BCCI के नियम के कारण अपने आखिरी U-19 विश्व कप फाइनल से पहले वैभव सूर्यवंशी सो नहीं पाए। उन्होंने दबाव में 80 गेंदों पर 175 रन का रिकॉर्ड बनाया और भारत को छठी बार खिताब जिताने में मदद की।
हरारे: भारत के युवा स्टार वैभव सूर्यवंशी ने बताया कि वह अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल से एक रात पहले सो नहीं पाए थे। 'रे स्पोर्ट्स' को दिए एक इंटरव्यू में वैभव ने कहा कि यह सोचकर उनकी नींद उड़ गई थी कि यह वर्ल्ड कप में उनका आखिरी मैच होगा और वह दोबारा कभी इस टूर्नामेंट में नहीं खेल पाएंगे।
हम फाइनल मैच को एक 'आम मैच' की तरह देखना चाहते थे, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। मैच से एक रात पहले मैं सो नहीं सका। शायद एक घंटा भी ठीक से नहीं सोया होऊंगा। क्योंकि हम चाहे कितनी भी कोशिश कर लें, हम पर एक दबाव तो था ही। हो सकता है कि भविष्य में मुझे सीनियर लेवल पर भारत के लिए वर्ल्ड कप खेलने का मौका मिले, लेकिन अंडर-19 वर्ल्ड कप खेलने का मौका फिर कभी नहीं मिलेगा। वैभव ने कहा कि यह किसी भी खिलाड़ी के लिए एक यादगार पल होता है।
उम्र के हिसाब से देखें तो वैभव के पास दो और अंडर-19 वर्ल्ड कप (2028, 2030) खेलने का मौका है। लेकिन BCCI का 'एक-टूर्नामेंट' नियम यहां वैभव के लिए एक रुकावट बन जाएगा। BCCI की नीति के अनुसार, अगर कोई खिलाड़ी एक बार अंडर-19 वर्ल्ड कप खेल लेता है, तो उसे दोबारा उसी टूर्नामेंट के लिए नहीं चुना जाएगा। BCCI ने 2016 से जूनियर लेवल पर उम्र की धोखाधड़ी को खत्म करने के लिए इस नियम को सख्ती से लागू किया। इसका मकसद ज्यादा खिलाड़ियों को मौका देना और नई प्रतिभाओं को खोजना भी था। बोर्ड का लक्ष्य ऐसे खिलाड़ी बनाने के बजाय जो सिर्फ अंडर-19 लेवल तक ही सीमित रहें, उन्हें सीनियर लेवल तक बढ़ने के लिए प्रेरित करना था। इसलिए, वैभव को 2028 में होने वाले अंडर-19 वर्ल्ड कप में टीम में जगह नहीं मिलेगी। BCCI ने 2016 से इस नियम को सख्ती से लागू करना शुरू किया। यह सुझाव पूर्व भारतीय खिलाड़ी और कोच राहुल द्रविड़ ने दिया था।
वैभव ने अपने करियर के इकलौते अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल को यादगार बना दिया। 80 गेंदों में 175 रन बनाकर वैभव ने ICC टूर्नामेंट के इतिहास में किसी फाइनल में सबसे बड़े व्यक्तिगत स्कोर का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। वैभव ने अपना शतक 55 गेंदों में पूरा किया था। कल हुए फाइनल में भारत ने इंग्लैंड को 100 रनों से हराकर छठी बार खिताब अपने नाम किया।
