भोपाल में नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में महिलाओं के सशक्तिकरण और 33% आरक्षण पर चर्चा हुई। नेताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को अधिक अवसर मिलेंगे और लोकतंत्र मजबूत होगा।
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 15 अप्रैल का दिन महिलाओं के नाम रहा। राजधानी के रवींद्र भवन में आयोजित ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ में महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर दिया गया। अलग-अलग क्षेत्रों से आई महिलाओं ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश एक नया इतिहास रचने की ओर बढ़ रहा है और नारी शक्ति वंदन अधिनियम से लोकतंत्र और मजबूत होगा।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. मोहन यादव ने की। इस दौरान उन्होंने माध्यमिक शिक्षा मंडल की हायर सेकेंडरी परीक्षा की संयुक्त टॉपर खुशी राय और चांदनी विश्वकर्मा (भोपाल) तथा हाई स्कूल की टॉपर प्रतिभा सिंह सोलंकी (पन्ना) को सम्मानित किया।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की सराहना
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई कठिन कार्यों को पूरा कर देश और मध्यप्रदेश को सशक्त बनाया है। उन्होंने तीन तलाक जैसे मुद्दे पर महिलाओं को न्याय दिलाने का उल्लेख भी किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश रानी दुर्गावती और अहिल्याबाई होल्कर की भूमि है। अहिल्याबाई ने अपने शासन में काशी में बाबा विश्वनाथ धाम का निर्माण कराया और तीर्थ स्थलों पर यात्रियों के लिए सुविधाएं विकसित कीं। इससे यह साबित होता है कि जब शासन में महिलाओं की भागीदारी होती है, तो समाज में बड़े बदलाव आते हैं।

ऐतिहासिक महिला नेताओं का किया स्मरण
मुख्यमंत्री ने सुमित्रा महाजन, विजया राजे सिंधिया और द्रौपदी मुर्मू का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं ने हमेशा देश निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने यह भी कहा कि नगरीय निकायों में महिलाओं को 50% आरक्षण दिया जा रहा है और भविष्य में लोकसभा व विधानसभा में 33% महिला आरक्षण लागू होने से उनकी भागीदारी और बढ़ेगी। इस दौरान उन्होंने सुषमा स्वराज को भी याद किया।
‘एक विचार यात्रा’ है यह सम्मेलन
राज्यमंत्री कृष्णा गौर ने कहा कि यह सम्मेलन सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक विचार यात्रा है। उन्होंने बताया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उद्देश्य महिलाओं को और अधिक सशक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण का सफर लंबा रहा है—यह विधेयक 1996 और 1999 में पारित नहीं हो सका, 2008 में फिर पेश हुआ और 2010 में राज्यसभा में पास हुआ, लेकिन लोकसभा में अटक गया। आखिरकार 2023 में इसे संसद में पेश किया गया।
महिलाओं की भागीदारी अभी भी सीमित
कृष्णा गौर ने कहा कि वर्तमान में लोकसभा में महिलाओं की भागीदारी केवल 14% है। मध्यप्रदेश में भी सिर्फ 27 महिलाएं चुनी गई हैं, जो कुल सीटों का 11% हैं। ऐसे में महिला आरक्षण कानून लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए जरूरी है।
महिलाओं को मिलेगा नेतृत्व का अवसर
महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि इस अधिनियम से महिलाओं को नेतृत्व के नए अवसर मिलेंगे। लोकसभा और विधानसभा में 33% आरक्षण से महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और नीति निर्माण में उनकी भूमिका मजबूत होगी।
भारत की नारी: शक्ति और संस्कार की प्रतीक
शिक्षाविद शोभा पेठणकर ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति का रूप माना जाता है। उन्होंने कहा कि नारी में लक्ष्मी, वाणी, स्मृति, मेधा और बुद्धि जैसे गुण होते हैं। उन्होंने सावित्रीबाई फुले का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा के बिना विकास संभव नहीं है। साथ ही जीजाबाई, रानी अवंतिका बाई और रानी अवक्का जैसी महिलाओं के उदाहरण देकर बताया कि भारतीय नारी ने हर दौर में समाज को दिशा दी है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपनी शक्ति को पहचानकर सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए।


