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कौनसी हैं ट्रंप की वो 2 शर्तें? जिन्हें मानने के बाद ही ईरान से बातचीत रीस्टार्ट करेगा अमेरिका!
Donald Trump ने US-ईरान बातचीत दोबारा शुरू करने के लिए 2 शर्तें रखीं-Strait of Hormuz खोलना और Islamic Revolutionary Guard Corps की मंज़ूरी, ईरान के अंदरूनी मतभेद से डील पर सस्पेंस बढ़ गया है। क्या इस बार ट्रंप की कूटनीति कामयाब होगी या...?

US Iran Talks Restart: अमेरिका और ईरान के बीच रुकी हुई बातचीत एक बार फिर शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं, लेकिन इस बार हालात पहले से कहीं ज्यादा जटिल और संवेदनशील हो चुके हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने साफ कर दिया है कि बातचीत तभी आगे बढ़ेगी, जब ईरान कुछ सख्त शर्तों को मानने के लिए तैयार होगा। क्या तेहरान इन शर्तों को स्वीकार करेगा या टकराव और गहराएगा?
पहली शर्त: होर्मुज़ का रास्ता पूरी तरह खुला हो
अमेरिका की सबसे अहम मांग है कि रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण Strait of Hormuz को बिना किसी रुकावट के खोला जाए। यह वही समुद्री मार्ग है, जिससे दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल सप्लाई करता है। सूत्रों के मुताबिक, वॉशिंगटन “पारस्परिकता” के सिद्धांत पर अड़ा हुआ है-अगर ईरान जहाजों को रोकेगा, तो उसके अपने जहाजों को भी इसी तरह की बाधाओं का सामना करना पड़ेगा। यह संकेत देता है कि अमेरिका अब किसी भी तरह की एकतरफा छूट देने के मूड में नहीं है।
दूसरी शर्त: ईरानी प्रतिनिधिमंडल को पूर्ण अधिकार
अमेरिका की दूसरी शर्त और भी ज्यादा संवेदनशील है। वॉशिंगटन चाहता है कि बातचीत के लिए आने वाले ईरानी प्रतिनिधियों के पास अंतिम समझौता करने का पूरा अधिकार हो, जिसमें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC)) की मंज़ूरी भी शामिल हो। दरअसल, पिछली बातचीत के दौरान यह सामने आया कि ईरान के राजनीतिक नेतृत्व और IRGC के बीच मतभेद हैं, जिससे निर्णय लेने में बाधा आई। अब अमेरिका इस अनिश्चितता को खत्म करना चाहता है।
ईरान के भीतर दरार? सत्ता संघर्ष की आहट
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और विदेश मंत्री अब्बास अराघची जैसे नेताओं के बीच और IRGC के शक्तिशाली गुट के बीच गहरी खाई उभरती दिख रही है। कहा जा रहा है कि कुछ सैन्य अधिकारियों ने पाकिस्तान में मौजूद प्रतिनिधिमंडल को अमेरिकी सवालों का जवाब देने से भी रोका। यह घटनाक्रम संकेत देता है कि ईरान के भीतर नीति निर्धारण को लेकर संघर्ष तेज हो सकता है।
इस्लामाबाद फिर बनेगा बातचीत का केंद्र?
ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और ईरान की टीमें एक बार फिर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद लौट सकती हैं। हालांकि, अभी तक किसी आधिकारिक तारीख की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन संकेत हैं कि इसी हफ्ते के अंत तक बातचीत फिर शुरू हो सकती है। यह बातचीत बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि पिछली बैठक बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई थी।
क्या बनेगा समझौता या बढ़ेगा संकट?
स्थिति बेहद नाज़ुक है। एक तरफ अमेरिका सख्त शर्तों पर अड़ा है, वहीं दूसरी ओर ईरान के अंदरूनी मतभेद किसी भी समझौते को मुश्किल बना सकते हैं। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या यह नई बातचीत शांति की दिशा में कदम साबित होगी, या फिर यह संकट और गहरा होकर एक बड़े वैश्विक टकराव में बदल जाएगा।
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