छत्तीसगढ़ में 31 मार्च 2026 को 25 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया। यह नक्सलवाद के अंत की दिशा में बड़ा कदम है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे लोकतंत्र और विश्वास की जीत बताया।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में 31 मार्च 2026 का दिन वामपंथी उग्रवाद के अंत की दिशा में एक ऐतिहासिक और निर्णायक दिन के रूप में दर्ज हुआ है। दण्डकारण्य क्षेत्र में 'पूना मारगेम-पुनर्वास से पुनर्जीवन' पहल के तहत 25 माओवादी कैडरों (जिनमें 12 महिलाएं शामिल हैं) ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में वापसी की है। यह घटना नक्सलवाद के अंत की दिशा में एक बड़ी और ठोस उपलब्धि मानी जा रही है।
दण्डकारण्य में 'पुनर्वास से पुनर्जीवन' पहल का बड़ा असर
'पूना मारगेम' पहल के माध्यम से सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास और विश्वास बहाली का काम किया है। इसी पहल का परिणाम है कि 25 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण कर लोकतांत्रिक व्यवस्था में लौटने का फैसला किया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले- 'यह लोकतंत्र और जनशक्ति की जीत'
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर कहा कि यह दिन दण्डकारण्य और पूरे छत्तीसगढ़ के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ है। उन्होंने कहा कि वर्षों से चली आ रही हिंसा और भय की विचारधारा ने आज आत्मसमर्पण किया है, जो लोकतंत्र, विश्वास और जनशक्ति की बड़ी जीत है।
₹1.47 करोड़ के इनामी कैडरों ने छोड़ा हिंसा का रास्ता
मुख्यमंत्री ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले इन 25 माओवादी कैडरों पर कुल ₹1.47 करोड़ का इनाम घोषित था। इनका मुख्यधारा में लौटना इस बात का संकेत है कि अब भटके हुए लोग सरकार की पुनर्वास नीति और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भरोसा जता रहे हैं।
सुरक्षा बलों की कार्रवाई से कमजोर हुआ नक्सली नेटवर्क
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुरक्षा बलों की लगातार प्रभावी कार्रवाई और सरकार की रणनीति के कारण माओवादी तंत्र अब कमजोर हो रहा है। इसी क्रम में 93 घातक हथियारों की बरामदगी और ₹14.06 करोड़ की बड़ी जब्ती भी हुई है, जो नक्सल नेटवर्क के कमजोर होने का स्पष्ट संकेत है।
आत्मसमर्पण नहीं, विश्वास की वापसी: विष्णुदेव साय
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि विश्वास की वापसी है। दण्डकारण्य क्षेत्र अब शांति, स्थिरता और सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है, जो प्रदेश के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
31 मार्च 2026: इतिहास में दर्ज होगा यह दिन
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि 31 मार्च 2026 का दिन छत्तीसगढ़ के इतिहास में एक महत्वपूर्ण तिथि के रूप में याद किया जाएगा। यह वह दिन है, जब नक्सलवाद के अंत की दिशा में निर्णायक परिणाम सामने आया और प्रदेश ने एक नए युग की शुरुआत की।


