IPL 2026 में CSK लगातार 3 मैच हारकर संकट में है। कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ खराब फॉर्म और रणनीतिक चूकों के कारण दबाव में हैं। धोनी की छाया और संजू सैमसन की मौजूदगी से उनकी कप्तानी पर सवाल उठ रहे हैं।
बेंगलुरु: IPL 2026 में चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) की हालत पतली है। टीम लगातार तीन मैच हार चुकी है और कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ के फैसलों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। CSK सिर्फ एक क्रिकेट टीम नहीं, बल्कि फैंस के लिए एक इमोशन है। ऐसे में टीम को लीड करना गायकवाड़ के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। वो दिग्गज एमएस धोनी की छाया से बाहर निकलकर अपनी पहचान बनाने की कोशिश तो कर रहे हैं, लेकिन मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।
धोनी की परछाई और संजू की मौजूदगी
भले ही धोनी चोट की वजह से टीम से बाहर हैं, लेकिन उनका असर आज भी टीम पर है। इस वजह से गायकवाड़ पर भारी दबाव है। हालत यह है कि अगर उनका लिया कोई भी फैसला, जैसे बॉलिंग में बदलाव, विकेट नहीं दिला पाता, तो उस पर सवाल उठने लगते हैं। इसी बीच, राजस्थान रॉयल्स से टीम में आए संजू सैमसन की मौजूदगी ने मामले को और दिलचस्प बना दिया है। संजू का IPL में कप्तानी का रिकॉर्ड शानदार रहा है और वह वर्ल्ड कप विजेता भी हैं। टीम में उनकी मौजूदगी के कारण गायकवाड़ के हर कदम को बारीकी से देखा जा रहा है। ऐसी अटकलें हैं कि मैनेजमेंट के लिए गायकवाड़ के विकल्प के तौर पर संजू सबसे बेस्ट 'प्लान बी' हैं। यह बात कहीं न कहीं मौजूदा कप्तान के आत्मविश्वास को प्रभावित कर रही है।
रणनीति में चूक और टीम का कॉम्बिनेशन
CSK मैनेजमेंट ने इस सीजन में सीनियर खिलाड़ियों की जगह युवा चेहरों पर 30 करोड़ रुपये का दांव लगाया, लेकिन यह प्रयोग अब तक सफल नहीं हुआ है। 14.2 करोड़ रुपये में खरीदे गए प्रशांत वीर को ठीक से इस्तेमाल न करना और स्पिनर्स को संभालने में गायकवाड़ की हिचकिचाहट की भी आलोचना हो रही है। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ मैच में जब रजत पाटीदार क्रीज पर थे, तब नूर अहमद को गेंदबाजी देना एक बड़ी रणनीतिक चूक मानी जा रही है। इसके अलावा, गायकवाड़ खुद बल्ले से फॉर्म में नहीं हैं, जो उनकी मुश्किलें और बढ़ा रहा है।
मैनेजमेंट के सामने मुश्किल फैसला
अब मैनेजमेंट के सामने एक बड़ी दुविधा है। गायकवाड़ टीम के सबसे अहम बल्लेबाजों में से एक हैं। ऐसे में क्या उन्हें कप्तानी के दबाव में उलझाए रखना सही है, या फिर उन्हें इस जिम्मेदारी से मुक्त कर देना चाहिए ताकि वह अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान दे सकें? CSK के सामने 2022 का उदाहरण भी है, जब रवींद्र जडेजा को कप्तान बनाने का प्रयोग बुरी तरह फेल हो गया था। अगर आने वाले मैचों में टीम मजबूती से वापसी नहीं करती है, तो चेन्नई सुपर किंग्स के नेतृत्व में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। 11 अप्रैल को दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ होने वाला मैच गायकवाड़ और CSK, दोनों के लिए 'करो या मरो' जैसा हो सकता है।
