Microsoft Buyout Plan: 8,500 कर्मचारियों वाली Exit Scheme के लिए कौन है योग्य? जानें शर्तें
Microsoft ने 8,500 कर्मचारियों के लिए Voluntary Buyout/Soft Layoff प्लान शुरू किया। 70-पॉइंट फॉर्मूला, जॉब लेवल और AI लागत कटौती इसके केंद्र में हैं। Meta-Amazon जैसे Tech दिग्गज भी AI निवेश के बीच वर्कफोर्स घटाने की रणनीति अपना रहे हैं।

Microsoft Buyout Plan 2026: Tech दुनिया में छंटनी अब अचानक होने वाली खबर नहीं रही, लेकिन इस बार मामला थोड़ा अलग है। Microsoft ने खुली छंटनी की बजाय एक “Soft Layoff” मॉडल अपनाया है-जहां कर्मचारियों को स्वेच्छा से कंपनी छोड़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। करीब 8,500 से ज्यादा कर्मचारियों को प्रभावित करने वाला यह कदम अब पूरी इंडस्ट्री में चर्चा का विषय बन चुका है।
Voluntary Buyout: ऑफर या दबाव?
Microsoft ने अपने US कर्मचारियों के लिए Voluntary Buyout योजना पेश की है, जिसमें करीब 7% वर्कफोर्स पात्र हो सकती है। कंपनी के अनुसार यह “स्वैच्छिक” है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह लागत कम करने का एक रणनीतिक तरीका है। पिछले कुछ महीनों में कंपनी के शेयरों में गिरावट और AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता खर्च इसकी बड़ी वजह मानी जा रही है। सीधे Layoff के बजाय Buyout मॉडल अपनाकर कंपनी न सिर्फ छवि बचा रही है, बल्कि कानूनी और सामाजिक दबाव भी कम कर रही है।
70-पॉइंट फॉर्मूला: कौन होगा बाहर?
इस योजना का सबसे दिलचस्प और जटिल हिस्सा है “70-पॉइंट फॉर्मूला”। इसमें कर्मचारी की उम्र और कंपनी में बिताए गए सालों को जोड़कर 70 या उससे अधिक स्कोर होना जरूरी है। उदाहरण के लिए, 52 साल की उम्र और 18 साल का अनुभव रखने वाला कर्मचारी इस सीमा को छूता है। लेकिन सिर्फ यही काफी नहीं-जॉब लेवल भी महत्वपूर्ण है। यह स्कीम केवल Senior Director (Level 67) और उससे नीचे के कर्मचारियों पर लागू होती है, जबकि सेल्स रोल वाले कर्मचारी इससे बाहर रखे गए हैं।
पैकेज कितना आकर्षक है?
CEO Satya Nadella के अनुसार, योग्य कर्मचारियों को एक मजबूत सेवरेंस पैकेज मिलेगा। इसमें शामिल हैं:
- सालाना सैलरी के बराबर भुगतान
- 6 महीने का हेल्थकेयर
- स्टॉक वेस्टिंग बेनिफिट
- 60 दिन का नोटिस
उदाहरण के तौर पर, $180,000 सालाना कमाने वाला और 20 साल का अनुभव रखने वाला कर्मचारी लगभग उतनी ही राशि का पैकेज पा सकता है।
AI की दौड़ और बदलती रणनीति
Microsoft का यह कदम अकेला नहीं है। Meta और Amazon जैसी कंपनियाँ भी AI में भारी निवेश के चलते अपने वर्कफोर्स को पुनर्गठित कर रही हैं। AI आधारित ऑटोमेशन ने पारंपरिक भूमिकाओं को चुनौती दी है, जिससे कंपनियाँ कम कर्मचारियों में ज्यादा काम निकालने की रणनीति अपना रही हैं।
Soft Layoff: भविष्य का नया ट्रेंड?
यह Buyout प्रोग्राम दिखाता है कि टेक कंपनियां अब सीधे छंटनी से बचते हुए “नरम” रास्ता चुन रही हैं। इससे कर्मचारियों को विकल्प मिलता है, लेकिन यह भी साफ है कि दबाव अप्रत्यक्ष रूप से बना रहता है। अब बड़ा सवाल यही है-क्या यह Soft Layoff मॉडल भविष्य में छंटनी का नया चेहरा बनेगा? या फिर यह सिर्फ AI के दबाव में लिया गया अस्थायी कदम है?
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