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ईरान के विदेश मंत्री अराघची पहुंचे इस्लामाबाद, ट्रम्प के दूत की भी एंट्री, क्या बैकडोर डील होगी?
Iran Pakistan Meeting: ईरान के विदेश मंत्री अराघची इस्लामाबाद पहुंचे, US-ईरान वार्ता की तैयारी तेज। पाकिस्तान बना मध्यस्थ, कुशनर-विटकॉफ भी पहुंच रहे। सीजफायर, तेल नाकेबंदी, न्यूक्लियर यूरेनियम विवाद और होर्मुज तनाव से मिडिल ईस्ट संकट गहराया।

Abbas Araghchi Visit Islamabad: मध्य पूर्व के बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान अचानक वैश्विक कूटनीति का केंद्र बन गया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का इस्लामाबाद दौरा कई मायनों में बेहद अहम माना जा रहा है। क्या यह दौरा सिर्फ औपचारिक है या इसके पीछे कोई बड़ा कूटनीतिक खेल चल रहा है?
इस्लामाबाद में हाई-प्रोफाइल एंट्री
अराघची शुक्रवार देर शाम पाकिस्तान पहुंचे, जहां उनकी मुलाकात पाकिस्तानी नेतृत्व से होनी है। इससे पहले वे सेना प्रमुख असीम मुनीर और विदेश मंत्री इशाक डार से बातचीत कर चुके हैं। इन बैठकों में मुख्य फोकस अमेरिका-ईरान के बीच जारी सीजफायर को बनाए रखना और आगे की रणनीति तय करना रहा।
Iranian FM Abbas Araghchi has arrived in Pakistan as part of a broader regional tour, Iranian state media says, amid uncertainty over stalled US ceasefire talks.
Pakistan says no meeting with US envoys is planned, while Washington says its negotiators will travel to Islamabad. pic.twitter.com/8cni4oQWpo— Al Jazeera Breaking News (@AJENews) April 24, 2026
पाकिस्तान की मध्यस्थता: पर्दे के पीछे क्या चल रहा है?
पाकिस्तान खुद को इस पूरे विवाद में “मध्यस्थ” के रूप में पेश कर रहा है। हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि ईरान ने साफ किया है कि इस दौरे के दौरान अमेरिका के साथ कोई सीधी बातचीत तय नहीं है। दूसरी तरफ, व्हाइट हाउस का दावा है कि अमेरिकी दूत अराघची से मिलेंगे। यही विरोधाभास इस कूटनीतिक खेल को और रहस्यमय बना देता है।
अमेरिका की सख्ती और छिपी रणनीति
अमेरिका ने ईरान और रूस के तेल पर किसी भी तरह की छूट बढ़ाने से इनकार कर दिया है। ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट के मुताबिक, “नाकेबंदी पूरी तरह लागू है और कोई तेल बाहर नहीं जा रहा।” यह बयान साफ करता है कि वॉशिंगटन आर्थिक दबाव के जरिए तेहरान को झुकाने की रणनीति पर काम कर रहा है।
होर्मुज़ से न्यूक्लियर डस्ट तक: बढ़ता जोखिम
ईरान द्वारा होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों से टोल वसूली और अमेरिका की “न्यूक्लियर डस्ट” यानी 60% समृद्ध यूरेनियम स्टॉक को हटाने की योजना ने हालात को और जटिल बना दिया है। करीब 440 किलोग्राम संवेदनशील यूरेनियम को कब्जे में लेने की कोशिश सैन्य और तकनीकी दोनों लिहाज से बेहद जोखिम भरी मानी जा रही है।
24 घंटे में बदलते समीकरण
पिछले 24 घंटों में कई बड़े घटनाक्रम सामने आए—इजराइल-लेबनान सीजफायर को तीन हफ्तों के लिए बढ़ाया गया, भारत ने अपने नागरिकों को ईरान यात्रा से बचने की सलाह दी, और कुवैत सीमा पर ड्रोन हमले ने क्षेत्रीय सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए।
आगे क्या संकेत मिलते हैं?
ईरान ने बातचीत के लिए “शर्तों के साथ” तैयार होने के संकेत दिए हैं, जबकि अमेरिका दबाव की नीति से पीछे हटने को तैयार नहीं दिखता। ऐसे में इस्लामाबाद की ये बैठकें आने वाले दिनों में वैश्विक राजनीति की दिशा तय कर सकती हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है-क्या यह कूटनीतिक कोशिशें शांति की ओर बढ़ेंगी या एक बड़े टकराव की भूमिका लिखी जा रही है?
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