अमेरिका-ईरान युद्धविराम से कच्चे तेल की कीमत 160 से गिरकर 100 डॉलर प्रति बैरल हो गई है। चूँकि यह युद्धविराम सिर्फ 2 हफ्तों के लिए अस्थायी है, इसलिए भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम में फिलहाल कटौती की उम्मीद नहीं है।

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही लड़ाई पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। दोनों देशों में सीजफायर का ऐलान हुआ है, जिससे लोगों ने राहत की सांस ली है। इस ऐलान के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें धड़ाम से गिर गई हैं। कच्चे तेल का भाव अब 100 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है, जो जंग के दौरान 160 डॉलर तक पहुंच गया था। कच्चे तेल के दाम गिरने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत में पेट्रोल और डीजल सस्ता होगा?

अस्थायी है युद्धविराम

अमेरिका-ईरान के बीच हुए इस सीजफायर से कच्चे तेल की कीमतों में 13 से 14 फीसदी की गिरावट आई है। जंग के दौरान भारत में पेट्रोल-डीजल की किल्लत तो नहीं हुई, लेकिन LPG गैस की सप्लाई में दिक्कतें आई थीं। अब वो समस्या भी सुलझ गई है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि तेल की कीमतों में इस गिरावट के बावजूद भारत में फिलहाल पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई बड़ी कटौती की उम्मीद नहीं है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि यह युद्धविराम सिर्फ दो हफ्तों के लिए है। अगर दो हफ्ते बाद जंग फिर शुरू हो गई, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। भविष्य में ऐसी किसी भी स्थिति से निपटने और महंगाई को काबू में रखने के लिए भारत को तेल का भंडार जमा करने की भी जरूरत है। इसलिए, फिलहाल भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव की संभावना नहीं है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत अब गिरकर 94 से 96 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई है। इसे हाल के दिनों की सबसे बड़ी गिरावट माना जा रहा है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल विदेशों से ही खरीदता है। जंग के दौरान हुए नुकसान की भरपाई के चलते भी तेल कंपनियां तुरंत दाम कम नहीं करेंगी।

महंगाई पर काबू रखने की कोशिश

अगर यह युद्धविराम आगे भी जारी रहता है और कोई स्थायी समाधान निकलता है, तो भारत में तेल की कीमतों में कुछ नरमी देखने को मिल सकती है। लेकिन तब भी बहुत बड़ी कटौती की उम्मीद करना ठीक नहीं होगा। सरकार महंगाई को काबू में रखने के लिए पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखने पर ज्यादा ध्यान देगी।

कच्चे तेल के दाम गिरने से सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के सभी देशों को राहत मिली है। लेकिन अगर जंग दोबारा शुरू होती है, तो स्थिति और भी खराब हो जाएगी। क्योंकि अगर अमेरिका ने फिर से युद्ध छेड़ा तो यह बहुत विनाशकारी होगा, जिसका असर भारत समेत पूरे एशिया के देशों पर बुरी तरह पड़ेगा।