पाकिस्तान के खिलाफ सुपर-8 मैच में इंग्लैंड के कप्तान हैरी ब्रूक ने अकेले दम पर टीम को जीत दिलाई। टॉप-ऑर्डर ढहने के बाद उन्होंने मुश्किल पिच पर शानदार शतक (100) जड़ा। उनकी इस पारी ने इंग्लैंड को सेमीफाइनल में पहुंचा दिया।
पाकिस्तान के खिलाफ सुपर-8 मैच से पहले इंग्लैंड के हेड कोच ब्रेंडन मैकुलम ने एक बड़ा फैसला लिया. उन्होंने हैरी ब्रूक को नंबर तीन पर बैटिंग के लिए भेजने का मन बनाया. ब्रूक इस टूर्नामेंट में अब तक टॉप-3 में नहीं खेले थे. 'बैज़' के इस मास्टरप्लान के पीछे पल्लेकेले की पिच और सलमान अली आगा की स्पिन गेंदबाज़ी थी. क्या पाकिस्तान ने रनों का पहाड़ खड़ा किया था? शायद आंकड़ों में ये टारगेट बड़ा न लगे, लेकिन पल्लेकेले की पिच पर इसका असर कुछ और ही था. ब्रूक को लक्ष्य का पीछा करते हुए एक घंटा 10 मिनट हो चुके थे. तभी उन्होंने शाहीन अफरीदी की एक फुल लेंथ गेंद पर क्रीज़ से हटकर मिड-ऑफ के ऊपर से चौका जड़ दिया.
पाकिस्तान को घुटनों पर लाने वाला कप्तान
कमेंट्री बॉक्स में बैठे इंग्लैंड के पूर्व खिलाड़ी नासिर हुसैन बोल पड़े, 'अ हैरी ब्रूक स्पेशल. पल्लेकेले में इंग्लैंड के कप्तान का शतक और वो अपनी टीम को वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में ले जा रहे हैं.' नासिर के पास ही वसीम अकरम और रमीज़ राजा जैसे पाकिस्तानी दिग्गज मायूस चेहरे के साथ बैठे थे. उस वक्त ब्रूक एक ऐसे सेनापति की तरह लग रहे थे, जिसके सारे सैनिक गिर चुके हों, लेकिन वो अकेला लड़ता रहा. इंग्लैंड के कप्तान ने सचमुच अकेले ही पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया था.
जब 70 फीसदी तक पहुंच गई थी पाकिस्तान के जीतने की संभावना
शाहीन अफरीदी के एक खतरनाक स्पेल ने इंग्लैंड की बैटिंग को झकझोर कर रख दिया था. फिल साल्ट के आउट होते ही ब्रूक को मैच की दूसरी ही गेंद पर क्रीज़ पर आना पड़ा. दूसरे छोर पर जोस बटलर थे, जो अपने करियर की सबसे खराब फॉर्म से गुज़र रहे थे. अफरीदी के तीन ओवर खत्म होने तक साल्ट, बटलर और बेथेल, तीनों पवेलियन लौट चुके थे. विन प्रेडिक्टर पर अचानक पाकिस्तान के जीतने की संभावना 70% तक पहुंच गई.
और ये भी याद रखना होगा कि उस्मान तारिक, मोहम्मद नवाज़ और शादाब खान ने तब तक गेंद भी नहीं फेंकी थी. पावरप्ले का आखिरी ओवर करने आए नवाज़. ब्रूक ने तीसरी गेंद को फाइन लेग पर बाउंड्री के पार भेजा, फिर क्रीज़ से बाहर निकलकर कवर के ऊपर से चौका जड़ा. ओवर का अंत लॉन्ग-ऑन के पार एक शानदार छक्के के साथ हुआ. ब्रूक ने इस एक ओवर में 16 रन बटोरे. पावरप्ले खत्म होने पर इंग्लैंड का स्कोर 53 रन था, जिसमें से 20 गेंदों पर 41 रन अकेले ब्रूक के थे.
रनों की रफ्तार पर ब्रेक लगाते हुए उस्मान तारिक ने टॉम बैंटन को उस्मान खान के हाथों कैच करा दिया. टॉप-5 में ब्रूक को छोड़कर बाकी चार बल्लेबाजों ने मिलकर सिर्फ 12 रन बनाए थे. ये मैच अब इंग्लैंड बनाम पाकिस्तान नहीं, बल्कि ब्रूक बनाम पाकिस्तान बन चुका था. पावरप्ले के बाद पाकिस्तानी गेंदबाज़ों ने शिकंजा कसा तो ब्रूक ने भी थोड़ा सब्र दिखाया. लेकिन उनका ये सब्र सिर्फ चार ओवर तक ही चला.
शादाब के 11वें ओवर में ब्रूक ने फिर से गियर बदला. ओवर की पांचवीं गेंद सीधे साइट स्क्रीन के पार 96 मीटर दूर जाकर गिरी. इस ओवर में दो चौके और एक छक्के की मदद से कुल 17 रन आए. पाकिस्तानी स्पिनर्स से निपटने के लिए ब्रूक के पास एक सॉलिड प्लान था. वो क्रीज़ से बाहर निकलकर स्पिनर्स को अपनी लेंथ बदलने पर मजबूर कर रहे थे और स्टंप की लाइन में आने वाली गेंदों पर स्वीप शॉट खेलकर काउंटर-अटैक कर रहे थे.
जिस उस्मान तारिक ने इंग्लैंड के मिडिल और लोअर ऑर्डर को बांधकर रखा था, वो भी ब्रूक को नहीं रोक पाए. ब्रूक ने उस्मान की 11 गेंदों पर 16 रन बनाए. सलमान आगा और बाकी गेंदबाज़ मैदान पर बेबस नज़र आ रहे थे. आखिर में जीत के लिए 24 गेंदों पर 27 रनों की ज़रूरत थी. गेंदबाज़ी पर वो शाहीन अफरीदी थे, जिन्होंने एक ही स्पेल में इंग्लैंड के टॉप ऑर्डर को तहस-नहस कर दिया था.
विल जैक्स ने ओवर की शुरुआत बाउंड्री से की. फिर ब्रूक के बल्ले से कवर के ऊपर से एक ज़ोरदार छक्का निकला. अगली गेंद पर चौका और इसी के साथ सेंचुरी पूरी. हैरी ब्रूक वर्ल्ड कप में शतक लगाने वाले पहले कप्तान बन गए. अगली ही गेंद पर अफरीदी ने ब्रूक का मिडिल स्टंप उखाड़ दिया, लेकिन तब तक मैच पाकिस्तान के हाथ से निकल चुका था. अफरीदी ने विकेट का जश्न नहीं मनाया. उन्होंने आगे बढ़कर ब्रूक को हाथ मिलाकर बधाई दी.
इंग्लैंड की बैटिंग लाइन-अप में सिर्फ तीन बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा छू पाए. और वहां हैरी ब्रूक ने सेंचुरी जड़ दी. जब वो आउट हुए तो इंग्लैंड का स्कोर 155 था, जिसमें से 100 रन अकेले ब्रूक की देन थे. उनकी पारी में 10 चौके और चार छक्के शामिल थे और उनका स्ट्राइक रेट 196 का रहा. ब्रूक ने इस मैच में ओपनर, मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज़ और फिनिशर, हर भूमिका निभाई. यह एक असली 'वन मैन शो' था. और ये पारी पल्लेकेले जैसी मुश्किल पिच पर आई, जो इसे और भी खास बनाती है.
