यूपी सरकार की आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 रिपोर्ट में स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े सुधार सामने आए हैं। मेडिकल कॉलेजों की संख्या 36 से बढ़कर 81 हुई, मोबाइल मेडिकल यूनिट और ई-संजीवनी से लाखों लोगों को इलाज और टेली परामर्श मिला।
लखनऊ। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने सोमवार को विधानसभा के बजट सत्र में उत्तर प्रदेश सरकार की वर्ष 2025-26 की आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी। रिपोर्ट में प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर विशेष जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा योजनाबद्ध तरीके से किए गए प्रयासों का असर अब जमीन पर साफ दिखाई दे रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, गुणवत्ता और क्षमता में लगातार सुधार हुआ है।
मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार से मजबूत हुई स्वास्थ्य व्यवस्था
वित्त मंत्री ने बताया कि प्रदेश में राजकीय और निजी मेडिकल कॉलेजों की संख्या में ऐतिहासिक वृद्धि हुई है। इससे न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ी है, बल्कि मेडिकल शिक्षा के अवसर भी तेजी से बढ़े हैं। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों तक चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने के लिए सरकार ने आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग किया है।
यूपी में मेडिकल कॉलेजों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
सुरेश खन्ना ने बताया कि वर्ष 2017 तक प्रदेश में कुल 36 मेडिकल कॉलेज थे, जिनमें 15 राजकीय और 21 निजी मेडिकल कॉलेज शामिल थे। सरकार की प्राथमिकता के चलते वर्ष 2025 के अंत तक मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 81 हो गई है। इनमें 45 राजकीय और 36 निजी मेडिकल कॉलेज शामिल हैं। इस वृद्धि से प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हुई हैं और हर साल बड़ी संख्या में नए डॉक्टर तैयार हो रहे हैं।
अटल बिहारी वाजपेयी राज्य चिकित्सा विश्वविद्यालय की स्थापना
प्रदेश में मेडिकल और डेंटल शिक्षा की गुणवत्ता और परीक्षाओं में एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी राज्य चिकित्सा विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है। इससे चिकित्सा शिक्षा को एक संगठित और मानक ढांचा मिला है।
मोबाइल मेडिकल यूनिट से गांव-गांव तक इलाज
ग्रामीण और सुदूरवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए मोबाइल मेडिकल यूनिट सेवा शुरू की गई। वर्तमान में प्रदेश के 54 जनपदों में कुल 170 मोबाइल मेडिकल यूनिट संचालित हैं। इन यूनिट्स के जरिए अब तक 2.05 करोड़ से अधिक मरीजों का उपचार किया जा चुका है। यह सेवा उन लोगों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रही है, जिन्हें अस्पताल तक पहुंचने में कठिनाई होती है।
ई-संजीवनी टेली मेडिसिन सेवा से 22 लाख से ज्यादा ओपीडी परामर्श
प्रदेश में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देते हुए टेली मेडिसिन सेवाओं का भी तेजी से विस्तार किया गया है। भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार 11 मई 2021 से ई-संजीवनी टेली परामर्श सेवा शुरू की गई। वर्तमान में प्रदेश के 26 मेडिकल कॉलेजों में यह सेवा संचालित है। अब तक 22,53,320 ओपीडी टेली परामर्श दिए जा चुके हैं। इस सेवा से मरीजों को घर बैठे विशेषज्ञ डॉक्टरों से सलाह मिल रही है, जिससे समय और खर्च दोनों की बचत हो रही है।


