Odisha School Horror: 12 साल की बच्ची का 2 साल तक यौन शोषण-3 टीचर और चपरासी गिरफ्तार
Odisha School Rape Case: ओडिशा के एक स्कूल में 12 साल की बच्ची ने आरोप लगाया-क्या 2 साल तक 3 टीचर और एक चपरासी करते रहे यौन शोषण? महिला टीचर पर मदद का आरोप। सभी गिरफ्तार, POCSO के तहत केस दर्ज। क्या शिक्षा का मंदिर बन गया था खौफ की जगह?

Odisha School Rape Case: ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले से सामने आया यह मामला पूरे देश को हिला देने वाला है। आरोप है कि एक प्राइवेट इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ने वाली 12 साल की छात्रा के साथ दो साल से अधिक समय तक यौन शोषण किया गया। लड़की ने अपने पिता को बताया कि तीन टीचर और एक चपरासी ने स्कूल कैंपस के अंदर कई बार उसके साथ गलत काम किया। एक महिला टीचर पर भी आरोप है कि उसने इस अपराध को छिपाने और मदद करने में भूमिका निभाई।
आखिर लड़की ने क्या आरोप लगाए?
लड़की, जो क्लास-8 में पढ़ती है, ने आरोप लगाया कि स्कूल के तीन टीचरों और एक चपरासी ने स्कूल कैंपस में कई बार उसके साथ रेप किया। उसने यह भी कहा कि एक महिला टीचर ने आरोपियों की मदद की और उसे स्कूल की छत पर ले जाती थी, जहां कथित रूप से वारदात होती थी।
क्या दो साल तक किसी को कुछ पता नहीं चला?
लड़की ने कथित तौर पर डर और धमकी के कारण चुप्पी साधे रखी। बताया जा रहा है कि आरोपियों ने उसे चुप रहने के लिए धमकाया। जब 14 जनवरी को उसने स्कूल जाने से मना किया, तब उसकी मां ने पूछताछ की। तभी यह पूरा मामला सामने आया। पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और मामला गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ।
POCSO Act और BNS की कौन-कौन सी धाराएं लगीं?
पुलिस ने पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। उन पर POCSO Act की धारा 4 और 6, और BNS की धारा 65(2), 70(2), 351(2), 351(3) सहित कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। महिला टीचर को भी उकसाने और अपराध छिपाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। यह दिखाता है कि कानून अब ऐसे मामलों में सख्त रुख अपना रहा है।
क्या स्कूल प्रशासन ने शिकायत को नजरअंदाज किया?
पीड़िता की मां का कहना है कि उन्होंने पहले स्कूल प्रिंसिपल से शिकायत की थी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अगर यह सच है, तो यह केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि स्कूल प्रशासन की लापरवाही का भी मामला बनता है।
Child Welfare Committee की क्या भूमिका रही?
मामले के सामने आने के बाद जिला चाइल्ड वेलफयर कमेटी (Child Welfare Committee (CWC)) ने दखल दिया। कमेटी ने परिवार को FIR दर्ज कराने की सलाह दी और अब मामले की निगरानी कर रही है। ऐसे मामलों में CWC, पुलिस और स्थानीय NGO पीड़ित को कानूनी मदद और काउंसलिंग देते हैं, ताकि बच्ची को मानसिक सहारा मिल सके। जांच अभी जारी है।
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