Lufthansa flight cancellations 2026: ईरान तनाव के चलते यूरोप में जेट फ्यूल संकट गहराया। लुफ्थांसा ने 20 हजार फ्लाइट्स रद्द कीं, कई रूट बंद। टिकट महंगे होने की आशंका, यात्रियों को कनेक्टिंग फ्लाइट्स का सामना करना पड़ सकता है।
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव अब आम यात्रियों की जेब और सफर दोनों को प्रभावित कर रहा है। ईरान से जुड़े तनाव और तेल सप्लाई पर असर के चलते यूरोप में जेट फ्यूल का संकट गहराता जा रहा है। इसी के बीच जर्मनी की प्रमुख एयरलाइन लुफ्थांसा ने एक बड़ा फैसला लेते हुए हजारों उड़ानें रद्द करने का ऐलान किया है, जिसका असर आने वाले महीनों में लाखों यात्रियों पर पड़ सकता है।
20 हजार फ्लाइट्स रद्द, रोजाना 120 उड़ानें कम
लुफ्थांसा ने मई से अक्टूबर के बीच करीब 20 हजार शॉर्ट-हॉल फ्लाइट्स रद्द करने का फैसला लिया है। कंपनी ने पहले ही रोजाना करीब 120 उड़ानें घटानी शुरू कर दी हैं। इस कदम से कंपनी लगभग 40 हजार टन जेट फ्यूल की बचत करने की योजना बना रही है।
यह भी पढ़ें: Bengal Chunav Phase 1: 'अरे दीदी' और 'आतंकवादी' वाले बयानों से गरमाया बंगाल, 152 सीटों पर वोटिंग कल
ईरान तनाव और होर्मुज स्ट्रेट का असर
इस संकट की बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य में बना तनाव है, जो वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम मार्ग माना जाता है। ईरान से जुड़े हालात के चलते इस क्षेत्र में सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे यूरोप में जेट फ्यूल की कीमतें लगभग दोगुनी हो चुकी हैं।
यूरोप में सिर्फ 6 हफ्ते का फ्यूल स्टॉक
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने चेतावनी दी है कि यूरोप के पास सिर्फ 6 हफ्तों का जेट फ्यूल स्टॉक बचा है। यह स्थिति एयरलाइंस के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।
नेटवर्क में बड़े बदलाव, घाटे वाले रूट बंद
लुफ्थांसा ने अपने नेटवर्क में बड़े बदलाव करते हुए घाटे वाले रूट्स को बंद करने का फैसला लिया है। फ्रैंकफर्ट और म्यूनिख से कई रूट्स बंद किए जाएंगे, जबकि ज्यूरिख, ब्रसेल्स और वियना से उड़ानें बढ़ाई जाएंगी। इसके अलावा, कंपनी 6 बड़े विमान हटाने जा रही है, जिनमें बोइंग 747 और एयरबस A340-600 शामिल हैं। साथ ही सिटीलाइन बेड़े के 27 विमान भी बंद किए जा रहे हैं।
अन्य एयरलाइंस पर भी असर
यह संकट सिर्फ लुफ्थांसा तक सीमित नहीं है। डेल्टा एयरलाइंस, कैथे पैसिफिक, एयर एशिया X और एयर न्यूजीलैंड जैसी कंपनियां भी अपने नेटवर्क में कटौती कर रही हैं। ईजीजेट और वर्जिन अटलांटिक ने भी बढ़ती लागत और घटते मुनाफे को लेकर चिंता जताई है।
यात्रियों पर क्या होगा असर?
जेट फ्यूल की कीमतें बढ़ने का सीधा असर यात्रियों पर पड़ रहा है। एयरलाइंस की कुल लागत में फ्यूल का हिस्सा 25% से 40% तक होता है। ऐसे में कंपनियां या तो टिकट महंगे कर रही हैं या फ्लाइट्स कम कर रही हैं। रूट्स में बदलाव का मतलब है कि कई डायरेक्ट फ्लाइट्स बंद हो सकती हैं और यात्रियों को कनेक्टिंग फ्लाइट्स लेनी पड़ सकती हैं, जिससे यात्रा का समय और झंझट दोनों बढ़ेंगे।
लुफ्थांसा का यह फैसला एक बड़े वैश्विक संकट की ओर इशारा करता है, जहां भू-राजनीतिक तनाव का असर सीधे आम लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि क्या स्थिति सुधरती है या फिर एयर ट्रैवल और महंगा और जटिल होता चला जाएगा।
यह भी पढ़ें: कानपुर के मकान में चल रहा था IPL सट्टेबाजी का खेल, तभी अचानक पहुंच गई पुलिस, फिर...
