होर्मुज़ संकट के बीच ट्रंप का ‘न्यूक्लियर डस्ट’ का दावा: क्या सच में करीब है US-ईरान डील?
ट्रंप का बड़ा दावा-ईरान “न्यूक्लियर डस्ट” यानी एनरिच्ड यूरेनियम सौंपने को तैयार, US-Iran शांति समझौता करीब। हालांकि इस्लामाबाद वार्ता विफल रही, 20 साल बनाम 5 साल एनरिचमेंट विवाद जारी। तेल सप्लाई, होर्मुज स्ट्रेट और वैश्विक सुरक्षा पर असर संभावित।

Donald Trump Iran Nuclear Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा है कि ईरान अपने एनरिच्ड यूरेनियम भंडार को सौंपने के लिए तैयार हो गया है। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने इसे “न्यूक्लियर डस्ट” कहकर संबोधित किया-एक ऐसा शब्द जो संकेत देता है कि अमेरिका इस सामग्री को संभावित परमाणु हथियार के खतरे के रूप में देखता है। ट्रंप ने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच शांति समझौते की “बहुत अच्छी संभावना” बन रही है।
क्या वाकई खत्म हो सकता है परमाणु टकराव?
ट्रंप के बयान ने वैश्विक कूटनीति में हलचल मचा दी है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह दावा वास्तविक प्रगति का संकेत है या सिर्फ रणनीतिक दबाव बनाने की कोशिश? अमेरिका लंबे समय से चाहता रहा है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह सीमित करे, जबकि ईरान हमेशा इस बात पर अड़ा रहा है कि उसका कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।
🇺🇸🇮🇷 TRUMP: IRAN AGREES TO NO NUCLEAR WEAPONS
He called it a major step forward and said the talks are moving in a very positive direction.
He also said Iran has agreed to hand over buried enriched nuclear material left underground.pic.twitter.com/YM2fmhwZRc— NewsForce (@Newsforce) April 17, 2026
21 घंटे की बातचीत, फिर भी कोई समझौता नहीं
दिलचस्प बात यह है कि हाल ही में इस्लामाबाद में हुई 21 घंटे लंबी वार्ता किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। अमेरिका ने ईरान के सामने यूरेनियम संवर्धन पर 20 साल की रोक का प्रस्ताव रखा, जबकि ईरान केवल 5 साल के लिए ही तैयार था। यह मतभेद दोनों देशों के बीच अविश्वास की गहराई को दर्शाता है, जो किसी भी समझौते की राह में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है।
पर्दे के पीछे क्या चल रहा है?
रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप प्रशासन पहले ईरान से स्थायी रूप से संवर्धन खत्म करने की मांग कर चुका है। यह मांग इसलिए अहम है क्योंकि अमेरिका को डर है कि संवर्धन की प्रक्रिया परमाणु हथियार बनाने की दिशा में पहला कदम हो सकती है। वहीं ईरान इसे अपनी संप्रभुता और ऊर्जा जरूरतों से जुड़ा अधिकार मानता है।
#SCENE The commander of #Iran’s joint military command #AliAbdollahi on Thursday met with Gen. #AsimMunir, the head of #Pakistan's army as #DonaldTrump announced Iran has "agreed to give us back the nuclear dust that's way underground."#IranWarhttps://t.co/9BPdakpZ3cpic.twitter.com/OLRMielfY1
— ShanghaiEye🚀official (@ShanghaiEye) April 17, 2026
होर्मुज़ और तेल: असली गेम क्या है?
ट्रंप ने अपने बयान में यह भी कहा कि अगर समझौता हो जाता है तो होर्मुज़ जलडमरूमध्य खुला रहेगा और तेल की आपूर्ति सामान्य हो जाएगी। यह बयान संकेत देता है कि यह मुद्दा सिर्फ परमाणु कार्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हितों से भी गहराई से जुड़ा है।
ट्रंप का दावा उम्मीद या भ्रम?
ट्रंप का दावा निश्चित रूप से बड़ा है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए इसे अंतिम सच्चाई मानना जल्दबाज़ी होगी। जब तक दोनों पक्ष अपने मूल मतभेदों-खासकर यूरेनियम संवर्धन की अवधि और नियंत्रण-पर सहमत नहीं होते, तब तक किसी ठोस समझौते की संभावना अधर में ही बनी रहेगी। फिलहाल, दुनिया की नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या यह बयान कूटनीतिक सफलता की शुरुआत है या सिर्फ एक और राजनीतिक चाल।
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