India-New Zealand FTA Signed: भारत और न्यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर मुहर लग गई है। इस डील से 5000 भारतीय युवाओं को नौकरी के अवसर, ‘मेड इन इंडिया’ को टैक्स-फ्री एंट्री और 20 अरब डॉलर तक निवेश की संभावना बढ़ी है।
India NZ Free Trade Agreement: लंबे इंतजार के बाद भारत और न्यूजीलैंड के बीच वह बड़ा व्यापारिक समझौता आखिरकार हो गया, जिसे विशेषज्ञ “दशकों में एक बार” होने वाली डील बता रहे हैं। सोमवार को दोनों देशों ने बहुप्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर आधिकारिक मुहर लगा दी। इस समझौते को केवल व्यापारिक दस्तावेज नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की आर्थिक दिशा तय करने वाला बड़ा कदम माना जा रहा है।
भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के ट्रेड मिनिस्टर टॉड मैक्ले की मौजूदगी में इस ऐतिहासिक करार पर हस्ताक्षर हुए। इसका असर सिर्फ बड़े उद्योगपतियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि युवाओं, किसानों, छोटे व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा।
15 साल पुराने प्रयास को मिली मंजिल
भारत-न्यूजीलैंड FTA की चर्चा नई नहीं है। इसकी शुरुआत साल 2010 में हुई थी, लेकिन 2015 में बातचीत ठहर गई। पिछले वर्ष इसे फिर से सक्रिय किया गया और अब यह भारत के सबसे तेजी से पूरे होने वाले व्यापारिक समझौतों में शामिल हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की आर्थिक रणनीति को मजबूत करने के लिए यह डील बेहद अहम साबित होगी।
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युवाओं के लिए खुलेंगे विदेश में करियर के रास्ते
इस समझौते का सबसे सीधा फायदा भारतीय युवाओं को मिलने वाला है। न्यूजीलैंड एक नया रोजगार वीजा सिस्टम शुरू करेगा, जिसके तहत 5,000 भारतीय पेशेवर तीन साल तक वहां जाकर काम कर सकेंगे। आईटी, शिक्षा, स्वास्थ्य, वित्तीय सेवाएं, कंस्ट्रक्शन और प्रोफेशनल सर्विसेज से जुड़े युवाओं के लिए यह बड़ी खबर है। इसके अलावा आयुष विशेषज्ञ, योग प्रशिक्षक, भारतीय शेफ और संगीत शिक्षक भी अब न्यूजीलैंड में अपने कौशल के जरिए नए अवसर पा सकेंगे। यह उन युवाओं के लिए विशेष अवसर है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करियर बनाना चाहते हैं।
‘मेड इन इंडिया’ को टैक्स-फ्री एंट्री
इस FTA का एक बड़ा लाभ भारतीय निर्यातकों को मिलेगा। टेक्सटाइल, चमड़ा, प्लास्टिक, इंजीनियरिंग और अन्य श्रम-प्रधान सेक्टर्स के उत्पाद अब न्यूजीलैंड के बाजार में बिना अतिरिक्त ड्यूटी के प्रवेश कर सकेंगे। इसका मतलब है कि ‘मेड इन इंडिया’ उत्पाद अधिक प्रतिस्पर्धी होंगे और भारतीय कंपनियों को नया बाजार मिलेगा। यह छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए भी एक बड़ा अवसर माना जा रहा है।
भारत में आएगा बड़ा विदेशी निवेश
अनुमान है कि अगले 15 वर्षों में न्यूजीलैंड से भारत में करीब 20 अरब डॉलर का विदेशी निवेश (FDI) आ सकता है। इससे मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, सप्लाई चेन और नई टेक्नोलॉजी आधारित उद्योगों को गति मिलेगी। न्यूजीलैंड को भी भारत के विशाल उपभोक्ता बाजार तक मजबूत पहुंच मिलेगी, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे।
न्यूजीलैंड के 54% उत्पादों को राहत
समझौते के तहत न्यूजीलैंड के 54 प्रतिशत से अधिक उत्पाद जैसे ऊन, कोयला, लकड़ी के उत्पाद और सी-फूड भारत में बिना अतिरिक्त टैक्स के आ सकेंगे। इससे भारतीय उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प और बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद मिल सकते हैं। हालांकि, सरकार ने इस समझौते में संतुलन बनाए रखने की कोशिश की है।
किसानों के हितों पर नहीं होगा समझौता
विदेशी व्यापार समझौतों में सबसे बड़ी चिंता घरेलू किसानों और छोटे उत्पादकों की सुरक्षा होती है। इस बार भारत सरकार ने डेयरी, चीनी और कुछ संवेदनशील धातु सेक्टर्स को पूरी तरह इस डील से बाहर रखा है। इसका उद्देश्य साफ है, भारतीय किसानों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाना। सेब, कीवी और मनुका शहद जैसे कृषि उत्पादों पर भी कड़े आयात नियम जारी रहेंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
2.4 अरब डॉलर से आगे की तैयारी
फिलहाल भारत और न्यूजीलैंड के बीच करीब 2.4 अरब डॉलर का व्यापार होता है। इस FTA के बाद यह आंकड़ा तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। यह समझौता सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदारी, रोजगार, निवेश और वैश्विक आर्थिक प्रभाव का नया अध्याय है। भारत के लिए यह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी आर्थिक उपस्थिति मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह डील युवाओं के सपनों, उद्योगों के विस्तार और किसानों की सुरक्षा तीनों के बीच संतुलन बनाने वाली एक महत्वपूर्ण नीति साबित हो सकती है।
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