77वें गणतंत्र दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ध्वजारोहण कर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने संविधान की भूमिका, न्याय-समता-बंधुता के मूल्यों और ‘राष्ट्र प्रथम’ भाव को देश की एकता व विकसित भारत के लिए अनिवार्य बताया।
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर अपने सरकारी आवास पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ था। बीते 76 वर्षों की यात्रा में संविधान ने कई चुनौतियों और उतार-चढ़ावों का सामना किया, लेकिन इसके बावजूद उसने देश को एक भारत-श्रेष्ठ भारत के लक्ष्य की ओर निरंतर आगे बढ़ाया।
संविधान ने भारत की एकता और अखंडता को मजबूत किया
सीएम योगी ने कहा कि उत्तर से दक्षिण, पूर्व से पश्चिम तक भारत की एकता, अखंडता और नागरिकों के गौरव को बनाए रखने में संविधान की अहम भूमिका रही है। आज जब हम नए भारत का दर्शन कर रहे हैं, तो उसके मूल में संविधान की प्रेरणा स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। संविधान हमें समष्टि के भाव, यानी पूरे समाज को साथ लेकर चलने की सीख देता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रनायकों को किया नमन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को याद करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में स्वतंत्रता आंदोलन ने नई ऊंचाइयों को छुआ। उन्होंने संविधान सभा के अध्यक्ष एवं प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, संविधान शिल्पी बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर, लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल और नेताजी सुभाष चंद्र बोस सहित देश की आज़ादी के लिए अपना सर्वस्व अर्पित करने वाले सभी महापुरुषों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
हर परिस्थिति में देश का संबल बना संविधान
सीएम योगी ने कहा कि 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ और डॉ. राजेंद्र प्रसाद के नेतृत्व में संविधान सभा के गठन के बाद 26 नवंबर 1949 को संविधान को अंगीकार किया गया। आज देशभर में 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि हर नागरिक का दायित्व है कि वह संविधान के प्रति श्रद्धा और समर्पण के साथ कार्य करे, क्योंकि कठिन परिस्थितियों में भी संविधान देश का संबल बना है।
“हम भारत के लोग” हर नागरिक के लिए प्रेरणा
मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान की पंक्ति “हम भारत के लोग” हर नागरिक के लिए प्रेरणा है। भारत के संविधान का असली संरक्षक यहां का नागरिक है। इसलिए सभी संस्थाओं, मंत्रालयों और विभागों की यह जिम्मेदारी है कि वे नागरिकों के प्रति अपनी जवाबदेही सुनिश्चित करें। यही संविधान के प्रति सच्चा सम्मान है।
संविधान के प्रति श्रद्धा और समर्पण हर नागरिक का कर्तव्य
सीएम योगी ने कहा कि जब संविधान की मूल भावना का अनादर होता है, तो यह उन महान स्वतंत्रता सेनानियों का भी अपमान होता है, जिनके बलिदान से देश आज़ाद हुआ। संविधान हमारे लिए एक पवित्र दस्तावेज है, जो हर परिस्थिति में मार्गदर्शन करता है। यह न्याय, समता और बंधुता के मूल्यों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का आधार है।
न्याय, समता और बंधुता: संविधान के तीन मूल शब्द
मुख्यमंत्री ने कहा कि न्याय, समता और बंधुता संविधान के तीन महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। हर नागरिक को बिना भेदभाव न्याय मिलना चाहिए। जाति, धर्म, भाषा या क्षेत्र के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। समता और बंधुता का वातावरण मजबूत होगा तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को कोई नहीं रोक सकता।
विकसित भारत की संकल्पना हर नागरिक के लिए गर्व का विषय
सीएम योगी ने कहा कि विकसित भारत केवल आर्थिक समृद्धि का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक की खुशहाली और आत्मनिर्भरता से जुड़ा है। इस यात्रा की शुरुआत समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति से होती है। जब हर स्तर पर आत्मनिर्भरता का भाव मजबूत होगा, तभी राष्ट्र आगे बढ़ेगा।
संविधान ने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र बनाया
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि न्याय, समता और बंधुता ने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र बनाने में अहम भूमिका निभाई है। आजादी से पहले देश को तोड़ने के कई षड्यंत्र रचे गए, लेकिन संविधान की मूल भावना ने उन्हें सफल नहीं होने दिया।
‘राष्ट्र प्रथम’ का भाव देश को आगे बढ़ाएगा
सीएम योगी ने कहा कि जो व्यक्ति खुद को संविधान और व्यवस्था से ऊपर मानता है, वह संविधान का अपमान करता है। आज का दिन संविधान के प्रति समर्पण और ‘राष्ट्र प्रथम’ के भाव को मजबूत करने का अवसर है। संविधान ही वह दस्तावेज है, जो देश के संकल्पों को आगे बढ़ाने में मार्गदर्शक बनेगा।


