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Success Story: ₹6000 से शुरू किया काम, बिहार के दो भाई कचरे से बना रहे स्टाइलिश फर्नीचर, USA-जर्मनी तक एक्सपोर्ट
Bihar Brothers Minus Degre Startup Success Story: बिहार के दो भाइयों ने प्लास्टिक कचरे को रीसायकल कर सफल स्टार्टअप Minus Degre बनाया। जानिए कैसे सिर्फ 6000 रुपए की मशीन से शुरुआत कर कचरे से इको-फ्रेंडली प्रोडक्ट्स बनाकर देश-विदेश में पहचान बनाई।

कॉर्पोरेट नौकरी की बजाय प्लास्टिक के कचरे पर किया काम
नवादा जिले के नरहट गांव के रहने वाले विकास कुमार और राहुल कुमार ने वो रास्ता चुना, जो आमतौर पर लोग छोड़ देते हैं। दोनों के पास अच्छी पढ़ाई और करियर के मौके थे, लेकिन उन्होंने कॉर्पोरेट नौकरी की बजाय समाज की एक बड़ी समस्या पर काम करने का फैसला किया और वह था प्लास्टिक कचरा। जानिए कौन हैं विकास कुमार और राहुल कुमार और क्या है इनका बिजनेस।
कौन हैं विकास कुमार और राहुल कुमार
विकास कुमार Minus Degre स्टार्टअप के फाउंडर हैं। विकास ने आईआईटी दिल्ली से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है। वहीं राहुल कुमार इस स्टार्टअप के को-फाउंडर हैं। राहुल विजअल डिजाइनर हैं और NIFT दिल्ली से पढ़ाई पूरी की है। कोरोना लॉकडाउन के दौरान जब सब कुछ रुका हुआ था, तभी उन्होंने अपने स्टार्टअप Minus Degre की शुरुआत की।
खुद घर-घर जाकर प्लास्टिक कचरा इकट्ठा किया
शुरुआत में दोनों भाई खुद घर-घर जाकर प्लास्टिक कचरा इकट्ठा करते थे। फिर उसे पिघलाकर छोटे-छोटे प्रोडक्ट जैसे ईयररिंग्स, कीचेन और बैज बनाते थे। करीब 6,000 रुपए की एक छोटी मशीन से शुरू हुआ ये काम आज बड़े स्तर पर पहुंच चुका है। अब ये हर महीने लगभग 10 टन प्लास्टिक रीसायकल करते हैं और सालाना करीब 120 टन कचरे को नए प्रोडक्ट्स में बदल देते हैं।
प्लास्टिक से बन रहे बेंच, टाइल्स और ट्रॉफी
आज उनके बनाए प्रोडक्ट्स सिर्फ छोटे आइटम तक सीमित नहीं हैं। वे प्लास्टिक से मजबूत शीट्स और पैनल बनाते हैं, जो देखने में मार्बल जैसे लगते हैं। इनसे बेंच, टेबल, टाइल्स, ट्रॉफी और सजावटी सामान तैयार किया जाता है। खास बात ये है कि ये प्रोडक्ट्स पानी से खराब नहीं होते, दीमक नहीं लगती और जल्दी टूटते भी नहीं।
देश से लेकर विदेश तक डिमांड
अब उनकी कंपनी के क्लाइंट्स में बड़ी कंपनियां भी शामिल हैं। Tata Motors, Adidas, BMW और IDFC Bank जैसे नाम उनके साथ काम कर चुके हैं। यही नहीं, उनके प्रोडक्ट्स राष्ट्रपति भवन के गिफ्ट शॉप तक पहुंच चुके हैं। वहीं अमेरिका, जर्मनी, कनाडा, ताइवान और सिंगापुर जैसे देशों में भी उनका सामान एक्सपोर्ट हो रहा है।
कचरे से रोजगार भी, दर्जनों लोगों को मिला काम
इस स्टार्टअप का असर सिर्फ पर्यावरण तक सीमित नहीं है। ये 30 से ज्यादा कबाड़ी और कचरा इकट्ठा करने वाले लोगों से जुड़ा हुआ है और एक दर्जन से ज्यादा लोगों को रोजगार भी दे रहा है। जो लोग पहले अनदेखे रह जाते थे, अब उनकी आय और पहचान दोनों बढ़ी है। विकास और राहुल का मानना है कि प्लास्टिक खुद में बुरा नहीं है, बल्कि उसे इस्तेमाल करने के बाद फेंक देना और उसकी वैल्यू ना समझना असली समस्या है। उनका मकसद है कि लोग कचरे को भी एक संसाधन के रूप में देखें और जिम्मेदारी से इस्तेमाल करें।
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