Online Scam Red Flags: आजकल कई फर्जी वेबसाइट और ऐप्स आपकी कमाई में सेंध लगा रहे हैं। सिर्फ एक क्लिक से पूरा का पूरा बैंक अकाउंट तक खाली हो जा रहा है। ऐसे में इनकी पहचान करना बेहद जरूरी है। जानिए फेक वेबसाइट्स की पहचान कैसे करें...

Real vs Fake Websites: इंटरनेट पर धोखाधड़ी लगातार बढ़ती जा रही है। साइबर क्रिमिनल ऐसे प्लेटफॉर्म बनाते हैं, जो देखने में असली दिखाई देते हैं, ताकि यूजर्स से पर्सनल जानकारी, बैंक डिटेल्स या पासवर्ड चुराए जा सकें। सिर्फ एक गलती से क्लिक भी आपकी पहचान, पैसे और सेफ्टी पर भारी पड़ सकता है। इसलिए, फेक वेबसाइट और ऐप्स को पहचानना और ऑनलाइन सेफ रहना बेहद जरूरी है। यहां जानिए आसान और असरदार तरीके, जो आपको साइबर फ्रॉड से बचा सकते हैं।

फेक वेबसाइट कैसे पहचानें?

URL और डिज़ाइन पर ध्यान दें

अक्सर फेक वेबसाइट्स ऐसे URL बनाती हैं, जो थोड़े बदलाव के साथ असली कंपनी की तरह लगते हैं। जैसे 'flipkartoffers.in' या 'amaz0n-sale.co.in'. ये यूजर्स को कंफ्यूज्ड कर फाइनेंशियल या पर्सनल जानकारी हासिल करने के लिए डिजाइन की जाती हैं।

स्पेलिंग और लैंग्वेज की गलतियां

असली ब्रांड अपने कंटेंट और डिजाइन पर ध्यान देते हैं। अगर वेबसाइट पर कई स्पेलिंग मिस्टेक्स, गलत ग्रामर या कम क्वॉलिटी वाले ग्राफिक्स हैं, तो यह अक्सर फेक वेबसाइट की पहचान है।

सिक्योर कनेक्शन नहीं होते हैं

अगर वेबसाइट का URL 'https://' से शुरू नहीं होता और ब्राउजर कोई सुरक्षा चेतावनी नहीं दिखा रहा, तो यह जोखिम भरा हो सकता है। SSL सर्टिफिकेट की कमी से आपका डेटा आसानी से चोरी हो सकता है।

बेहद कीमतें और ऑफर

अगर किसी वेबसाइट पर प्रीमियम ब्रांड्स या इलेक्ट्रॉनिक्स बेहद सस्ते दाम पर मिल रेह हैं, तो ये फेक ऑफर हो सकता है.

टाइमर और अलर्ट से झूठी जल्दबाज़ी

'जल्दी करें, सिर्फ एक आइटम बचा है' जैसे मैसेज या बार-बार रीसेट होने वाले काउंटडाउन टाइमर यूजर्स को बिना चेक फैसले लेने के लिए मजबूर करते हैं।

कॉमर्शियल जानकारी की कमी

वैरिफाई कंपनी एड्रेस, कस्टमर केयर नंबर या ईमेल न होने भी क बड़ा रेड फ्लैग है। फ्री ईमेल जैसे Gmail या Yahoo का यूज करना अक्सर धोखाधड़ी का संकेत होता है।

फेक ऐप्स कैसे पहचानें?

  • गूगल प्ले स्टोर से कोई भी ऐप इंस्टॉल करने से पहले उसकी परमिशन्स देखें। अगर ऐप के लिए बहुत ज्यादा या गलत परमिशन्स मांगी जा रही हैं, तो इसे इंस्टॉल करने से बचें।
  • सिर्फ पॉजिटिव रिव्यूज पर भरोसा न करें। असली यूजर्स के कमेंट्स देखें, जो धोखाधड़ी या समस्याओं की जानकारी देते हैं।
  • ज्यादा डाउनलोड होने वाला ऐप हमेशा सेफ नहीं होता है। अगर लाखों डाउनलोड के बावजूद रिव्यूज कम हैं, तो यह अलर्ट हो सकता है।
  • नए ऐप्स पर जल्दी भरोसा न करें। कुछ हार्मफुल ऐप्स कई हफ्तों तक बिना किसी रिपोर्ट के एक्टिव रहते हैं।
  • अपने एंड्रॉयड फोन पर गूगल प्ले प्रोटेक्ट (Google Play Protect) ऑन रखें। यह फीचर ऐप इंस्टॉल करने से पहले चेक करता है और डिवाइस पर रेगुलर सेफ्टी जांच करता है।

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