BJP Next Mission: बंगाल में रिकॉर्डतोड़ जीत के बाद अब भारतीय जनता पार्टी अपने अगले मिशन में जुटने वाली है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि अगला निशाना उत्तर भारत में 'सिखों का गढ़' है, जहां फिलहाल विपक्षी खेमे में भारी कलह मची हुई है। जानिए बीजेपी का यह मिशन क्या है और पार्टी की क्या तैयारी है... 

BJP Next Target after Bengal Win: पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बाद अब बीजेपी ने अपनी नजरें पंजाब पर टिका दी हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी का अगला बड़ा मिशन अब 'सिखों के गढ़' यानी पंजाब को फतह करना है। पंजाब की मौजूदा सियासी उथल-पुथल को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि बीजेपी वहां एक बड़ी रणनीति पर काम कर रही है।

पंजाब ही बीजेपी का अगला टारगेट क्यों है?

1. विपक्ष में बड़ी फूट

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, बीजेपी का ध्यान अब पूरी तरह से पंजाब की ओर शिफ्ट हो गया है। इसके पीछे कुछ बड़े कारण माने जा रहे हैं। जिनमें सबसे पहला विपक्ष में बड़ी फूट है। हाल के दिनों में पंजाब की सत्ताधारी पार्टी आम आदमी पार्टी (AAP) में जो आंतरिक कलह और टूट-फूट की खबरें आई हैं, बीजेपी उसे एक सुनहरे मौके की तरह देख रही है।

2. भाषाई राज्यों पर पकड़

बीजेपी अब उन 10 मुख्य भाषाई राज्यों में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है, जहां क्षेत्रीय दल काफी ताकतवर हैं। पंजाब इसका बड़ा हिस्सा है। इसके अलावा आंध्र, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक जैसे राज्य शामिल हैं।

3. पुराना रिकॉर्ड तोड़ा

देश के 22 राज्यों में एनडीए (NDA) की सरकार बनने और 17 राज्यों में बीजेपी के मुख्यमंत्री होने के बाद पार्टी अब उन इलाकों में भी अपनी ताकत बढ़ाना चाहती है, जहां वह पहले कमजोर थी।

क्या पंजाब में बीजेपी दोहरा पाएगी बंगाल वाला करिश्मा?

बंगाल की जीत ने साबित कर दिया है कि बीजेपी अब किसी भी राज्य में 'ब्रांड मोदी' के दम पर चुनाव का रुख पलट सकती है। पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स, दक्षिण भारत में अभी भी बीजेपी को संघर्ष करना पड़ रहा है, इसलिए पार्टी अब उत्तर और पूर्व भारत के उन इलाकों को पूरी तरह अपने कब्जे में लेना चाहती है जो अब तक अछूते थे। पंजाब में अकाली दल से अलग होने के बाद बीजेपी वहां अकेले अपने पैर जमाने की कोशिश में है।

पंजाब में बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

पंजाब में बीजेपी के लिए राह इतनी भी आसान नहीं है। वहां पार्टी के सामने दो बड़ी मुश्किलें हैं। पहला कैडर के बीच तालमेल। बंगाल की तरह पंजाब में भी दूसरी पार्टियों से आने वाले नेताओं और पुराने बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल बैठाना एक बड़ी चुनौती होगी। दूसरा क्षेत्रीय पहचान, क्योंकि पंजाब की अपनी एक अलग सांस्कृतिक और भाषाई पहचान है, जिसे साधे बिना वहां सत्ता तक पहुंचना मुश्किल है।

पंजाब में क्या हो सकता है?

राजनीतिक पंडितों का कहना है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी पंजाब में अपनी जमीन इतनी मजबूत कर लेना चाहती है कि वह वहां एक बड़ी ताकत बनकर उभरे। अब अगर बीजेपी इसमें कामयाब होती है, तो वहां की सत्ता में इसका असर देखने को मिल सकता है।