High Court Verdict: क्या एक पिता इतना बेरहम हो सकता है कि दहेज के लिए अपनी 18 हफ्ते की गर्भवती पत्नी की जान ले ले? हावड़ा केस में फावड़े से हमला, फिर नायलॉन रस्सी से गला घोंटकर हत्या! चौंकाने वाली बात-10 साल के बेटे की गवाही ने खोला पूरा राज़, कोर्ट ने कहा: “दो जानें ली गईं!” क्या यही सच है या और भी रहस्य बाकी? 

Howrah Murder Case: पश्चिम बंगाल के हावड़ा का यह खौफनाक मामला एक बार फिर सुर्खियों में है, जहां एक पति ने अपनी ही गर्भवती पत्नी की बेरहमी से हत्या कर दी। मामला साल 2014 का है, लेकिन हाल ही में कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले ने इसे फिर चर्चा में ला दिया। कोर्ट ने आरोपी की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए उसे “बेरहम कातिल” बताया। इस पूरे अपराध का सबसे बड़ा गवाह उसका 10 साल का बेटा बना। क्या वाकई एक बच्चे की गवाही ने इस केस का रुख बदल दिया?

आखिर उस रात घर के अंदर क्या हुआ था?

रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी ने अपनी 18 हफ्ते की गर्भवती पत्नी पर पहले फावड़े से कई बार हमला किया। जब वह इससे भी नहीं रुका, तो उसने नायलॉन की रस्सी से उसका गला घोंट दिया। यह पूरी घटना करीब 20 से 30 मिनट तक चली, जिससे साफ है कि यह कोई अचानक गुस्से में किया गया अपराध नहीं था, बल्कि एक सोची-समझी साजिश लगती है।

10 साल के बेटे की गवाही क्यों बनी सबसे बड़ा सबूत?

इस केस का सबसे चौंकाने वाला पहलू था आरोपी के 10 साल के बेटे की गवाही। बच्चे ने अपनी आंखों से पूरी घटना देखी थी। उसने कोर्ट में साफ बताया कि उसके पिता ने पहले उसकी मां पर हमला किया और फिर रस्सी से गला घोंटा। कोर्ट ने माना कि बच्चे के पास अपने पिता के खिलाफ झूठ बोलने का कोई कारण नहीं था। उसकी गवाही शुरू से अंत तक एक जैसी रही, जिससे उसकी बात पर भरोसा किया गया।

क्या दहेज बना इस हत्या की असली वजह?

जांच में सामने आया कि आरोपी अपनी पत्नी को मायके से पैसे लाने के लिए दबाव डालता था। जब उसकी मांग पूरी नहीं हुई, तो घरेलू हिंसा बढ़ती गई और आखिरकार यह खौफनाक हत्या में बदल गई। परिवार के अनुसार, महिला को लगातार परेशान किया जाता था, जो इस केस को और गंभीर बना देता है।

कोर्ट ने आरोपी को “बेरहम कातिल” क्यों कहा?

कलकत्ता हाई कोर्ट की बेंच ने साफ कहा कि आरोपी को यह पता था कि उसकी पत्नी गर्भवती है। इसके बावजूद उसने इतनी क्रूरता दिखाई, जिससे एक नहीं बल्कि दो जिंदगियां खत्म हो गईं। कोर्ट ने यह भी माना कि हमला लंबे समय तक चला, जिससे यह साबित होता है कि आरोपी ने पूरी सोच-समझकर यह अपराध किया।

क्या बचाव पक्ष के तर्क काम आए?

बचाव पक्ष ने यह साबित करने की कोशिश की कि बच्चे की गवाही सिखाई गई हो सकती है, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। जजों ने कहा कि बच्चे की मौजूदगी, घटनास्थल की जानकारी और लगातार एक जैसा बयान उसकी गवाही को मजबूत बनाता है।