PM Kisan Yojana: 22वीं किस्त से पहले बदला नियम, बिना Farmer ID अटक जाएगा पैसा
PM Kisan Yojana की 22वीं किस्त से पहले बड़ा नियम लागू। 14 राज्यों में नए रजिस्ट्रेशन के लिए Farmer ID जरूरी। बिना किसान आईडी नहीं मिलेगा पीएम किसान योजना का लाभ। जानिए किसान ID क्या है, कैसे बनवाएं और किन राज्यों में लागू है।

22वीं किस्त से पहले फार्मर ID पर बड़ा अपडेट, इन राज्यों के किसानों को बिना ID नहीं मिलेगा लाभ
देश के करोड़ों किसानों के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM Kisan Yojana) सिर्फ एक सरकारी स्कीम नहीं, बल्कि आर्थिक सहारा है। हर साल मिलने वाली किस्तें खेती-किसानी के खर्च को संभालने में मदद करती हैं। लेकिन अब 22वीं किस्त से पहले सरकार ने एक ऐसा नियम सख्ती से लागू करना शुरू किया है, जिसे नजरअंदाज करना किसानों को भारी पड़ सकता है-फार्मर ID।
केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि जिन राज्यों में किसान रजिस्ट्री का काम शुरू हो चुका है, वहां PM Kisan Yojana में नया रजिस्ट्रेशन कराने के लिए फार्मर ID अनिवार्य होगी। अगर आप नए किसान हैं और इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं, तो फार्मर ID के बिना आपका आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
PM Kisan Yojana के लिए किन राज्यों में फार्मर ID जरूरी
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, फिलहाल 14 राज्यों में किसान रजिस्ट्री सक्रिय है और इन राज्यों में नए रजिस्ट्रेशन के लिए फार्मर ID जरूरी कर दी गई है। इन राज्यों में अब तक कितनी किसान ID बनी हैं और लक्ष्य क्या है, उसकी स्थिति इस प्रकार है: आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश।
कुल मिलाकर इन राज्यों में 10.98 करोड़ से ज्यादा किसान ID बनाने का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें से अब तक 7.67 करोड़ से अधिक ID जारी की जा चुकी हैं। कुछ राज्यों में यह प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है, जबकि बिहार, असम और ओडिशा जैसे राज्यों में अभी बड़ी संख्या में किसान रजिस्ट्रेशन से बाहर हैं।
क्या है किसान ID और क्यों बनाई गई
किसान ID एक यूनिक डिजिटल पहचान है, जो आधार से लिंक होती है। इसमें किसान की व्यक्तिगत जानकारी, जमीन का रिकॉर्ड, फसल से जुड़ी डिटेल और खेती से संबंधित गतिविधियां जुड़ी होती हैं।
सरकार का मकसद साफ है-
- फर्जी लाभार्थियों को बाहर करना
- असली और पात्र किसानों तक योजना का लाभ पहुंचाना
- अलग-अलग कृषि योजनाओं में एक ही पहचान का इस्तेमाल करना
ठीक उसी तरह जैसे आधार ने सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाई, किसान ID भी कृषि योजनाओं में धोखाधड़ी रोकने और सिस्टम को ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए लाई गई है।
PM Kisan योजना में किसान ID क्यों हो गई जरूरी
अधिकारियों के मुताबिक, कई मामलों में ऐसे लोग भी योजना का लाभ ले रहे थे, जिनके नाम पर खेती की जमीन नहीं थी। किसान ID के जरिए जमीन रिकॉर्ड और किसान की पहचान को लिंक किया जा रहा है, ताकि PM Kisan Yojana का पैसा सिर्फ असली किसानों तक पहुंचे। खास तौर पर नए रजिस्ट्रेशन में अब बिना किसान ID के आवेदन स्वीकार नहीं किया जा रहा है।
किसान ID के लिए कैसे करें आवेदन
किसान ID बनवाने की प्रक्रिया राज्य के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है, लेकिन सामान्य तौर पर इसमें ये चरण शामिल हैं:
1. ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन
किसान अपने राज्य के आधिकारिक एग्रीकल्चर पोर्टल पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश में किसान upfr.agristack.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा Farmer Registry UP, FCRD Service या eHastakshar जैसे ऐप के जरिए भी सेल्फ-रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है।
2. जरूरी दस्तावेज
आवेदन के दौरान ये दस्तावेज जरूरी होते हैं:
- आधार कार्ड
- जमीन के मालिकाना हक के कागजात (खतौनी आदि)
- बैंक खाते की जानकारी
- हाल की फोटो
डेटा की शुद्धता के लिए किसान का स्वयं मौजूद रहना जरूरी होता है।
3. वेरिफिकेशन प्रक्रिया
दस्तावेज और जानकारी की जांच संबंधित विभाग द्वारा की जाती है। सही पाए जाने पर आवेदन आगे बढ़ाया जाता है।
4. किसान ID जारी होना
सफल सत्यापन के बाद किसान को एक यूनिक किसान ID जारी की जाती है, जिससे वह PM Kisan समेत अन्य कृषि योजनाओं का लाभ ले सकता है।
CSC और कैंप से भी मिलेगी मदद
अगर किसान ऑनलाइन आवेदन नहीं कर पा रहे हैं, तो वे नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर या फिर गांव/ब्लॉक स्तर पर लगने वाले एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के रजिस्ट्रेशन कैंप में जाकर किसान ID बनवा सकते हैं।
किसानों के लिए जरूरी सलाह
अगर आप PM Kisan Yojana की 22वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं या भविष्य में योजना से जुड़ना चाहते हैं, तो किसान ID बनवाने में देरी न करें। जिन राज्यों में यह अनिवार्य हो चुकी है, वहां बिना किसान ID के न तो नया रजिस्ट्रेशन होगा और न ही आगे चलकर योजना का लाभ मिल पाएगा।
सरकार की यह पहल भले ही शुरुआत में अतिरिक्त प्रक्रिया लगे, लेकिन लंबे समय में यह सिस्टम को पारदर्शी और किसानों के हक में मजबूत बनाने वाली साबित हो सकती है।
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