उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के 9 वर्षों में श्रमिकों के लिए कई योजनाएं लागू हुईं। ई-श्रम पोर्टल, रोजगार मिशन, सामाजिक सुरक्षा, आवास और शिक्षा योजनाओं से करोड़ों श्रमिकों को लाभ मिला और उनके जीवन स्तर में सुधार हुआ।

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले 9 वर्षों में श्रमिकों के कल्याण, सामाजिक सुरक्षा और रोजगार सृजन के क्षेत्र में व्यापक काम किया है। “श्रमेव जयते” की भावना को आधार बनाकर सरकार ने संगठित और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, निर्माण मजदूरों, स्वरोजगार से जुड़े लोगों और उनके परिवारों के लिए कई योजनाएं लागू की हैं। इन योजनाओं से श्रमिकों को आर्थिक और सामाजिक मजबूती मिली है।

ई-श्रम पोर्टल: यूपी देश में नंबर 1

श्रमिकों के सशक्तीकरण की दिशा में सबसे बड़ी उपलब्धि ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण में उत्तर प्रदेश का देश में पहले स्थान पर पहुंचना है। अब तक 8.42 करोड़ से अधिक असंगठित श्रमिक इस पोर्टल पर रजिस्टर्ड हो चुके हैं। यह पोर्टल श्रमिकों की पहचान सुनिश्चित करता है और उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ने में मदद करता है। इसके साथ ही 9.52 करोड़ से अधिक श्रमिकों के जनधन खाते खोले गए हैं, जिससे उन्हें सीधे आर्थिक सहायता मिलना आसान हुआ है।

रोजगार सृजन: यूपी रोजगार मिशन और जॉब मेले

रोजगार बढ़ाने के लिए सरकार ने “उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन” की शुरुआत की है। इसके तहत युवाओं को देश और विदेश में नौकरी दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। अब तक 5,978 से अधिक निर्माण श्रमिकों को विदेश (इज़राइल) में रोजगार मिला है। सेवामित्र पोर्टल पर 59,602 कुशल श्रमिकों का पंजीकरण किया गया है। इसके अलावा 13,148 रोजगार मेलों के जरिए 15.96 लाख से ज्यादा युवाओं को नौकरी मिली है। वहीं 28,621 करियर काउंसलिंग कार्यक्रमों से 32 लाख से अधिक युवाओं को मार्गदर्शन दिया गया है।

श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाएं

सरकार ने श्रमिकों को सुरक्षा देने के लिए कई योजनाएं लागू की हैं। पंजीकृत श्रमिक की दुर्घटना में मृत्यु होने पर ₹5 लाख और सामान्य मृत्यु पर ₹2 लाख की सहायता दी जाती है। अपंजीकृत श्रमिकों के लिए भी दुर्घटना में मृत्यु या पूर्ण विकलांगता पर ₹2 लाख और आंशिक विकलांगता पर ₹1 लाख की सहायता दी जाती है। इसके अलावा कार्यस्थल पर मृत्यु होने पर ₹5 लाख और अंतिम संस्कार के लिए ₹25,000 की मदद का प्रावधान है।

परिवार के लिए योजनाएं: शादी, मातृत्व और शिक्षा

श्रमिकों के परिवार के कल्याण के लिए भी कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। पंजीकृत श्रमिक की बेटियों की शादी के लिए ₹55,000 तक की सहायता और अंतरजातीय विवाह पर ₹61,000 दिए जाते हैं। मातृत्व, शिशु और बालिका सहायता योजना के तहत 6 लाख से अधिक लाभार्थियों को सहायता मिली है।

बाल श्रमिक विद्या योजना के तहत बच्चों को हर महीने ₹1,000 (बालक) और ₹1,200 (बालिका) दिए जा रहे हैं। साथ ही 18 मंडलों में अटल आवासीय विद्यालय खोले गए हैं, जहां बच्चों को मुफ्त और बेहतर शिक्षा मिल रही है। डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम श्रमिक तकनीकी शिक्षा सहायता योजना के जरिए तकनीकी शिक्षा को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

आवास, पेंशन और जीवन स्तर में सुधार

श्रमिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए आवास योजनाएं भी चलाई जा रही हैं। सफाई कर्मियों को मुफ्त आवास देने की प्रक्रिया जारी है, जबकि निर्माण श्रमिकों को आवास के लिए ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।

श्रम अड्डों का निर्माण भी तेजी से हो रहा है। प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना के तहत 7,04,865 श्रमिक जुड़ चुके हैं, जबकि प्रधानमंत्री लघु व्यापारी मानधन योजना में 16,457 लोगों का पंजीकरण हुआ है। अटल पेंशन योजना से 93 लाख से अधिक लोग लाभान्वित हुए हैं। इसके अलावा 7 करोड़ से ज्यादा श्रमिकों को राशन कार्ड और फैमिली आईडी दी गई है।

श्रमिक सशक्तीकरण से मजबूत हो रहा यूपी

योगी सरकार के 9 वर्षों में उठाए गए इन कदमों ने श्रमिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाया है। उन्हें आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा मिली है और रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं। ये प्रयास न सिर्फ श्रमिकों को सशक्त बना रहे हैं, बल्कि उत्तर प्रदेश के समग्र विकास को भी गति दे रहे हैं।