बालाघाट में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नक्सल मुक्त अभियान में साहस दिखाने वाले 60 पुलिस जवानों को पदोन्नति देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में शहीदों को श्रद्धांजलि, पुलिस थानों का लोकार्पण और नक्सल उन्मूलन की सफलता पर जोर दिया गया।

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज बालाघाट जिले में आयोजित कार्यक्रम में नक्सल मुक्त अभियान के दौरान अदम्य साहस और शौर्य का परिचय देने वाले मध्यप्रदेश पुलिस के 60 जवानों को क्रम से पूर्व पदोन्नति प्रदान कर सम्मानित किया। यह सम्मान नक्सल उन्मूलन में जवानों के उल्लेखनीय योगदान को समर्पित रहा। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री के बालाघाट पुलिस लाइन पहुंचने पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अमर जवान ज्योति पर पुष्पचक्र अर्पित कर प्रदेश की शांति और सुरक्षा के लिए शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी।

ISO मानकों के 32 पुलिस थानों का लोकार्पण, नक्सल संस्मरण पुस्तक का विमोचन

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बालाघाट जिले के 32 पुलिस थानों एवं अन्य शासकीय कार्यालयों का एक क्लिक से लोकार्पण किया, जिन्हें आईएसओ मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है। संबंधित प्रमाण पत्र भी मंच से प्रदान किए गए। इस अवसर पर पुलिस जवानों द्वारा प्रस्तुत भावपूर्ण गीत “वो बांके अलबेले- जो वापस न लौटे- इस मिट्टी के बेटे” ने सभी को भावुक कर दिया। मुख्यमंत्री ने “नक्सल संस्मरण” पुस्तक का भी विमोचन किया।

बालाघाट के आत्मबल ने कठिन नक्सल चुनौती का किया अंत

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बालाघाट के नाम में ही बल है। इस जिले ने अपने आत्मबल और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर हिमालय जैसी कठिन नक्सल चुनौती का अंत करके दिखाया है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में देशभर में नक्सल उन्मूलन का वातावरण बना। मध्यप्रदेश पुलिस ने प्रभावी रणनीति के साथ अभियान चलाकर नक्सलियों को घुटने टेकने पर मजबूर किया और प्रदेश में “लाल सलाम” को अंतिम सलाम दिया।

हॉक फोर्स के वीर जवानों की भूमिका नक्सल उन्मूलन में अत्यंत सराहनीय रही। जहां कभी हिंसा और भय का माहौल था, वहां आज शांति और विकास लौट चुका है। मुख्यमंत्री ने गर्व के साथ कहा कि अब मध्यप्रदेश की धरती पूरी तरह नक्सल मुक्त है।

नक्सल हिंसा में शहीद हुए 38 पुलिस जवान और 27 नागरिक

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बालाघाट में पूर्व मंत्री स्व. लिखीराम कावरे की सरेआम हत्या प्रदेश के लिए बड़ी चुनौती थी। मध्यप्रदेश की 836 किलोमीटर लंबी सीमा छत्तीसगढ़ से लगती है, जिससे नक्सल समस्या और जटिल हो गई थी। नक्सल हिंसा में प्रदेश ने 38 पुलिस जवानों और 27 आम नागरिकों को खोया। बाबा महाकाल के आशीर्वाद और सरकार की दृढ़ नीति से नक्सलवादियों को जड़ से समाप्त करने में सफलता मिली।

हॉक फोर्स की रणनीति से नक्सलियों पर निर्णायक प्रहार

घने जंगलों और कठिन परिस्थितियों में हॉक फोर्स ने मेगाकासो रणनीति के तहत अभियान चलाए। 4 दुर्दांत नक्सली मारे गए और पिछले वर्ष की तुलना में 23 प्रतिशत अधिक, कुल 4104 नक्सल विरोधी अभियान संचालित किए गए। मानसून और जंगली जानवरों जैसी चुनौतियों के बावजूद अभियान लगातार जारी रहे। वर्ष 2025 में अब तक 10 सबसे खतरनाक हार्डकोर नक्सलियों को ढेर किया गया है। सरकार के “सरेंडर करो या मारे जाओ” संदेश को पुलिस बल ने प्रभावी रूप से लागू किया।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास और शिक्षा पर विशेष फोकस

भविष्य में नक्सलियों को दोबारा पैर जमाने का मौका न मिले, इसके लिए सरकार ने विकास को प्राथमिकता दी है। बालाघाट जिले में नक्सल प्रभावित 250 स्कूलों का नवीनीकरण किया गया है। स्थानीय नागरिकों के लिए एकल सुविधा केंद्र, जनजातीय समुदायों को वन अधिकार पट्टे, जाति प्रमाण पत्र और रोजगार शिविरों की शुरुआत की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह वर्ष कृषि कल्याण का है और जल्द ही बालाघाट में कृषि कैबिनेट आयोजित की जाएगी। अमर जवान ज्योति बालाघाट में नक्सल मुक्त अभियान के स्मारक के रूप में स्थापित होगी।

प्रधानमंत्री के नेतृत्व में नक्सल उन्मूलन के सकारात्मक परिणाम

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आतंक और नक्सलवाद के खिलाफ की गई कार्रवाई के सकारात्मक और ठोस परिणाम सामने आए हैं। हॉक फोर्स की दृढ़ इच्छाशक्ति और सरकार की स्पष्ट नीति से मध्यप्रदेश समय सीमा से पहले नक्सल मुक्त राज्य बन चुका है। मुख्यमंत्री ने नक्सलियों से मुख्यधारा में लौटने और आत्मसमर्पण करने की अपील दोहराई।