff) की एक लहर ने इस सॉफ्टवेयर इंजीनियर की दुनिया ही पलट दी। कभी शान से खरीदा गया करोड़ों का फ्लैट आज गले की फांस बन गया है। साल 2024 में जब करियर अपने पीक पर था, तो इस टेकी ने दिल्ली के पास NCR के 'प्रतीक ग्रैंड सिटी' में 1.4 करोड़ रुपये का एक 3BHK फ्लैट खरीदा था। उस वक्त लाखों की सैलरी के आगे 95,000 रुपये की EMI कोई बड़ी बात नहीं लग रही थी। लेकिन, अचानक नौकरी चली गई और पिछले तीन महीनों से उनकी जिंदगी पटरी से उतर गई है। सैलरी तो बंद हो गई, लेकिन बैंक की किस्तें कहां रुकने वाली थीं।
AC ऑफिस से रैपिडो बाइक तक का सफर
घर को नीलाम होने से बचाने और हर महीने की किस्त चुकाने के लिए जब कोई और रास्ता नहीं सूझा, तो यह पूर्व टेकी अब 'रैपिडो' (Rapido) बाइक टैक्सी ड्राइवर बन गया है। AC ऑफिस में बैठकर कोडिंग करने वाले हाथ अब ट्रैफिक के बीच बाइक का हैंडल थामे हुए हैं। हर ट्रिप से मिलने वाले दस-बीस रुपये जोड़कर महीने के 95 हजार रुपये जुटाने के लिए वह दिन-रात एक कर रहे हैं।
उनके एक दोस्त ने सोशल मीडिया पर दर्द बयां करते हुए लिखा, "जब उसने वो फ्लैट खरीदा था, तो वह बहुत खुश और उत्साहित था। लेकिन अब वही घर उसकी रातों की नींद उड़ा रहा है।" नौकरी की अनिश्चितता और सिर पर कर्ज के पहाड़ के बीच फंसे इस इंजीनियर की मानसिक हालत भी बिगड़ रही है।
IT सेक्टर की कड़वी सच्चाई
यह घटना आईटी सेक्टर में मिलने वाले भारी-भरकम सैलरी पैकेज के 'झूठे सुरक्षा कवच' की पोल खोलती है। यह कहानी बताती है कि सालाना लाखों कमाने के बावजूद, अगर एक महीने की भी इनकम रुक जाए तो मिडिल क्लास परिवारों की आर्थिक हालत कैसे चरमरा सकती है। यह घटना हमें सिखाती है कि लंबे समय का कोई भी लोन लेते वक्त भविष्य की अनिश्चितताओं को ध्यान में रखना कितना जरूरी है।
