मौत के 25 दिन बाद भाई-बहनों का हुआ अंतिम संस्कार, कलेजा फाड़ देंगी ये तस्वीरें
Manipur Violence : मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में 7 अप्रैल को हुए बम धमाके में 5 साल के बच्चे और उसकी 6 महीने की बहन की मौत हो गई थी। परिवार ने 2 मई को दोनों मासूमों का अंतिम संस्कार किया। यानि मासूमों की मौत के 25 दिन बाद उनका अंतिम क्रियाक्रम हुआ।

मणिपुर हिंसा की सबसे मार्मिक तस्वीर
2 मई को मणिपुर के ट्रोंगलाओबी गांव से वो दर्दनाक तस्वीरें सामने आईं जिनको देखकर हर कोई रो पड़ा। पत्थर दिल वाला भी आंसू बहाते नजर आया। क्योंकि मार्मिक क्षण था 7 अप्रैल को बम धमाके में मारे गए 5 साल के बच्चे और उसकी 6 महीने की बहन की अंतिम संस्कार का। मासूमों का मौत के 25 दिन बाद आज अंतिम संस्कार किया गया।
7 अप्रैल को मणिपुर में खतरनाक हमला
दरअसल, आरोप है कि 7 अप्रैल को मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में मिलिटेंट्स ने देर रात एक घर पर बम फेंके गए थे। इन्हीं धमाकों में घर के अंदर सो रहे 5 साल के लड़के और उसकी 6 महीने की बहन की मौत हो गई, जबकि उनकी मां घायल हुई थी। इस घटना के बाद मणिपुर की हिंसा फिर से सुलग गई।
25 दिन से मासूमों के शव अस्पताल में रखे थे
पीड़ित परिवार के लोग सरकार से न्याय की गुहार लगा रहे थे। उनका कहना था कि जब तक उन आरोपियों को नहीं पकड़ा जाता, जिन्होंने हमारे बच्चों की जान ली है वह अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। तभी से इन भाई-बहनों के शव इंफाल के रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के मुर्दाघर में रखे थे।
हत्या का आरोप कुकी उग्रवादियों पर
पीड़ित परिवार ने इस बम धमाकों और हमले का आरोप कुकी उग्रवादियों पर लगाया गया। बच्चों की मौत से गुस्साए सैंकड़ों लोगों ने सीआरपीएफ कैंप पर हमला कर दिया, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने फायरिंग कर दी। जिसमें दो और लोगों की जान चली गई।
ममिपुर में जगह-जगह विरोध-प्रदर्शन
दो बच्चों और दो अन्य लोगों की मौत के बाद इलाके में दहशत का माहौल बन गया। इन मौतों ने मणिपुर हिंसा के दर्द को कई गुना बढ़ा दिया है। दो बच्चों की मौत के बाद से ममिपुर में जगह-जगह विरोध-प्रदर्शन चल रहे हैं।
बच्चों की मौत की कीमत 10 लाख रुपए
बच्चों की मौत के बाद परिवार का हर शख्स सदमे में है। बच्चों के 71 साल के दादा, बाबुटन ओइनाम रोते हुए बोले-सरकार हमें 10-10 लाख रुपए लेकर बच्चों का अंतिम संस्कार करने को कह रही है, लेकिन हम ये पैसा नहीं लेना चाहिए। हमें तो बस न्याय चाहिए, उन हत्यारों को खोजकर लाओ और हमारे सामने उन्हें फांसी की सजा दो।
मणिपुर सरकार पर लग रहे गंभीर आरोप
बता दें कि मणिपुर सरकार ने इस घटना की जांच एनआईए को सौंपी है। लेकिन पीड़ित परिवार के लोगों का कहना है कि सरकार हमसे सच छिपा रही है। वह हत्यारों को जानती है, लेकिन पुलिस कुछ नहीं कर रही है। पहले से जो कैदी जेल में बंद हैं, उन्हें हमारे बच्चों का हत्यारा बताया जा रहा है।
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