Trump Iran Ceasefire Decision: अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर बढ़ाने से ट्रंप के इनकार के बाद तनाव बढ़ गया है। पाकिस्तान, चीन और ऑस्ट्रेलिया कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय हैं और शांति वार्ता को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हालात अभी भी नाजुक बने हुए हैं।

US-Iran Peace Talks: मध्य-पूर्व की राजनीति एक बार फिर अस्थिर मोड़ पर खड़ी है। जहां एक ओर अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष विराम खत्म होने की कगार पर है, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति के फैसले ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है, जिसके बाद कई देश सक्रिय भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं।

ट्रंप के फैसले से बढ़ी अनिश्चितता

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी सीजफायर को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया है। इस फैसले ने पहले से ही तनावपूर्ण हालात को और जटिल बना दिया है। सूत्रों के अनुसार, दो सप्ताह का संघर्ष विराम समाप्ति की ओर है और अगली वार्ता को लेकर अब तक कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं।

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पाकिस्तान की कूटनीतिक पहल

इस बीच इशाक डार ने अब्बास अरागची से टेलीफोन पर बातचीत की। इस वार्ता में दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय हालात, संघर्ष विराम और भविष्य की रणनीति पर चर्चा की। पाकिस्तान ने जोर दिया कि अमेरिका और ईरान के बीच संवाद जारी रहना बेहद जरूरी है, ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनी रह सके। दोनों पक्षों ने आपसी संपर्क बनाए रखने और आगे भी बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बागची ने संकेत दिया है कि अभी यह तय नहीं हुआ है कि ईरान अमेरिका के साथ अगली वार्ता में शामिल होगा या नहीं। इस बयान से यह साफ है कि कूटनीतिक प्रक्रिया अभी अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी हलचल

पेनी वोंग ने भी इशाक डार से बातचीत कर इस मुद्दे पर पाकिस्तान की भूमिका की सराहना की। उन्होंने अमेरिका-ईरान वार्ता को आगे बढ़ाने में पाकिस्तान की “रचनात्मक भूमिका” को अहम बताया। यह दर्शाता है कि वैश्विक स्तर पर भी इस संकट को लेकर गंभीरता बढ़ रही है।

चीन बना अहम कूटनीतिक साझेदार

चीन ने भी पाकिस्तान की पहल का समर्थन किया है। चीनी विदेश मंत्रालय के अधिकारी जियांग ज़ैदोंग ने इस्लामाबाद में इशाक डार के साथ बैठक में क्षेत्रीय हालात पर चर्चा की। इस दौरान पाकिस्तान ने चीन के साथ अपनी “सदाबहार” रणनीतिक साझेदारी को दोहराया और संकेत दिया कि वह इस संकट में चीन को एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ के रूप में देख रहा है।

मौजूदा हालात बेहद नाजुक हैं। एक तरफ संघर्ष विराम समाप्त होने का खतरा है, तो दूसरी ओर कई देश बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही वार्ता की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई, तो यह तनाव बड़े संघर्ष में बदल सकता है।

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