हैदराबाद में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां 10वीं भी पास नहीं कर सका एक शख्स पिछले 20 सालों से नकली डेंटिस्ट बनकर क्लिनिक चला रहा था। उत्तर प्रदेश के रहने वाले इस शख्स को पुलिस ने मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया है।

सोचिए, आप दांत का इलाज कराने जाएं और आपका डॉक्टर 10वीं फेल निकले! ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला हैदराबाद से सामने आया है। यहां एक शख्स 10वीं की परीक्षा भी पास नहीं कर सका, लेकिन पिछले 20 सालों से डेंटिस्ट बनकर लोगों का इलाज कर रहा था। हैरानी की बात यह है कि इतने सालों तक किसी को उस पर शक तक नहीं हुआ।

यह मामला कुछ ही दिन पहले मध्य प्रदेश के भोपाल में हुई एक घटना की याद दिलाता है, जहां दांत निकलवाने गई एक महिला की मौत हो गई थी। अब हैदराबाद में पकड़े गए इस नकली डॉक्टर की पहचान रमेश के तौर पर हुई है, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश का रहने वाला है। मल्काजगिरी स्पेशल ऑपरेशन टीम (SOT) ने मंगलवार को सिकंदराबाद के नरेडमेट इलाके में छापा मारकर उसके अवैध क्लिनिक का भंडाफोड़ किया।

फर्जी सर्टिफिकेट के सहारे 20 साल से चल रहा था धंधा

पुलिस ने बताया कि रमेश ने बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी (BDS) का फर्जी सर्टिफिकेट बनवा रखा था और इसी के दम पर वह 20 साल से लोगों को धोखा दे रहा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रमेश अपना क्लिनिक ज्यादातर देर रात से सुबह तक चलाता था। उसके काम करने के इसी अजीब समय को लेकर कुछ स्थानीय लोगों को शक हुआ और उन्होंने पुलिस को जानकारी दी।

सूचना के आधार पर SOT की टीम ने जब छापा मारा तो पूरा सच सामने आ गया। पुलिस ने पुष्टि की कि रमेश के पास कोई भी मान्य मेडिकल डिग्री नहीं है। उसके खिलाफ केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि आखिर इतने सालों तक वह बिना किसी की नजर में आए यह काम कैसे करता रहा और उसने अब तक कितने मरीजों का इलाज किया है।

यह वाकई चौंकाने वाली बात है कि कोई शख्स 20 साल तक बिना किसी सरकारी जांच या अनुमति के क्लिनिक चलाता रहा। आमतौर पर एक छोटा क्लिनिक खोलने के लिए भी स्थानीय प्रशासन से कई तरह की इजाजत लेनी पड़ती है और अधिकारी समय-समय पर जांच भी करते हैं।

कुछ समय पहले भी ऐसा ही एक मामला सामने आया था, जहां सिर्फ 10वीं पास दो नकली डॉक्टरों ने स्त्री रोग विशेषज्ञ बनकर एक महिला की डिलीवरी कराई थी। डिलीवरी के बाद ज्यादा खून बहने से महिला की मौत हो गई थी। ये नकली डॉक्टर भी कई सालों से अलग-अलग अस्पतालों में स्पेशलिस्ट बनकर जाते थे।