Iran Strait of Hormuz attack: ईरान ने होर्मुज में अमेरिका-इजराइल से जुड़े जहाजों पर कब्जा कर लिया। 48 घंटे में जवाबी कार्रवाई से बढ़ा तनाव। वैश्विक तेल सप्लाई और समुद्री व्यापार पर खतरा, हालात बिगड़ने की आशंका।

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव ने अब समुद्री मार्गों को भी अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की हालिया कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। 48 घंटे पहले अपने जहाज पर हुए हमले के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कई जहाजों को कब्जे में लेने का दावा किया है।

क्या हुआ होर्मुज में?

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और इजराइल से जुड़े दो जहाजों को अपने नियंत्रण में लेने की पुष्टि की है। इन जहाजों पर क्रमशः लाइबेरिया और पनामा का झंडा लगा था। ईरान का दावा है कि इन जहाजों ने समुद्री नियमों का उल्लंघन किया, जिसके चलते यह कार्रवाई की गई। यह कार्रवाई उस घटना के 48 घंटे बाद हुई है, जब रविवार को ईरान के एक जहाज पर अमेरिकी सेना ने हमला किया था। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उस जहाज में चीन से मिसाइल निर्माण से जुड़ा सामान लदा था, जिसे बाद में अमेरिकी बलों ने जब्त कर लिया।

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कैसे किया गया ऑपरेशन?

मरीन ट्रैफिक के आंकड़ों के अनुसार, ईरानी बलों ने ओमान के पास नावों के जरिए जहाजों को घेर लिया। पहले फायरिंग की गई और फिर जहाजों को अपने नियंत्रण में ले लिया गया। कब्जे में लिए गए जहाजों में MSC- Francesca और Epaminodes शामिल हैं। इसके अलावा एक ग्रीक जहाज पर भी कार्रवाई की खबर है, हालांकि उसकी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

ईरान का 12 प्वॉइंट प्लान

ईरान ने संसद में होर्मुज को लेकर 12 बिंदुओं वाला एक प्रस्ताव भी पेश किया है। इस योजना के तहत इजराइल और उसके सहयोगी देशों के जहाजों को इस मार्ग से गुजरने से रोकने की बात कही गई है। इसके अलावा, नियमों का उल्लंघन करने वाले जहाजों को जब्त कर उनके माल पर 20 प्रतिशत तक जुर्माना लगाने का प्रस्ताव भी शामिल है। ईरान ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से ईरानी रियाल में टोल वसूलने की बात भी कही है।

वैश्विक असर की आशंका

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा संभालता है। ऐसे में यहां बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा सप्लाई, तेल की कीमतों और समुद्री व्यापार पर व्यापक असर डाल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति और बिगड़ती है, तो इसका असर एयरलाइंस, शिपिंग कंपनियों और आम उपभोक्ताओं तक देखने को मिल सकता है।

ईरान की इस कार्रवाई ने पहले से ही संवेदनशील मध्य-पूर्व क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है। अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस पर है कि आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाते हैं और क्या यह टकराव किसी बड़े संकट का रूप ले सकता है।

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