Women Reservation Act 2026: मोदी सरकार ने ‘महिला आरक्षण अधिनियम-2023’ लागू कर 33% महिला आरक्षण की घोषणा की, लेकिन परिसीमन के बाद 2034 से प्रभावी होगा। लोकसभा में 3 संशोधन बिलों पर बहस जारी है। विपक्ष ने परिसीमन लिंक पर सवाल उठाए, जबकि पक्ष इसे महिला सशक्तिकरण व जनगणना आधारित सुधार बता रहा है।

Nari Shakti Vandan Act 2026: केंद्र की मोदी सरकार ने देर रात अधिसूचना जारी कर 2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण कानून) को औपचारिक रूप से लागू कर दिया है। इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण का प्रावधान है। हालांकि इसका वास्तविक क्रियान्वयन परिसीमन और नई जनगणना के बाद ही संभव होगा, जिससे यह व्यवस्था 2034 के बाद ही प्रभावी होने की संभावना है।

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परिसीमन बनाम आरक्षण: संसद में असली विवाद यहीं से भड़का

लोकसभा में तीन संशोधित विधेयकों पर चर्चा के दौरान सबसे बड़ा विवाद परिसीमन प्रक्रिया को लेकर रहा। सरकार का प्रस्ताव है कि लोकसभा सीटें बढ़ाकर 850 की जाएं और परिसीमन का आधार 2011 की जनगणना को बनाया जाए। विपक्ष का आरोप है कि यह प्रक्रिया राजनीतिक लाभ के लिए डिजाइन की जा रही है और इससे कुछ राज्यों का प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है।

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शशि थरूर का सवाल: “जनसंख्या नियंत्रित करने वालों को नुकसान क्यों?”

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने परिसीमन मॉडल पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण नीति का पालन किया, उन्हें कम प्रतिनिधित्व मिल सकता है, जबकि जिन राज्यों में जनसंख्या तेजी से बढ़ी, उन्हें अतिरिक्त लाभ मिलेगा। उनके अनुसार यह मॉडल “संवैधानिक असंतुलन” पैदा कर सकता है।

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विपक्ष का हमला: ‘राजनीतिक इंजीनियरिंग’ का आरोप

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि सरकार परिसीमन के जरिए अपने राजनीतिक हितों के अनुसार लोकसभा संरचना को बदलना चाहती है। वहीं DMK सांसद कनिमोझी ने इसे राज्यों के अधिकारों पर हमला बताते हुए कहा कि केंद्र राज्यों की भूमिका को कमजोर करने की दिशा में काम कर रहा है।

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सरकार का बचाव: “महिलाओं को न्याय और समान भागीदारी जरूरी”

केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने कहा कि यह कानून महिलाओं को राजनीतिक न्याय देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने विपक्ष पर राजनीतिक विरोध का आरोप लगाते हुए कहा कि संसद और पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी लंबे समय से लंबित सुधार है, जिसे अब लागू किया जा रहा है।

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संसद में दो धड़े: समर्थन और संदेह साथ-साथ चलते रहे

BJP सांसद कंगना रनोट ने इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया, जबकि विपक्षी सांसदों ने प्रक्रिया और समय को लेकर सवाल उठाए। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और हिबी ईडन ने आरोप लगाया कि सरकार कानून को लागू करने में देरी और परिसीमन को जोड़कर “छिपा हुआ एजेंडा” आगे बढ़ा रही है।

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आगे क्या: 4 बजे वोटिंग, लेकिन असली लड़ाई अभी बाकी

लोकसभा में तीनों विधेयकों पर शाम 4 बजे मतदान होना है। लेकिन राजनीतिक संकेत साफ हैं कि असली संघर्ष सिर्फ कानून पर नहीं, बल्कि परिसीमन की दिशा और सत्ता संतुलन पर केंद्रित है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा भारतीय राजनीति में बड़ा टकराव पैदा कर सकता है।