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Hormuz Tensions Hit India: फारस की खाड़ी में 38 भारतीय जहाज फंसे, हमलों में 3 नाविकों की मौत-क्या बढ़ेगा तेल संकट?
Global Shipping Alert: होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच फारस की खाड़ी में 38 भारतीय जहाज और 1100 नाविक फंस गए हैं। विदेशी जहाजों पर हमलों में 3 भारतीय नाविकों की मौत हुई है, जबकि तेल सप्लाई और कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है।

Hormuz Tensions Hit India: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब सीधे भारत पर भी दिखने लगा है। ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक फारस की खाड़ी में 38 भारतीय जहाज और करीब 1100 नाविक फंसे हुए हैं। इस बीच विदेशी झंडे वाले जहाजों पर हुए हमलों में तीन भारतीय नाविकों की मौत और एक के घायल होने की खबर ने चिंता और बढ़ा दी है। दरअसल, क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण दुनिया के सबसे अहम तेल शिपिंग रूट-होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास हालात काफी संवेदनशील हो गए हैं। बताया जा रहा है कि कई जहाज कच्चा तेल और LNG लेकर इस रास्ते से गुजर रहे थे, लेकिन सुरक्षा खतरे के कारण शिपिंग ट्रैफिक बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
होर्मुज जलडमरूमध्य इतना अहम क्यों माना जाता है?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर इस रास्ते पर लंबे समय तक रुकावट बनी रहती है तो ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर सीधा असर पड़ सकता है। यही वजह है कि यहां होने वाली हर हलचल पर पूरी दुनिया की नज़र रहती है।
फारस की खाड़ी में भारतीय जहाज क्यों फंस गए?
मौजूदा तनाव के कारण कई शिपिंग कंपनियों ने सुरक्षा कारणों से अपने जहाजों की आवाजाही धीमी कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 38 भारतीय जहाज अभी फारस की खाड़ी के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद हैं, जिन पर लगभग 1100 भारतीय नाविक काम कर रहे हैं। सरकारी जानकारी के अनुसार 24 भारतीय जहाज होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में और 14 जहाज पूर्वी हिस्से में हैं।
हमलों में भारतीय नाविक कैसे बने निशाना?
शिपिंग अधिकारियों के अनुसार ओमान के तट के पास विदेशी झंडे वाले जहाजों पर कुछ हमले हुए। इन घटनाओं में तीन भारतीय नाविकों की मौत और एक के घायल होने की पुष्टि हुई है। हालांकि राहत की बात यह है कि भारतीय झंडे वाले जहाजों पर अब तक कोई सीधा हमला नहीं हुआ है, लेकिन क्षेत्र में खतरा अभी भी बना हुआ है।
अगर होर्मुज स्ट्रेट बंद हुआ तो तेल की कीमतें कितनी बढ़ सकती हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव बढ़ता है और होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय के लिए प्रभावित होता है, तो कच्चे तेल की कीमतें 95 से 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। ऐसी स्थिति में तेल आयात करने वाले देशों, खासकर भारत जैसी अर्थव्यवस्थाओं पर बड़ा असर पड़ सकता है।
भारत की तेल इंपोर्ट निर्भरता क्यों चिंता बढ़ा रही है?
भारत अपनी लगभग 90 प्रतिशत कच्चे तेल की जरूरतें इंपोर्ट से पूरी करता है। इसका बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट से आता है। ऐसे में अगर इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो तेल की कीमतें बढ़ने के साथ महंगाई पर भी असर पड़ सकता है।
भारत के पास संकट से निपटने के क्या विकल्प हैं?
सरकार ने पिछले कुछ सालों में तेल सप्लाई को सुरक्षित रखने के लिए कई कदम उठाए हैं। भारत अब रूस, अमेरिका और लैटिन अमेरिका से भी कच्चा तेल खरीद रहा है ताकि मिडिल ईस्ट पर निर्भरता कम हो सके। इसके अलावा देश के पास स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व भी हैं, जिनका इस्तेमाल आपात स्थिति में किया जा सकता है।
सरकार भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए क्या कर रही है?
इस पूरे मामले को देखते हुए केंद्रीय शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की है। उन्होंने साफ निर्देश दिए हैं कि भारतीय क्रू मेंबर्स की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। फिलहाल सरकार और शिपिंग एजेंसियां लगातार हालात पर नजर रखे हुए हैं।
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