मध्यप्रदेश के उज्जैन से दहेज प्रथा के खिलाफ एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है, जहां दूल्हे पक्ष ने सगाई में दिए जा रहे करीब 50 लाख रुपये नकद और सोना लेने से इनकार कर दिया। दूल्हे के पिता ने कहा कि वे बहू नहीं बेटी घर ला रहे हैं, इसलिए बेटी से पैसा लेना उचित नहीं।
दहेज के लालच में पति से लेकर ससुर तक ना जाने कितनी महिलाओं की जिंदगी बर्बाद कर चुके हैं। रोजाना सैंकड़ों बहू-बेटियां दहेज प्रताड़ना से दुखी होकर सुसाइड कर रही हैं। लेकिन बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन से एक ऐसे सुखद खबर सामने आई है। जिसके बाद लोग कह रहे हैं कि अभी इंसानियत बची है। यहां दूल्हे पक्ष ने दहेज लेने से इनकार कर करीब 50 लाख रुपए की पेशकश लौटा दी। साथ ही दूल्हे के पिता ने कहा-हम बहू नहीं, बेटी को घर ले जा रहे हैं तो कौन अपनी बेटी से पैसा लेता है।
बड़नगर दिखी ये अनोखी मिसाल
दरअसल, दहेज प्रथा के खिलाफ यह अनोखी मिसाल पेश करने वाली घटना उज्जैन जिले के बड़नगर तहसील के बंगरेड गांव में देखने को मिली। जब रविवार को यहां के लोटस रिसॉर्ट में तिलक समारोह चल रहा था। दूल्हा लोटस ग्रुप के मालिक जितेंद्र सिंह राजावत का बेटा आदर्श दीप था। जिसकी शादी इंदौर के किसान महेंद्र सिंह पंवार की बेटी बिंदिया कुमारी से तय हुई थी। दोनों ही परिवार आर्थिक रूप से संपन्न हैं।
25 लाख कैश और 15 लाख का सोला लौटाया
बता दें कि इस सगाई की रस्म के दौरान उस वक्त सब हैरान रह गए। जब लड़की के पक्ष के लोग दूल्हे का तिलक करने के लिए 25 लाख रुपए नकद और करीब 15 तोला सोना एक थाल में लेकर आए थे। लेकिन दूल्हे और उनके पिता ने इस कैश और गोल्ड लेने से साफ इंकार कर दिया। उन्होंने कहा-हम कोई बिजनैस नहीं कर रहे हैं। परिवार का रिश्ता जोड़ने और बेटी को घर ले जाने के लिए आए हैं। इसलिए हम यह दहेज रूपी पैसा नहीं ले सकते हैं।
दिला के पिता ने कही दिल छू लेने वाली बात
दूल्हे के पिता ने कहा- दहेज प्रथा गरीब परिवारों के लिए अभिशाप है और हम जैसे पढ़े लिखे और संपन्न लोग भी इसे बढ़ावा देते हैं। लेकिन इसे खत्म करने के लिए प्रभावशाली लोगों को आगे आना चाहिए। अब इस पहल की शुरूआत हम करते हैं। इस दौरान सगाई में मौजूद हर शख्स की आंखों में आंसू आ गए। सब कहने लगे काश सभी इस तरह हो जाएं तो देश में बेटियां दहेज से प्रताड़ित होकर सुसाइड नहीं करेंगी।

