INS Anjadip Commissioned: इंडियन नेवी का ‘डॉल्फिन हंटर’ जो दुश्मन सबमरीन का खत्म करेगा खेल?
Breaking News: क्या कम गहरे समुद्र में छिपी दुश्मन पनडुब्बियों का खेल अब खत्म? इंडियन नेवी ने INS अंजादीप ‘डॉल्फिन हंटर’ को तैनात कर शैलो वॉटर एंटी-सबमरीन वॉरफेयर में नई ताकत जोड़ दी है। क्या IOR में बदलने वाला है अंडर-सी गेम?

Anti Submarine Warfare INS Anjadip: इंडियन नेवी ने अपने बेड़े में एक और ताकत जोड़ ली है। चेन्नई पोर्ट पर INS अंजादीप को आधिकारिक तौर पर कमीशन कर दिया गया। यह एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) प्रोग्राम के तहत शामिल तीसरा वेसल है। इसे खास तौर पर कम गहरे समुद्र में दुश्मन पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए बनाया गया है। कमीशनिंग समारोह की अध्यक्षता नेवल स्टाफ के चीफ दिनेश के त्रिपाठी ने की। उन्होंने इसे भारत की स्वदेशी समुद्री ताकत के लिए बड़ा मील का पत्थर बताया।
कम गहरे पानी में पनडुब्बी पकड़ना इतना मुश्किल क्यों?
गहरे समुद्र में भी सबमरीन का पता लगाना आसान नहीं होता, लेकिन कम गहरे और भीड़भाड़ वाले तटीय इलाकों में यह और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
- थर्मल लेयर आवाज़ को तोड़ देती हैं।
- सोनार की क्लैरिटी कम हो जाती है।
- सिविल और मिलिट्री ट्रैफिक मिक्स हो जाता है।
- रिएक्शन टाइम बहुत कम होता है।
यही वजह है कि ASW-SWC क्लास को अनौपचारिक रूप से “डॉल्फिन हंटर” कहा जाता है।
INS अंजादीप में क्या है खास?
Garden Reach Shipbuilders & Engineers द्वारा बनाया गया यह 77 मीटर लंबा वॉरशिप पूरी तरह तटीय ऑपरेशन के लिए डिजाइन किया गया है।
इसकी मुख्य खूबियां:
- देसी हल-माउंटेड सोनार (कम गहरे पानी के लिए ऑप्टिमाइज़)।
- हल्के टॉरपीडो और एंटी-सबमरीन रॉकेट।
- एडवांस्ड कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम।
- लगभग 25 नॉट की स्पीड।
- वॉटर-जेट प्रोपल्शन, जिससे तंग तटीय गलियारों में आसानी से मैनूवर कर सके।
यह सिर्फ युद्ध के लिए ही नहीं, बल्कि तटीय निगरानी, सर्च एंड रेस्क्यू और कम तीव्रता वाले ऑपरेशन में भी काम आ सकता है।
INS अरिदमन और INS अंजादीप में क्या अंतर है?
INS अरिदमन भारत की तीसरी न्यूक्लियर-पावर्ड बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन (SSBN) है। यह 3,500 किमी रेंज वाली K-4 मिसाइल ले जाने में सक्षम है और भारत की न्यूक्लियर ट्रायड को मजबूत करती है।
वहीं INS अंजादीप का रोल अलग है। यह तटीय सुरक्षा और एंटी-सबमरीन ऑपरेशन पर केंद्रित है। यानी एक रणनीतिक परमाणु ताकत है, तो दूसरा टैक्टिकल कोस्टल डिफेंस प्लेटफॉर्म।
INS माहे और INS अंजादीप में तुलना कैसे?
INS माहे भी एंटी-सबमरीन रोल निभाता है और 80% से ज्यादा स्वदेशी कंटेंट के साथ बनाया गया है। लेकिन INS अंजादीप खास तौर पर कम गहरे समुद्र के लिए डिजाइन किया गया है, जहाँ डिटेक्शन मार्जिन बेहद कम होता है। दोनों जहाज भारत की समुद्री सुरक्षा को अलग-अलग स्तर पर मजबूत करते हैं।
हिंद महासागर में क्यों बढ़ रही है अंडर-सी एक्टिविटी?
इंडियन ओशन रीजन से दुनिया के दो-तिहाई तेल शिपमेंट और लगभग आधा कंटेनर ट्रैफिक गुजरता है। ऐसे में अगर समुद्र के नीचे कोई भी खतरा बढ़ता है, तो उसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। पनडुब्बियां चुपचाप ऑपरेट करती हैं, इसलिए उनका पता लगाना और भी जरूरी हो जाता है-खासकर पोर्ट, चोक पॉइंट और नेवल बेस के आसपास।
क्या ‘डॉल्फिन हंटर’ से बदलेगा कोस्टल डिफेंस गेम?
INS अंजादीप सिर्फ एक नया जहाज नहीं है, बल्कि यह एक खास रणनीतिक गैप को भरता है। कम गहरे पानी में जहां गलती की गुंजाइश कम होती है, वहां यह तेजी से प्रतिक्रिया दे सकता है। आत्मनिर्भर भारत के तहत बने ऐसे प्लेटफॉर्म भारत को हिंद महासागर क्षेत्र में मजबूत समुद्री ताकत बनाने की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं। कम गहरे समुद्र में जहां डिटेक्शन मुश्किल है, वहीं से असली चुनौती शुरू होती है और वहीं पर ‘डॉल्फिन हंटर’ तैनात है।
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