मशहूर उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने केदारनाथ धाम की 1882 की एक दुर्लभ तस्वीर शेयर की है। उन्होंने बताया कि 144 साल पहले जब कोई सड़क, ट्रेन या हेलिकॉप्टर नहीं थे, तब भी भक्तों की आस्था अटूट थी और यात्रा एक तपस्या के समान थी।

रुद्रप्रयाग: केदारनाथ यात्रा 2026 शुरू हो गई है और भक्तों का उत्साह देखने लायक है। हिमालय की गोद में बसे भगवान शिव के इस पवित्र धाम के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। केदारनाथ मंदिर सनातन धर्म के सबसे पुराने और अहम तीर्थस्थलों में से एक है। इसी बीच, जाने-माने उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने केदारनाथ धाम की एक बेहद पुरानी और दुर्लभ तस्वीर शेयर की है, जो अब वायरल हो रही है। यह तस्वीर आज से 144 साल पहले, यानी 1882 में खींची गई थी। आनंद महिंद्रा ने 1882 की इस तस्वीर को शेयर करते हुए सनातन धर्म की विरासत और भक्तों की अटूट आस्था पर अपने विचार रखे। उन्होंने कुछ ऐसी बातें कहीं जो सोचने पर मजबूर करती हैं।

आनंद महिंद्रा ने क्या कहा?

आनंद महिंद्रा ने 'तब और अब' के केदारनाथ धाम की तुलना करते हुए लिखा, "यह पवित्र केदारनाथ धाम की सबसे पुरानी तस्वीरों में से एक है, जो 1882 में ली गई थी।"

उन्होंने आगे लिखा, "मेरी नजरें इस तस्वीर से हट ही नहीं रही हैं। 144 साल पहले वहां न सड़कें थीं, न ट्रेन और न ही हेलिकॉप्टर। बस हिमालय की गोद में भगवान शिव का शांत निवास था, जो भक्तों को अपनी ओर बुला रहा था। उस समय केदारनाथ की यात्रा एक तपस्या थी। यह समय, धीरज और अटूट विश्वास की परीक्षा थी। मंजिल तक पहुंचना सिर्फ एक सफर नहीं, बल्कि तपस्या का फल था।"

महिंद्रा ने आज के समय से तुलना करते हुए कहा, "आज हमारे लिए केदारनाथ पहुंचना आसान हो गया है, जिससे हर किसी को वो दिव्य अनुभव मिल रहा है। लेकिन क्या हमें कुछ चीजों को सहेजकर नहीं रखना चाहिए? जैसे कि धीरे-धीरे और भक्ति भाव से यात्रा करने की कला।"

उन्होंने अपनी बात खत्म करते हुए लिखा, "सफर सिर्फ मंजिल तक पहुंचने का जरिया नहीं है। इस रास्ते पर हम कैसे इंसान बनते हैं, हमारे अंदर का जोश, भक्ति, विश्वास, लगातार कोशिश और मेहनत, यह सब भी उतना ही मायने रखता है।"

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