लद्दाख को राज्य का दर्जा दिलाने के लिए आंदोलन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को रिहा कर दिया गया है। गृह मंत्रालय ने NSA के तहत उनकी हिरासत खत्म की। उन्हें हिंसक प्रदर्शनों के बाद भड़काऊ भाषण के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

नई दिल्ली: लद्दाख के आंदोलन का चेहरा और जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को रिहा कर दिया गया है। केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने उनकी हिरासत को तुरंत खत्म करने का फैसला लिया है। यह कार्रवाई नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए की गई है। सोनम को लद्दाख को राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर हुए आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किया गया था। उन पर देशद्रोह जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए थे। वांगचुक एक एक्टिविस्ट और शिक्षाविद हैं, जो लद्दाख को राज्य का दर्जा और संवैधानिक सुरक्षा दिलाने की मांग करने वाले सबसे प्रमुख चेहरों में से एक हैं।

लद्दाख में इस आंदोलन का इतिहास क्या है?

जम्मू-कश्मीर से अलग होने के बाद लद्दाख एक केंद्र शासित प्रदेश तो बन गया, लेकिन यहां अपनी कोई चुनी हुई विधानसभा या मुख्यमंत्री नहीं है। लद्दाख के हर जिले में एक ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (स्वायत्त जिला परिषद) तो चुनी जाती है, लेकिन उसके पास कोई खास प्रशासनिक अधिकार नहीं हैं। यही इस पूरे आंदोलन की जड़ है। 2021 से ही लद्दाख के सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक समूहों वाले लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) मिलकर लद्दाख को राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही, उन्होंने दो लोकसभा सीटों और लद्दाख पब्लिक सर्विस कमीशन बनाने की भी मांग रखी। यहीं से इन विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत हुई।

सोनम वांगचुक का लद्दाख आंदोलन में रोल

2021 से शुरू हुए लद्दाख के इस आंदोलन में सोनम हमेशा सबसे आगे रहे। जनवरी 2023 में, जब उन्होंने शून्य से भी कम तापमान में अनशन किया, तो पूरे देश का ध्यान इस मुद्दे पर गया। इसके बाद केंद्र सरकार ने उन्हें बातचीत के लिए बुलाया, लेकिन कई दौर की बातचीत के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकला। फरवरी 2023 में उन्होंने आंदोलन को दिल्ली तक पहुंचाया और आमरण अनशन का ऐलान करके सबको चौंका दिया। सितंबर 2024 में, उन्होंने करीब 1000 लोगों के साथ राजधानी दिल्ली तक एक लॉन्ग मार्च निकाला। अक्टूबर 2024 में दिल्ली पुलिस ने सोनम समेत कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। मार्च 2025 में बातचीत फिर शुरू हुई, लेकिन इस बार भी बेनतीजा रही। इसके बाद सितंबर 2025 में वांगचुक ने 14 अन्य सदस्यों के साथ 35 दिनों की भूख हड़ताल शुरू कर दी। इस बार उन्होंने सरकार के बातचीत के प्रस्ताव को ठुकरा दिया और कहा कि अब सिर्फ निर्णायक बातचीत ही होगी।

24 सितंबर को LAB की यूथ विंग ने लेह में बंद का ऐलान किया। यह बंद हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं, बीजेपी दफ्तर में आग लगा दी गई। पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। पुलिस फायरिंग में 4 लोगों की मौत हो गई और करीब 50 लोग घायल हुए। इसके बाद सोनम वांगचुक ने अपना अनशन खत्म कर शांति की अपील की। बाद के दिनों में लेह और लद्दाख में कर्फ्यू लगा दिया गया और इंटरनेट बंद कर दिया गया। इसके तुरंत बाद लेह पुलिस ने सोनम वांगचुक को 'भड़काऊ भाषण' देने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। उनकी गिरफ्तारी नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत की गई थी।