पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में हार के बाद ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से इनकार किया है। ऐसे में अब हर तरफ यही सवाल उठ रहा है कि इस्तीफे के बिना आखिर नई सरकार का गठन और मुख्यमंत्री की शपथ कैसे होगी? जानते हैं इसको लेकर क्या कहता है नियम।
West Bengal Assembly Election Results 2026: पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 के नतीजों में ममता बनर्जी की पार्टी को बड़ा झटका लगा है। BJP की प्रचंड जीत के बाद ममता बनर्जी ने चुनाव परिणामों पर नाराजगी जताते हुए अपनी हार के लिए बीजेपी और चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया है। इतना ही नहीं, टीएमसी की मुखिया ने तो ये भी कहा है कि वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी। ममता का कहना है कि उनकी पार्टी नैतिक रूप से चुनाव जीती है और ऐसे में इस्तीफा देने का सवाल ही नहीं उठता।
क्या इस्तीफा नहीं देने से शपथ ग्रहण रुक सकता है?
इस बयान के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है अगर ममता बनर्जी इस्तीफा नहीं देतीं, तो क्या नई सरकार का गठन और मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण रुक सकता है? संविधान में इसको लेकर आखिर क्या है नियम, आइए जानते हैं।
संविधान क्या कहता है: नई सरकार पर कोई असर नहीं
संवैधानिक नियमों के मुताबिक, ममता बनर्जी के इस्तीफा देने या न देने से नई सरकार के गठन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। राज्यपाल नई विधानसभा के गठन के बाद नए मुख्यमंत्री की नियुक्ति कर सकते हैं, चाहे मौजूदा मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दिया हो या नहीं।
विधानसभा का कार्यकाल पूरा होना जरूरी
संविधान के मुताबिक, विधानसभा का कार्यकाल 5 साल का होता है। मौजूदा पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को पूरा हो जाएगा। इसके बाद नई विधानसभा के साथ नई सरकार का गठन स्वतः ही संभव हो जाता है।
विशेषज्ञों की राय: प्रक्रिया में कोई बाधा नहीं
संविधान विशेषज्ञों के मुताबिक, कार्यकाल के बीच मुख्यमंत्री बदलने में संवैधानिक दिक्कत हो सकती है, लेकिन कार्यकाल खत्म होने के बाद नई सरकार बनाने में कोई बाधा नहीं होती। चुनाव आयोग द्वारा जारी जीत का प्रमाण पत्र ही मान्य होता है। हार-जीत का फैसला उसी आधार पर तय हो जाता है।
अनुच्छेद 172 और 164: क्या हैं नियम?
- अनुच्छेद 172: विधानसभा का कार्यकाल 5 साल तय करता है
- अनुच्छेद 164: राज्यपाल को मुख्यमंत्री और मंत्रियों की नियुक्ति का अधिकार देता है
इन प्रावधानों के अनुसार, राज्यपाल नई सरकार बनाने के लिए नए मुख्यमंत्री को नियुक्त कर सकते हैं।
क्या लग सकता है राष्ट्रपति शासन?
अगर संवैधानिक संकट की स्थिति बनती है, तो राज्यपाल अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन की सिफारिश भी कर सकते हैं। हालांकि, यह कदम तभी उठाया जाता है, जब राज्य में संवैधानिक व्यवस्था पूरी तरह से फेल हो जाए।
ममता बनर्जी का बयान और आगे की रणनीति
कोलकाता में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता बनर्जी ने कहा, “मैं इस्तीफा नहीं दूंगी। हम चुनाव हारे नहीं हैं, नैतिक रूप से जीते हैं। हम आगे की रणनीति पार्टी के साथ मिलकर तय करेंगे।” उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वे राजभवन जाकर इस्तीफा देने के पक्ष में नहीं हैं। कुल मिलाकर, ममता बनर्जी के इस्तीफा न देने से नई सरकार के गठन या मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण पर कोई असर नहीं पड़ेगा। संवैधानिक प्रक्रिया के तहत नई विधानसभा के साथ नई सरकार का गठन तय है।


