एक वायरल वीडियो में महिला बच्चे को नारियल खोल में पेशाब कराकर सड़क पर फेंक देती है। इस घटना ने नागरिक बोध पर बहस छेड़ दी है, जबकि कुछ लोग इसे किसी को बदनाम करने की साजिश या 'शेमिंग' वीडियो बता रहे हैं।

सोशल डेस्क: आज के डिजिटल ज़माने में, हाथ में स्मार्टफोन हो तो छोटी-छोटी घटनाएं भी पलक झपकते ही दुनिया भर में वायरल हो जाती हैं। लेकिन, कुछ वीडियो ऐसे होते हैं जो हमें यह सोचने पर मजबूर कर देते हैं कि हमारे समाज का नागरिक बोध (Civic Sense) किस दिशा में जा रहा है। फिलहाल, ऐसा ही एक अजीब और चौंकाने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर ज़बरदस्त बहस का मुद्दा बना हुआ है।

आखिर मामला क्या है?

वायरल हो रहे वीडियो में एक महिला नारियल पानी पीने के बाद बचे हुए खोल (Coconut Shell) को 'मोबाइल टॉयलेट' की तरह इस्तेमाल करती है। वह अपने बच्चे को उसी खोल में पेशाब कराती है। इसके बाद, उस खोल को किसी कूड़ेदान में फेंकने के बजाय, वह बड़ी लापरवाही से उसे चलती कार से सड़क पर ही फेंक कर चली जाती है। इस पूरी घटना को किसी ने अपने कैमरे में कैद कर लिया और सोशल मीडिया पर डाल दिया। अब इस वीडियो को देखकर नेटिज़न्स गुस्से में सवाल कर रहे हैं, 'क्या यही है हमारे देश का सिविक सेंस?'

वायरल वीडियो से क्या संदेश जा रहा है?

इस वीडियो को शेयर करने वाले कई लोग सार्वजनिक जगहों पर साफ-सफाई की कमी को लेकर अपनी नाराज़गी जता रहे हैं। लोगों का कहना है कि किसी के घर या दुकान के सामने इस तरह गंदगी फैलाना कितना सही है? क्या इस तरह का बर्ताव समाज में आम होता जा रहा है? कई लोगों ने शिकायत की है कि स्वच्छ भारत जैसे अभियान चलने के बावजूद, लोगों की मानसिकता में कोई बदलाव नहीं आया है और यह घटना इसका जीता-जागता सबूत है।

कहानी में ट्विस्ट: क्या यह किसी को बदनाम करने की साज़िश है?

हालांकि, इस वीडियो पर एक अलग बहस भी छिड़ गई है। कमेंट सेक्शन में कुछ लोग वीडियो बनाने वाले पर ही सवाल उठा रहे हैं। एक यूज़र ने लिखा, 'यह वीडियो गुमराह करने वाला और आधा सच हो सकता है। हो सकता है कि महिला ने जहां खोल फेंका, वहां पहले से ही कूड़े का ढेर हो या कूड़ेदान रखा हो। पूरी जांच किए बिना इस तरह के वीडियो पोस्ट करके एक महिला की इज़्ज़त को उछालना मानहानि के बराबर है।'

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कुछ लोगों ने NCIB (नेशनल क्राइम इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो) जैसी संस्थाओं को टैग करते हुए मांग की है कि ऐसे वीडियो की सच्चाई की जांच होनी चाहिए। अब यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या यह वाकई नागरिक बोध की कमी का मामला है या फिर राह चलते लोगों को बदनाम करने के लिए बनाया गया 'शेमिंग' वीडियो है?

सिविक सेंस और सोशल मीडिया की ज़िम्मेदारी

मामला चाहे जो भी हो, सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता बनाए रखना हर नागरिक का कर्तव्य है। साथ ही, किसी की गलती को सुधारने के बहाने उसका वीडियो बनाकर सार्वजनिक रूप से अपमानित करना कितना सही है, यह चर्चा भी अब ज़ोर पकड़ रही है। कुल मिलाकर, इस एक घटना ने साफ-सफाई और सोशल मीडिया के ज़िम्मेदार इस्तेमाल, दोनों पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।