अली लारीजानी ईरान के प्रभावशाली नेता हैं, जो सर्वोच्च सुरक्षा परिषद के सचिव हैं। खामेनेई के करीबी और पूर्व संसद अध्यक्ष लारीजानी ने सैन्य, राजनीतिक और रणनीतिक फैसलों में अहम भूमिका निभाई है।
Who is Ali Larijani: इजराइल-अमेरिका युद्ध के बीच एक बड़ी खबर आ रही है। IDF ने दावा किया है कि उसने ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के चीफ अली लारीजानी को खत्म कर दिया है। हालांकि, अभी ईरान की तरफ से इसकी पुष्टि नहीं की गई है। बता दें कि ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत के बाद लारीजानी को ही वहां का सबसे पावरफुल शख्स माना जा रहा था। लारीजानी ही IRGC की अगुवाई कर रहे थे।
कौन हैं अली लारीजानी?
67 साल के अली आर्देशिर लारीजानी ईरान के सबसे प्रभावशाली धार्मिक और राजनीतिक परिवारों में से एक से आते हैं। पिछले चार दशकों में उन्होंने देश के धार्मिक, सैन्य और खुफिया तंत्र में मजबूत पकड़ बनाई है। अगस्त 2025 में लारीजानी को ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद का सचिव नियुक्त किया गया। यह संस्था रक्षा, परमाणु नीति और क्षेत्रीय रणनीति जैसे अहम मुद्दों पर काम करती है। इस पद के जरिए लारीजानी को सरकार, सेना और मंत्रालयों से जुड़े बड़े फैसलों पर प्रभाव डालने का अधिकार मिलता है। उन्हें राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन का कड़ा विरोधी माना जाता है, जिससे ईरान की राजनीति में उनका अलग ही महत्व है।
एजुकेशन और फैमिली बैकग्राउंड
लारीजानी का जन्म 3 जून 1958 को एक प्रभावशाली शिया मुस्लिम परिवार में हुआ था। उन्होंने उच्च शिक्षा हासिल की और डॉक्टरेट की डिग्री भी प्राप्त की। 2004 में लारीजानी पहली बार ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की टीम में शामिल हुए। उस समय खामेनेई ने उन्हें अपना सलाहकार नियुक्त किया था।
लारीजानी ने IRGC में कमांडर की नौकरी से शुरू किया करियर
लारीजानी ने अपने करियर की शुरुआत इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) में कमांडर की नौकरी से की थी। 1994 में उन्हें इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग का प्रमुख बनाया गया। 2005 में उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली। 2008 से 2020 तक वे संसद के अध्यक्ष रहे। इस लंबे कार्यकाल ने उन्हें ईरान के सबसे अनुभवी नेताओं में शामिल कर दिया।
कट्टरपंथी छवि और चुनावी विवाद
लारीजानी को ईरान के कट्टरपंथी खेमे का नेता माना जाता है। हालांकि, 2024 के चुनाव में उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया था। इसके बावजूद खामेनेई के करीबी होने के कारण उनका राजनीतिक प्रभाव बना रहा। ईरान में जब विरोध प्रदर्शन तेज हुए, तब लारीजानी खुद मैदान में उतर आए। उन्होंने सेना में कई बड़े बदलाव किए, जिनमें अहमद वाहिदी को उप कमांडर बनाना, ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरमिनिया को सेना का प्रवक्ता नियुक्त करना शामिल है।


