पश्चिमी एशिया में शांति के लिए अमेरिका-ईरान के शीर्ष अधिकारी इस्लामाबाद में मिल सकते हैं। पाकिस्तान इस अहम बैठक की मध्यस्थता कर रहा है। ट्रंप ने प्रगति का दावा किया है, लेकिन ईरान ने हालिया बातचीत से इनकार किया है।
इस्लामाबाद: पश्चिमी एशिया में हफ्तों से जारी जंग को खत्म करने के लिए पाकिस्तान एक अहम ठिकाना बन सकता है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने इजरायली अधिकारियों के हवाले से खबर दी है कि इस हफ्ते इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के टॉप अधिकारी मुलाकात कर सकते हैं। यह कूटनीतिक हलचल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस ऐलान के बाद तेज हुई है, जिसमें उन्होंने ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर होने वाले हमले को फिलहाल रोकने की बात कही थी।
इस बातचीत के लिए पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र मिलकर पर्दे के पीछे से काम कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वान्स बातचीत में शामिल हो सकते हैं। हालांकि ट्रंप दावा कर रहे हैं कि बातचीत में काफी प्रगति हुई है और कई मुद्दों पर सहमति बन गई है, लेकिन इजरायल इस पूरी तेजी से हैरान है। इजरायल का मानना है कि शांति की कोशिशों के बारे में तो पता था, लेकिन ट्रंप का सहमति बन जाने का दावा उम्मीद से कहीं ज्यादा तेज है।
शहबाज शरीफ ने संभाला मोर्चा
इलाके में शांति बहाली के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेसेश्कियान से फोन पर बात की और हर तरह के समर्थन का वादा किया। रमजान और ईद के दौरान दोनों नेताओं ने कई बार एक-दूसरे से संपर्क किया और जंग खत्म करने की जरूरत पर जोर दिया। खबरें हैं कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने भी ईरान के राष्ट्रपति और ट्रंप से बातचीत की है।
वहीं, व्हाइट हाउस के अधिकारियों और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच हुई बातचीत से भी संकेत मिलते हैं कि डिप्लोमेटिक कोशिशें जारी हैं। ट्रंप ने बातचीत के लिए पांच दिन के सीजफायर का ऐलान करते हुए दावा किया कि ईरान ने बातचीत के लिए उनसे संपर्क किया था। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय ने इसका आधिकारिक तौर पर खंडन किया है। ईरान का कहना है कि पिछले 24 दिनों में अमेरिका से कोई बातचीत नहीं हुई है। अगर इस्लामाबाद में यह मुलाकात होती है, तो यह पश्चिमी एशिया की जंग में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकती है।


