UP के एक पारिवारिक विवाद ने रिश्तों की मर्यादा पर नई बहस छेड़ दी। जानिए मौसा-भांजी संबंध को लेकर उठे सवाल, परिवार की प्रतिक्रिया और विशेषज्ञ क्या कहते हैं ऐसे भावनात्मक मामलों पर।

Mausa Bhanji Controversy: वैसे तो प्यार कभी भी किसी से भी हो सकता है..लेकिन रिश्ते की मर्यादा भी ध्यान में रखनी होती है। लेकिन कई बार ऐसे मामले सामने आते हैं, जो कलयुग की तस्वीर को दिखाते हैं। यूपी के फतेहपुर जिले में फैमिली मुलाकात अचानक बड़े हंगामे में बदल गई। शादिपुर इलाके में एक लड़की अपने मौसी के घर रहने आई थी और मोहब्बत हो गया मौसा से।

मौसा के प्यार में पागल हुई लड़की

जब लड़की की फैमिली तक बात पहुंची तो हंगामा मच गया। फैमिली वाले जब लड़की को लेने आएं तो उसने जाने से इंकार कर दिया। सड़क पर हाई वोल्टेज ड्रामा मच गया। युवती बार-बार कहती रही कि वह यहीं रहना चाहती है। वो अपने मौसा के साथ पत्नी की तरह जीवन बिताना चाहती है। उसने यह भी तर्क दिया कि “सबके दो-दो पत्नी होती हैं” और अपने परिवार के विरोध के बावजूद अपने फैसले पर अड़ी रही। इस बयान ने वहां मौजूद लोगों को हैरान कर दिया।

लड़की ह करीब 18 महीने पहले प्रसव के बाद की मेडिकल स्थिति में मदद के लिए उनके घर आई थी। समय के साथ घर में इस मुद्दे को लेकर तनाव बढ़ने लगा। मौसी की मानें तो इसपर पहले भी घर में हंगामा मच चुका है। हालांकि बात पुलिस तक नहीं पहुंची। घरवाले लड़की को शांत कराने की कोशिश कर रहे हैं।

भावनात्मक जुड़ाव कब बन जाता है आकर्षण?

वैसे तो ऐसे मामले समाज में कम सुनाई देते हैं, लेकिन जब सामने आते हैं तो कई सवाल छोड़ जाते हैं, क्या यह प्यार है? भावनात्मक सहारा? या मानसिक उलझन? कई बार लंबे समय तक साथ रहने, देखभाल करने या किसी मुश्किल दौर में सहारा मिलने से भावनात्मक लगाव (Emotional Attachment in Family) गहरा हो जाता है। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि ऐसी स्थिति में व्यक्ति उस रिश्ते को अलग नजर से देखने लगता है। खासकर जब उम्र कम हो या भावनात्मक परिपक्वता पूरी न हो, तो सही-गलत की सीमाएं धुंधली पड़ सकती हैं।

पारिवारिक रिश्तों की मर्यादा क्यों जरूरी है?

भारतीय समाज में रिश्तों की स्पष्ट परिभाषा और मर्यादा तय होती है। मौसी, मामा, चाचा जैसे रिश्ते विश्वास और सुरक्षा के प्रतीक माने जाते हैं। जब इन सीमाओं के भीतर भावनात्मक भ्रम पैदा होता है, तो इससे पूरे परिवार में तनाव और सामाजिक असहजता बढ़ सकती है।

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क्या करें जब परिवार में ऐसा विवाद हो?

शांत मन से लड़की को समझाने की कोशिश करें। काउंसलिंग की जरूरत हो तो वो भी करें। इमोशनल सपोर्ट बच्ची को दें। कई बार व्यक्ति अकेलापन और असुरक्षा महसूस कर रहा होता है, इसलिए उसके कदम ऐसे उठते हैं। प्यार से बातें करें और समझाएं कि क्या सही है और क्या गलत।

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