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1 घंटे में 7 दावे, सभी झूठे: ट्रंप के 'होर्मुज नाकाबंदी' पोस्ट के बाद ईरान का चौंकाने वाला पलटवार
ट्रंप की होर्मुज नाकाबंदी बयानबाज़ी पर ईरान का तगड़ा पलटवार-ग़ालिबफ़ ने होर्मुज बंद करने की चेतावनी दी। US-ईरान तनाव, तेल आपूर्ति संकट और परमाणु विवाद के बीच वैश्विक बाज़ार में अनिश्चितता बढ़ी, जबकि यूरेनियम ट्रांसफर पर दोनों पक्ष आमने-सामने हैं।

Trump Hormuz Blockade Ghalibaf Warning: मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ लेता दिख रहा है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप (Donald Trump) के ‘होर्मुज नाकाबंदी’ वाले बयान के बाद ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़िर ग़ालिबफ़ (Mohammad Bagher Ghalibaf) ने सीधे चेतावनी देते हुए कहा- अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक घंटे में सात दावे किए और सातें झूठें। उन्होंने आग कहा-अगर अमेरिकी दबाव जारी रहा, तो होरमुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बंद कर दिया जाएगा।
1 घंटे में 7 झूठ? ईरान का सीधा हमला
ग़ालिबफ़ ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि ट्रंप ने “एक घंटे में सात झूठे दावे” किए। हालांकि उन्होंने इन दावों का विस्तार नहीं किया, लेकिन यह स्पष्ट कर दिया कि ईरान अब सिर्फ कूटनीतिक भाषा में जवाब नहीं देगा। उनके शब्दों में “जंग मैदान में तय होती है, सोशल मीडिया पर नहीं।” यह बयान संकेत देता है कि ईरान अब मनोवैज्ञानिक दबाव की रणनीति भी अपना रहा है, ताकि वैश्विक नैरेटिव को अपने पक्ष में मोड़ा जा सके।
۱- رئیس جمهور آمریکا در یک ساعت هفت ادعا مطرح کرد که هر هفت ادعا کذب است.
۲- با این دروغگوییها در جنگ پیروز نشدند و حتما در مذاکره هم راه به جایی نخواهند برد.
۳- با ادامهٔ محاصره، تنگهٔ هرمز باز نخواهد ماند.— محمدباقر قالیباف | MB Ghalibaf (@mb_ghalibaf) April 17, 2026
होर्मुज: दुनिया की ऊर्जा लाइफलाइन या ‘न्यूक्लियर डिटरेंस’?
Strait of Hormuz सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का सबसे संवेदनशील chokepoint है। दुनिया के करीब 20% तेल का परिवहन यहीं से होता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा हालात में होरमुज़ “परमाणु निवारक” (nuclear deterrent) जैसा काम कर रहा है-जहां सिर्फ बंद करने की धमकी ही वैश्विक बाजारों को हिला देने के लिए काफी है।
ट्रंप का ‘डील या बम’ फॉर्मूला
ट्रंप ने साफ़ किया कि जब तक ईरान के साथ “डील” पूरी नहीं होती, तब तक नाकाबंदी जारी रहेगी। इतना ही नहीं, उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बातचीत असफल रही, तो अमेरिका “फिर से बम गिराना” शुरू कर सकता है। यह बयान कूटनीतिक दबाव से कहीं आगे जाकर सीधे सैन्य विकल्प की ओर इशारा करता है, जिससे स्थिति और विस्फोटक हो सकती है।
परमाणु ‘डस्ट’ विवाद-नई जंग की जड़?
ट्रंप ने दावा किया कि शांति समझौते के तहत ईरान के परमाणु ठिकानों से “संवर्धित यूरेनियम” निकालकर अमेरिका लाया जाएगा। लेकिन तेहरान ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। ईरान के विदेश मंत्रालय ने दो टूक कहा—“हमारा यूरेनियम कहीं नहीं जाएगा, और ऐसा कोई प्रस्ताव बातचीत में कभी था ही नहीं।” यह टकराव सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं, बल्कि भविष्य के परमाणु समझौते की दिशा तय कर सकता है।
क्या टकराव अब जरूर होगा?
एक तरफ़ अमेरिका की आक्रामक रणनीति, दूसरी तरफ़ ईरान की सख्त चेतावनी-दोनों मिलकर उस स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं जहाँ छोटी सी चिंगारी भी बड़े संघर्ष में बदल सकती है। होरमुज़ खुला रहेगा या बंद होगा-यह सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा का सवाल बन चुका है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या बातचीत इस टकराव को रोक पाएगी, या दुनिया एक और बड़े संकट की ओर बढ़ रही है।
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