Surya pratap Singh UP College murder: वाराणसी के यूपी कॉलेज में मारे गए छात्र सूर्य प्रताप सिंह की कहानी बेहद दर्दनाक है। पिता स्कूल में ड्राइवर और मां दाई हैं। इकलौते बेटे की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पढ़ाई कर परिवार का सहारा बनने वाला बेटा अब सिर्फ यादों में रह गया।
UP College Varanasi Student Murder Story: वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज (यूपी कॉलेज) में दिनदहाड़े हुई गोलीबारी में बीएससी छात्र सूर्य प्रताप सिंह की मौत ने न सिर्फ पूरे कॉलेज को हिला दिया, बल्कि उसके छोटे से परिवार की दुनिया भी उजाड़ दी। जिस बेटे को मां-बाप पढ़ाकर बड़ा सपना देख रहे थे, वही बेटा अचानक एक दिन कॉलेज से अस्पताल पहुंचा और फिर घर कभी वापस नहीं लौटा।
बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में जब मां किरन सिंह अपने बेटे की मौत की खबर सुनकर पहुंचीं, तो उनका रो-रोकर बुरा हाल हो गया। वहां मौजूद लोग बताते हैं कि मां की चीख सुनकर हर किसी की आंखें भर आईं।
घर में पवन था, अब सिर्फ यादें बचीं
सूर्य प्रताप सिंह को घर में प्यार से “पवन” कहकर बुलाया जाता था। वह अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। परिवार में उसकी दो बहनें हैं, जिनमें से एक की शादी हो चुकी है। सबसे बड़ा होने की वजह से घर की जिम्मेदारियों और उम्मीदों का बड़ा हिस्सा उसी पर था। माता-पिता को भरोसा था कि पढ़ाई पूरी कर वह परिवार की जिंदगी बदल देगा। लेकिन एक पल में सब कुछ खत्म हो गया।
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पिता ड्राइवर, मां स्कूल में दाई
सूर्य प्रताप का परिवार बहुत साधारण है।
- पिता ऋषिदेव सिंह वाराणसी के संत अतुलनानंद स्कूल में वाहन चालक का काम करते हैं।
- मां किरन सिंह उसी स्कूल में दाई के रूप में काम करती हैं।
दोनों पति-पत्नी मेहनत करके अपने बच्चों को पढ़ा रहे थे। उनका सपना था कि उनका बेटा पढ़-लिखकर अच्छी नौकरी करे और परिवार की हालत सुधारे।
बेटे की मौत के समय शहर में भी नहीं थे पिता
सबसे दर्दनाक बात यह रही कि जिस समय यह घटना हुई, उस समय सूर्य प्रताप के पिता लखनऊ किसी काम से गए हुए थे। जब उन्हें बेटे की मौत की खबर मिली, तो जैसे उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। परिवार के लोग बताते हैं कि पिता को अभी तक विश्वास ही नहीं हो रहा कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं है।
गांव छोड़ शहर में किराये के घर में रह रहा था परिवार
सूर्य प्रताप का परिवार मूल रूप से गाजीपुर जिले के रामपुर माझा थाना क्षेत्र के दुबैथा गांव का रहने वाला है। लेकिन बेहतर पढ़ाई और काम की वजह से परिवार पिछले करीब छह साल से वाराणसी के गिलट बाजार इलाके में किराये के मकान में रह रहा था। गांव का घर लगभग खाली पड़ा है, क्योंकि परिवार ने शहर में ही नई जिंदगी बसाने की कोशिश की थी।
ट्रॉमा सेंटर में मां की चीख से गमगीन हुआ माहौल
बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में जब डॉक्टरों ने सूर्य प्रताप को मृत घोषित किया, तो वहां का माहौल बेहद भावुक हो गया। मां किरन सिंह बार-बार रोते हुए कह रही थीं कि उनका बेटा उन्हें छोड़कर कैसे चला गया। कई बार वह बेहोश भी हो गईं। वहां मौजूद छात्रों और पुलिसकर्मियों ने किसी तरह उन्हें संभालने की कोशिश की।
एक बेटे के साथ टूट गए कई सपने
परिवार के लिए सूर्य प्रताप सिर्फ बेटा नहीं था, बल्कि उम्मीदों का सहारा भी था। पिता की छोटी नौकरी और मां की मेहनत के बीच वह पढ़ाई कर रहा था, ताकि आने वाले समय में परिवार को बेहतर जिंदगी दे सके। लेकिन यूपी कॉलेज में हुई इस गोलीबारी ने एक पल में उस परिवार के सारे सपने तोड़ दिए।
सूर्य प्रताप की मौत की खबर जैसे ही उसके गांव और परिचितों तक पहुंची, हर कोई स्तब्ध रह गया। लोगों का कहना है कि वह बेहद शांत और मिलनसार स्वभाव का लड़का था। किसी ने कभी नहीं सोचा था कि उसकी जिंदगी इतनी अचानक और दर्दनाक तरीके से खत्म हो जाएगी। आज उसके घर में सिर्फ एक ही सवाल गूंज रहा है, जिस बेटे के सहारे बुढ़ापा काटने का सपना देखा था, उसके बिना अब जिंदगी कैसे आगे बढ़ेगी।
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