अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 बहुमत से डोनाल्ड ट्रम्प के ग्लोबल टैरिफ को अवैध घोषित किया। भारत पर 18% रेसिप्रोकल टैरिफ समेत कई आयात शुल्क रद्द हुए। कोर्ट ने कहा कि टैरिफ लगाने का अधिकार सिर्फ कांग्रेस को है।

Trump Tariff Supreme Court Decision: अमेरिका की सर्वोच्च अदालत ने शुक्रवार 20 फरवरी को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए ग्लोबल टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि दूसरे देशों पर लगाए गए कई आयात शुल्क संविधान के अनुरूप नहीं हैं। इस फैसले के बाद भारत पर लगाया गया 18% रेसिप्रोकल टैरिफ भी अब अमान्य हो गया है।

6-3 बहुमत से फैसला: टैरिफ लगाने का अधिकार सिर्फ कांग्रेस को

सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से निर्णय सुनाया। अदालत ने कहा कि अमेरिकी संविधान के अनुसार टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति को नहीं, बल्कि कांग्रेस (अमेरिकी संसद) को है। कोर्ट का यह फैसला ट्रम्प की आर्थिक नीतियों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। सुनवाई से पहले ट्रम्प ने कहा था कि अगर उनका पक्ष हार गया तो देश को भारी नुकसान होगा।

अप्रैल 2025 में लगाए गए थे भारी टैरिफ

अप्रैल 2025 में ट्रम्प ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए कई देशों से आने वाले सामान पर भारी आयात शुल्क लगा दिया था। टैरिफ का मतलब है कि किसी देश से आने वाले सामान पर ज्यादा टैक्स लगाया जाए, ताकि वह महंगा हो जाए और घरेलू कंपनियों को फायदा मिले।

कौन-कौन से टैरिफ रद्द हुए?

कोर्ट के आदेश से ट्रम्प के सभी टैरिफ खत्म नहीं हुए हैं। स्टील और एल्युमिनियम पर लगाए गए शुल्क अलग कानूनों के तहत लगाए गए थे, इसलिए वे अभी भी लागू रहेंगे। हालांकि, दो बड़ी कैटेगरी के टैरिफ पर रोक लगा दी गई है।

1. रेसिप्रोकल टैरिफ

इस श्रेणी में ट्रम्प ने अलग-अलग देशों पर अलग दरें तय की थीं।

चीन पर 34% टैरिफ

बाकी देशों के लिए 10% बेसलाइन टैरिफ

कोर्ट के फैसले के बाद ये सभी रेसिप्रोकल टैरिफ अमान्य हो गए हैं। इसमें भारत पर लगाया गया 18% टैरिफ भी शामिल है।

2. 25% टैरिफ (कनाडा, चीन, मैक्सिको)

ट्रम्प प्रशासन ने कनाडा, चीन और मैक्सिको से आने वाले कुछ सामान पर 25% टैरिफ लगाया था। प्रशासन का कहना था कि इन देशों ने अमेरिका में फेंटेनाइल की तस्करी रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए। सुप्रीम कोर्ट ने इस 25% टैरिफ को भी रद्द कर दिया है।

टैरिफ पर कोर्ट की टिप्पणी: अमेरिका हर देश से युद्ध में नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन को फटकार लगाते हुए कहा कि अमेरिका दुनिया के हर देश के साथ युद्ध की स्थिति में नहीं है। हालांकि, इस फैसले से तीन जजों ने असहमति जताई। जस्टिस सैमुअल एलिटो, क्लेरेंस थॉमस और ब्रेट कैवनॉ ने बहुमत के फैसले का विरोध किया। जस्टिस ब्रेट कैवनॉ ने अपने नोट में लिखा कि टैरिफ नीति समझदारी भरी थी या नहीं, यह अलग मुद्दा है। लेकिन उनके अनुसार यह कानूनी रूप से वैध थी। उन्होंने भारत पर रूसी तेल खरीद को लेकर लगाए गए टैरिफ का भी जिक्र किया और कहा कि ये कदम विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों के तहत उठाए गए थे।

अमेरिकन सुप्रीम कोर्ट की संरचना

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में कुल 9 जज हैं। इनमें से 6 जजों की नियुक्ति रिपब्लिकन राष्ट्रपतियों ने की है, जबकि 3 जजों को डेमोक्रेटिक राष्ट्रपतियों ने नियुक्त किया है। फैसले के खिलाफ वोट देने वाले तीनों जज रिपब्लिकन राष्ट्रपतियों द्वारा नियुक्त किए गए थे।