अमेरिका में माता-पिता की घोर लापरवाही से 4 महीने के बच्चे की मौत हो गई। उन्होंने 2 हफ्ते तक डायपर नहीं बदला, जिससे कीड़े पड़ने से बच्चे की जान चली गई। इस क्रूरता के लिए दोनों को 2019 में उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई।

वर्ल्ड न्यूजः दुनिया में कभी-कभी ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, जिन पर यकीन करना मुश्किल हो जाता है। ऐसा ही एक दिल दहला देने वाला मामला अमेरिका का है, जहां मां-बाप की कल्पना से परे लापरवाही ने एक 4 महीने के बच्चे की जान ले ली। यह घटना कुछ साल पुरानी है, लेकिन मां-बाप की इस क्रूरता की वजह से आज भी सोशल मीडिया पर वायरल होती रहती है और यह सवाल खड़ा करती है कि क्या दुनिया में ऐसे भी मां-बाप हो सकते हैं। आमतौर पर मां-बाप अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक चले जाते हैं। लेकिन यहां एक कपल की घोर लापरवाही की वजह से एक मासूम बच्चे की जान चली गई। आखिर उन मां-बाप ने ऐसा क्या किया था?

दो हफ़्ते तक बच्चे का डायपर नहीं बदला

छोटे बच्चों का डायपर कुछ-कुछ घंटों में बदलना ज़रूरी होता है, वरना उनकी नाज़ुक त्वचा पर इन्फेक्शन का खतरा रहता है। कम से कम हर छह घंटे में डायपर बदल देना चाहिए। लेकिन इन बेरहम मां-बाप ने दो हफ़्ते तक बच्चे का डायपर नहीं बदला। इसका नतीजा यह हुआ कि डायपर में कीड़े पड़ गए और वो बच्चे के शरीर में फैल गए, जिससे उसकी मौत हो गई। छोटे बच्चे डायपर में ही मल-मूत्र करते हैं, ऐसे में आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि ये कपल कितना लापरवाह रहा होगा।

अमेरिका के अलबामा की घटना

यह घटना 2017 में अमेरिका के अलबामा राज्य के चिकासा शहर में हुई थी। 29 अगस्त, 2017 को ज़ैकरी पॉल कोहेन नाम के एक शख्स ने 911 पर कॉल करके बताया कि उसका 4 महीने का बेटा स्टर्लिंग कोहेन सांस नहीं ले रहा है। जब पैरामेडिक्स की टीम उनके घर पहुंची, तो अंदर का मंज़र देखकर सन्न रह गई। बच्चे का कमरा पूरी तरह बंद था, जिसमें हवा और रोशनी आने की कोई जगह नहीं थी। दरवाज़ा खोलते ही मल-मूत्र की तेज़ बदबू आई। बच्चा स्टर्लिंग पालने में मृत पड़ा था। जब उसे उठाया गया तो उसके शरीर से कीड़े गिर रहे थे और बहुत बुरी बदबू आ रही थी।

दो हफ़्ते तक बंद कमरे में अकेला था बच्चा

जांच में पता चला कि मृत बच्चे स्टर्लिंग को लगभग दो हफ़्तों से उस बंद कमरे में अकेला छोड़ दिया गया था। बच्चे की 21 साल की मां चेयेने हैरिस ने दावा किया कि उसने सुबह 9 बजे बच्चे को दूध पिलाया था। वहीं, पिता ज़ैकरी पॉल कोहेन ने कहा कि जब उसने सुबह 11 बजे बच्चे को देखा, तो वह सांस नहीं ले रहा था। लेकिन जांच में यह बात सामने आई कि बच्चे का डायपर दो हफ़्तों में एक बार भी नहीं बदला गया था और उसे न तो खाना दिया गया था और न ही पानी। इस वजह से डायपर में मक्खियों ने अंडे दे दिए थे, जिनसे लार्वा (कीड़े) पैदा हो गए और बच्चे के शरीर पर फैल गए।

बच्चे के पिता ने बाद में कबूल किया कि बच्चे को लगातार डायरिया था और वह बदबू बर्दाश्त नहीं कर सकता था, इसलिए उसने डायपर नहीं बदला। वहीं, मां ने दलील दी कि वह पोस्टपार्टम डिप्रेशन (डिलीवरी के बाद होने वाला तनाव) से जूझ रही थी और बिस्तर से उठ नहीं पाती थी। हालांकि, कोर्ट ने उनकी इन दलीलों को झूठा पाया। 2019 में, इस भयानक लापरवाही के लिए दोनों को उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई, जिसमें उन्हें कभी पैरोल नहीं मिल सकती। देखा आपने, दुनिया में कैसे-कैसे लोग होते हैं।