UP सरकार ने अयोध्या के पर्यटन और धार्मिक स्थलों के विकास के लिए बजट में 250 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसमें 150 करोड़ तीर्थ क्षेत्र विकास परिषद को मिलेंगे। कम प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों के सौंदर्यीकरण से पर्यटन, रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।

अयोध्या। ताजा बजट में प्रदेश सरकार ने रामनगरी अयोध्या के विकास के लिए एक बार फिर 250 करोड़ रुपये की बड़ी राशि देने की घोषणा की है। इस राशि का मुख्य उद्देश्य पर्यटन सुविधाओं को बेहतर बनाना, बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और धार्मिक स्थलों का विकास करना है। सरकार का मानना है कि इससे अयोध्या की पहचान और भी मजबूत होगी तथा श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

तीर्थ क्षेत्र विकास परिषद को 150 करोड़ रुपये- धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

इस बजट में से 150 करोड़ रुपये श्री अयोध्या जी तीर्थ क्षेत्र विकास परिषद को दिए जाएंगे। यह परिषद अयोध्या और आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार, धार्मिक स्थलों के संरक्षण और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए काम करती है। सरकार का लक्ष्य अयोध्या को एक संगठित और विकसित धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में आगे बढ़ाना है।

कम प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों के विकास की तैयारी- पर्यटन का दायरा होगा बड़ा

राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। इसी को देखते हुए सरकार अब केवल प्रमुख स्थलों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि कम चर्चित लेकिन ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले स्थानों को भी विकसित करने की योजना बना रही है। इससे श्रद्धालु राम जन्मभूमि के अलावा अन्य धार्मिक स्थलों के दर्शन भी कर सकेंगे और पर्यटन का दायरा बढ़ेगा।

इन आठ धार्मिक स्थलों का होगा सौंदर्यीकरण और पर्यटन विकास

सरकार द्वारा जिन प्रमुख स्थलों के विकास की योजना बनाई गई है, उनमें शामिल हैं:

  • बेतिया मंदिर, मीरापुर, डेराबीबी (अयोध्या धाम): लगभग 2 करोड़ रुपये
  • मणिपर्वत: लगभग 3 करोड़ रुपये
  • दशरथ समाधि स्थल के पास भगवान शंकर मंदिर परिसर: लगभग 1 करोड़ रुपये
  • श्री अंजनेश्वर महादेव धाम (तमसा नदी तट, ग्राम अंजना सदर): लगभग 1 करोड़ रुपये
  • श्रीमहर्षि वाल्मीकि आश्रम (आलापुर, मजरा दोस्तपुर): लगभग 1 करोड़ रुपये
  • आंबेडकर पार्क (ग्राम कुढ़ासादात, तहसील रुदौली): लगभग 1 करोड़ रुपये
  • मिल्कीपुर में आस्तीकन गहनाग बाबा स्थल: लगभग 1 करोड़ रुपये
  • नगर पंचायत भदरसा में भरत जी की तपोस्थली: लगभग 2 करोड़ रुपये

इन सभी स्थलों पर पर्यटन विकास, सौंदर्यीकरण और सुविधाओं के विस्तार का प्रस्ताव है।

श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं- परिषद का मुख्य उद्देश्य

प्रदेश सरकार ने श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं देने के लिए श्री अयोध्या जी तीर्थ क्षेत्र विकास परिषद का गठन किया है। परिषद का उद्देश्य धार्मिक स्थलों का संरक्षण, पर्यटन सुविधाओं का विस्तार और आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सुव्यवस्थित व्यवस्थाएं सुनिश्चित करना है।

अयोध्या पर्यटन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बजट अयोध्या के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। धार्मिक पर्यटन बढ़ने से स्थानीय रोजगार, छोटे व्यापार, होटल उद्योग, परिवहन सेवाएं और हस्तशिल्प व्यवसाय को सीधा लाभ मिलेगा। कम प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों को विकसित करने से पर्यटकों का ठहराव समय बढ़ेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

दीर्घकालिक विकास की दिशा में बड़ा कदम

सरकार की योजना केवल सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि बुनियादी ढांचे, पर्यटन सुविधाओं और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने पर भी ध्यान है। यदि योजनाओं का क्रियान्वयन समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से हुआ, तो अयोध्या आस्था के साथ-साथ उत्तर भारत का एक प्रमुख पर्यटन और आर्थिक केंद्र बन सकता है।