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इस्लामाबाद में US-Iran शांति वार्ता फेल…अब आगे क्या? ट्रंप का ‘Plan B’ कितना खतरनाक? 3 उम्मीदें
Islamabad Meeting 2026: क्या US-Iran Talks Fail से Middle East में फिर भड़केगा बड़ा युद्ध? JD Vance के बयान के बाद तनाव बढ़ा-परमाणु मुद्दा और Hormuz बना टकराव की जड़। सीजफायर खतरे में, क्या अब आएगा Plan B या बदलेगा आखिरी वक्त पर खेल?

US Iran Talks Fail: मिडिल ईस्ट की सबसे अहम शांति वार्ता आखिरकार बिना किसी समझौते के खत्म हो गई। पाकिस्तान के इस्लामाबाद में 20+ घंटे चली अमेरिका-ईरान बातचीत से उम्मीद थी कि 40 दिन चले युद्ध के बाद स्थायी शांति का रास्ता निकलेगा। लेकिन नतीजा उल्टा निकला-दोनों देश अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े रहे। अमेरिका ने कहा कि ईरान ने उसकी “रेड लाइन्स” नहीं मानीं, जबकि ईरान का आरोप है कि अमेरिका बहुत ज्यादा और एकतरफा मांगें कर रहा था। इसी टकराव ने पूरी बातचीत को तोड़ दिया।
क्यों फेल हुई US–Iran शांति वार्ता?
इस बातचीत की सबसे बड़ी रुकावट दो मुद्दे बने-
- ईरान का परमाणु कार्यक्रम
- Strait of Hormuz पर नियंत्रण
अमेरिका चाहता था कि ईरान साफ गारंटी दे कि वह कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। वहीं ईरान चाहता है कि उस पर लगे प्रतिबंध हटें और वह अपने संसाधनों पर पूरा नियंत्रण रखे। दोनों की शर्तें एक-दूसरे के लिए स्वीकार करना मुश्किल थीं-यहीं से बातचीत टूट गई।
क्या अमेरिका और ईरान एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं?
हां, दोनों पक्ष एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। अमेरिका का कहना है कि उसने “final best offer” दिया था, लेकिन ईरान ने ठुकरा दिया। ईरान का कहना है कि अमेरिका बातचीत के जरिए अपनी शर्तें थोपना चाहता था। इससे साफ है कि भरोसे की कमी (Trust Deficit) अभी भी बहुत गहरी है।
क्या इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा?
बिल्कुल। यह सिर्फ दो देशों का मामला नहीं है। Strait of Hormuz दुनिया का सबसे बड़ा तेल रूट है। यहां तनाव बढ़ने से Oil Prices बढ़ सकते हैं। Global Economy और महंगाई पर सीधा असर पड़ सकता है। पहले ही इस संघर्ष में हजारों लोगों की जान जा चुकी है और कई देशों का इंफ्रास्ट्रक्चर प्रभावित हुआ है। चूंकि बातचीत नाकाम रही, तो अब आगे ये 3 बातें हो सकती हैं:
1.जारी रह सकती है बातचीत
भले ही वैंस इस्लामाबाद से चले गए हों, लेकिन ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधिमंडलों के बीच बातचीत पाकिस्तान के प्रस्ताव पर एक और दिन के लिए बढ़ा दी गई है। यह जानकारी रविवार सुबह अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम ने दी। समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने बताया कि अमेरिका की "तर्कहीन और अत्यधिक मांगों" और ईरानी प्रतिनिधिमंडल के राष्ट्रीय हितों को सुनिश्चित करने पर अड़े रहने को देखते हुए, पाकिस्तान ने बातचीत का एक और दौर आयोजित करने का प्रस्ताव रखा, जिस पर दोनों पक्ष सहमत हो गए। एक बयान में, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच कई मुद्दों पर सहमति बनी थी, लेकिन 2-3 महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचारों में मतभेद थे, जिसके चलते अंततः कोई समझौता नहीं हो पाया।
2. दोनों पक्ष संघर्ष-विराम समाप्त होने तक इंतज़ार कर सकते हैं
अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह का, सशर्त संघर्ष-विराम 8 अप्रैल को शुरू हुआ था। भले ही बातचीत नाकाम रही हो, लेकिन दोनों पक्ष संघर्ष-विराम समाप्त होने तक 'बैक-चैनल' (अप्रत्यक्ष) बातचीत जारी रख सकते हैं। इस्लामाबाद में हुई चर्चाओं में आर्थिक, सैन्य, कानूनी और परमाणु मुद्दों को शामिल किया गया था, और इस दौरान लिखित प्रस्तावों का आदान-प्रदान भी हुआ। यदि औपचारिक बातचीत पूरी तरह से टूट भी जाती है, तब भी दोनों पक्ष इन मुद्दों पर दोबारा विचार कर सकते हैं। वैंस ने भी 'इंतज़ार करो और देखो' (wait-and-watch) की रणनीति अपनाने का संकेत दिया है। वैंस ने कहा, "हम लगातार टीम के संपर्क में थे, क्योंकि हम सद्भावना के साथ बातचीत कर रहे थे। और हम एक बहुत ही सरल प्रस्ताव के साथ यहां से विदा ले रहे हैं: आपसी समझ का एक ऐसा तरीका, जो हमारी अंतिम और सर्वोत्तम पेशकश है। अब हम देखेंगे कि ईरानी पक्ष इसे स्वीकार करता है या नहीं।"
3. अमेरिका ईरान पर हमला कर सकता है?
एक कम संभावित, लेकिन फिर भी संभव परिदृश्य 'प्लान बी' (Plan B) हो सकता है। विभिन्न रिपोर्टों से संकेत मिले हैं कि अमेरिका ने मध्य-पूर्व में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा दी है, जिससे यह संकेत मिलता है कि कूटनीति के साथ-साथ 'प्रतिरोध' (deterrence) की रणनीति भी समानांतर रूप से चल रही है। ट्रंप ने पहले भी इस बात का संकेत दिया था कि यदि इस्लामाबाद में हुई बातचीत से कोई समझौता नहीं निकल पाता है, तो ईरान पर हमला करने के लिए युद्धपोतों को हथियारों से पुनः लैस किया जा रहा है। "हम एक रीसेट कर रहे हैं। हम जहाज़ों में सबसे बेहतरीन गोला-बारूद, अब तक बने सबसे बेहतरीन हथियार भर रहे हैं-जो हमने पहले इस्तेमाल किए थे, उनसे भी बेहतर और उनसे हमने दुश्मनों को तबाह कर दिया था," बातचीत से पहले ट्रंप के हवाले से 'द पोस्ट' ने यह बात कही। "और अगर हमारी कोई डील नहीं होती है, तो हम इन हथियारों का इस्तेमाल करेंगे, और बहुत असरदार तरीके से करेंगे।"
US-ईरान युद्ध में अब तक कितनी मौतें और कहां-कहां हुईं?
इस युद्ध में ईरान में कम से कम 3,000 लोग, लेबनान में 2,020, इज़राइल में 23, और खाड़ी के अरब देशों में एक दर्जन से अधिक लोग मारे गए हैं; साथ ही, इसने मध्य-पूर्व के आधा दर्जन देशों के बुनियादी ढांचे को स्थायी नुकसान पहुँचाया है। इसके अलावा, स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ पर ईरान की मज़बूत पकड़ ने फ़ारसी खाड़ी और उसके तेल व गैस निर्यात को वैश्विक अर्थव्यवस्था से काफ़ी हद तक अलग-थलग कर दिया है, जिससे ऊर्जा की कीमतें आसमान छूने लगी हैं।
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