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ट्रंप क्यों नहीं कर रहे पाकिस्तान-अफगानिस्तान ‘Open War’ में दखल? खुद दे दिया ये बड़ा संकेत!
डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान-अफगानिस्तान संघर्ष में दखल से इनकार किया, जबकि ख्वाजा आसिफ ने 'खुली जंग' का ऐलान किया। काबुल एयरस्ट्राइक और तालिबान हमलों के बीच इलाके में तनाव चरम पर है। क्या US मीडिएशन अब पूरी तरह खत्म?

Pakistan-Afghanistan Conflict: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव अब सिर्फ बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एयरस्ट्राइक और “खुली जंग” जैसे शब्दों तक पहुंच चुका है। इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) का बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने साफ कहा कि वह इस मामले में जल्दबाज़ी में दखल नहीं देना चाहते। ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ (Shehbaz Sharif) और सेना प्रमुख असीम मुनीर (Asim Munir) की तारीफ करते हुए कहा कि पाकिस्तान “बहुत अच्छा कर रहा है” और वहां “बेहतरीन नेतृत्व” मौजूद है। उनका इशारा साफ था -अभी अमेरिका को सीधे दखल देने की जरूरत नहीं। उनका यह रुख कई सवाल खड़े कर रहा है-क्या अमेरिका इस बार दूरी बनाकर रखना चाहता है? क्या पाकिस्तान खुद हालात संभाल सकता है?
क्या पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच सच में “खुली जंग” शुरू हो चुकी है?
पाकिस्तान ने काबुल, कंधार और कुछ अन्य इलाकों में एयरस्ट्राइक की पुष्टि की है। इसके बाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ (Khawaja Asif) ने सोशल मीडिया पर “खुली जंग” का ऐलान करते हुए कड़ा बयान दिया। उनका आरोप है कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिए हो रहा है। दूसरी तरफ, अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। तालिबान के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद (Zabihullah Mujahid) ने कहा कि एयरस्ट्राइक “कायराना हरकत” है और अफगान सेना अपनी जमीन की रक्षा के लिए तैयार है। तनाव की यह स्थिति सीमा पर लगातार झड़पों और जवाबी हमलों की खबरों से और गंभीर होती जा रही है।
कतर और तुर्की की शांति कोशिशें क्यों नाकाम रहीं?
बीच-बचाव के लिए कतर और तुर्किए ने पहल की थी। मकसद था कि दोनों देश बातचीत की टेबल पर आएं और तनाव कम हो। लेकिन आपसी भरोसे की कमी और मिलिटेंट गतिविधियों के आरोपों के कारण बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी। सबसे बड़ा मुद्दा यह रहा कि पाकिस्तान चाहता है अफगान जमीन से उसके खिलाफ किसी भी आतंकी गतिविधि पर पूरी रोक की गारंटी मिले, जबकि काबुल का कहना है कि पाकिस्तान की सुरक्षा समस्याएं उसका आंतरिक मामला हैं।
Reporter: Pakistan is facing war again in Afghanistan. Are you seeking to intervene?
Trump: Well, I would, but I get along with Pakistan, as you know, very well — very, very well.
You have a great Prime Minister, you have a great general there, you have a great leader — two of… pic.twitter.com/twTmufKyI0— Clash Report (@clashreport) February 27, 2026
क्या अमेरिका इस बार तटस्थ रहना चाहता है?
अमेरिका पहले भी अफगानिस्तान में लंबा सैन्य अभियान चला चुका है। NATO सेनाओं की वापसी के बाद क्षेत्र की जिम्मेदारी स्थानीय सरकारों पर छोड़ दी गई थी। ट्रंप का बयान यह संकेत देता है कि अमेरिका अब सीधे हस्तक्षेप से बचना चाहता है, जब तक हालात पूरी तरह बेकाबू न हो जाएं।
आगे क्या होगा-बातचीत या बड़ा सैन्य टकराव?
अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान ने कहा है कि वह बातचीत के लिए तैयार है। लेकिन जमीनी हालात और बयानबाज़ी को देखते हुए स्थिति बेहद नाज़ुक है। अगर दोनों देशों ने संयम नहीं रखा, तो यह संघर्ष पूरे क्षेत्र की स्थिरता पर असर डाल सकता है। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या कूटनीति जीत पाएगी या गोलियों की आवाज़ और तेज होगी।
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