KBC Winner MP Tehsildar: क्या ये वही KBC 50 लाख की विजेता तहसीलदार अमिता सिंह तोमर है, जिसे पूरे देश ने टीवी पर देखा, 2.5 करोड़ के बाढ़ राहत घोटाले में शामिल थी? ग्वालियर पुलिस ने SDOP जांच में 110 लोगों के नाम FIR में दर्ज किए, हाईकोर्ट-सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत खारिज।

KBC Winner Amita Singh Tomar Scam: मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले की तहसीलदार अमिता सिंह तोमर, जिन्होंने टीवी शो कौन बनेगा करोड़पति (KBC) में 50 लाख रुपये जीतकर पूरे देश में नाम कमाया था, अब 2.5 करोड़ रुपये के कथित बाढ़ राहत घोटाले में गिरफ्तार हो गई हैं। यह घटना लोगों के लिए चौंकाने वाली है, क्योंकि तोमर को लोग पहले केवल उनके टीवी शो और सरकारी सेवा के लिए जानते थे।

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घोटाले का विवरण: कैसे हुआ फर्जी ट्रांसफर?

पुलिस के अनुसार, 2021 में बड़ौदा तहसील में कथित अनियमितताओं के तहत बाढ़ राहत राशि के रूप में 2.5 करोड़ रुपये फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए थे। इस घोटाले में अब तक 22 पटवारियों और एक तहसीलदार को गिरफ्तार किया जा चुका है। इस केस में कुल 110 लोगों के नाम FIR में दर्ज हैं। अमिता तोमर पर आरोप है कि उन्होंने और अन्य अधिकारियों ने फर्जी बैंक खातों के माध्यम से 2.5 करोड़ रुपये की धनराशि गबन की। 

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गिरफ्तारी कैसे हुई?

SDOP अवनीत शर्मा की टीम ने अमिता सिंह तोमर को ग्वालियर के चंद्रावदनी नाका स्थित उनके घर से गिरफ्तार किया। अधिकारी बताते हैं कि तोमर अपनी ड्यूटी से अनुपस्थित रह रही थीं, जिसके कारण उन्हें ट्रैक कर गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें पड़ोसी जिले शिवपुरी की जेल में भेजा गया।

क्या हुई तोमर की कानूनी कोशिशें?

अमिता सिंह तोमर ने पहले हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत (anticipatory bail) के लिए याचिकाएं दी थीं, लेकिन दोनों जगह उनकी अर्जी खारिज कर दी गई। इसके बाद प्रशासन ने भी उन्हें विजयपुर की तहसीलदार पद से हटा कर बड़ौदा तहसील भेजा था। पुलिस का कहना है कि तोमर ड्यूटी पर गैर-हाजिर रही थीं, जिसके कारण उनकी तलाश की गई और गिरफ्तार किया गया।

सवाल उठते हैं: KBC जीत और सरकारी घोटाले का संबंध

पुलिस अधीक्षक सुधीर कुमार अग्रवाल के अनुसार, इस घोटाले की जांच श्योपुर जिले की बड़ौदा तहसील SDOP द्वारा की जा रही है। 50 लाख रुपये जीतकर देशभर में पहचान पाने वाली तहसीलदार की शानदार छवि अब सवालों के घेरे में है। क्या KBC की शोहरत ने उनके भ्रष्टाचार के कदमों को छुपाया? यह भी देखने वाली बात है कि क्या इस मामले में और लोग भी जिम्मेदार पाए जाएंगे। इस मामले की गहराई और जांच अभी जारी है। अभी यह पता लगाया जा रहा है कि कितनी राशि और कितने लोग इस घोटाले में सीधे शामिल थे। साथ ही, प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि भविष्य में ऐसे घोटालों की रोकथाम हो और सरकारी धन का सही उपयोग हो।