मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्व-सहायता समूहों की आजीविका मिशन कार्यशाला का शुभारंभ किया। 5 लाख समूहों से 65 लाख महिलाएं जुड़ी हैं, जिनमें 12 लाख लखपति दीदी बन चुकी हैं। एक वर्ष में 310 करोड़ का व्यापार हुआ। महिला बजट में 26% वृद्धि की गई।

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में स्व-सहायता समूहों की आजीविका मिशन क्षमतावर्धन कार्यशाला का शुभारंभ किया। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की और उपस्थित बहनों को संबोधित किया। इस अवसर पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल, कौशल विकास मंत्री श्री गौतम टेटवाल तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्यमंत्री श्रीमती राधा सिंह भी मौजूद रहीं।

स्व-सहायता समूह उत्पाद प्रदर्शनी और मिलेट्स कैफे का अवलोकन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न जिलों से आई स्व-सहायता समूहों की दीदियों द्वारा लगाए गए उत्पाद स्टॉलों का निरीक्षण किया और उनसे संवाद किया। प्रदर्शनी स्थल पर ग्राम छावनी पठार के मिलेट्स कैफे में उन्होंने स्थानीय व्यंजनों का स्वाद भी लिया। उन्होंने आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना के अंतर्गत 7 वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की दीदियों द्वारा तैयार विशेष होली हैम्पर भी लॉन्च किया गया। इस होली हैम्पर में प्राकृतिक रंग, देशी घी, मिष्ठान, गोकाष्ठ, पूजन सामग्री और टी-शर्ट सहित कुल 10 उत्पाद शामिल हैं। उज्जैन, सागर, कटनी, सीहोर और रीवा जिलों की दीदियों द्वारा तैयार इस हैम्पर पर केंद्रित एक लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई।

5 लाख स्व-सहायता समूहों से 65 लाख दीदियाँ सशक्त, 12 लाख बनीं लखपति

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आजीविका मिशन से जुड़ी दीदियाँ एकता और आत्मनिर्भरता का सशक्त उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि ‘बंद मुट्ठी लाख की’ की भावना के साथ बहनें प्रदेश और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रही हैं। आज महिलाएं ट्रैक्टर और ड्रोन चलाने से लेकर गैस और पेट्रोल रिफिलिंग जैसे कार्यों में भी आगे हैं। कैफे संचालन, बाजार लक्ष्य पूरा करने, अचार और पापड़ निर्माण जैसे लघु उद्योगों के माध्यम से वे बेहतर आय अर्जित कर रही हैं। प्रदेश में 5 लाख से अधिक स्व-सहायता समूहों से 65 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। इनमें से 12 लाख से अधिक महिलाएं “लखपति दीदी” बन चुकी हैं।

स्व-सहायता समूहों ने एक वर्ष में किया 310 करोड़ रुपये का व्यापार

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। स्व-सहायता समूहों ने एक वर्ष में विभिन्न कंपनियों और मेलों के माध्यम से 310 करोड़ रुपये का व्यापार किया है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश देश का सबसे बड़ा प्राकृतिक खेती वाला राज्य है। लगभग 50 हजार महिलाएं प्राकृतिक खेती से जुड़ी हुई हैं और इस क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

महिला एवं बाल विकास बजट 2026-27 में 26% वृद्धि

राज्य सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में महिला एवं बाल विकास विभाग के बजट में 26 प्रतिशत की वृद्धि की है। साथ ही कुल बजट का 34 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण विकास के लिए निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दिन ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला उद्यमिता के इतिहास में स्वर्णिम दिन है। उन्होंने कहा कि परिवार में मां-बेटियों और बहनों के हाथों से बने व्यंजन ही त्योहारों की खुशियों का आधार होते हैं। आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की पहल सराहनीय है। आज की क्षमतावर्धन कार्यशाला महिलाओं के हुनर को नई दिशा देगी।

प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण मॉड्यूल विमोचन और एमओयू आदान-प्रदान

कार्यशाला में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण मॉड्यूल का विमोचन किया गया। मुख्यमंत्री की उपस्थिति में मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (MPSRLM) ने इंडिया पोस्ट, अमेजन सहेली, एक्सेस डेवलपमेंट सर्विस, बुद्धा इंस्टीट्यूट टीआरआईएफ और साइटसेवर संस्थान के साथ एमओयू का आदान-प्रदान किया। मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट कार्य करने वाली 5 स्व-सहायता समूह की दीदियों को सम्मानित किया। गुना जिले की श्रीमती मीनाक्षी फरागते ने विपणन क्षेत्र में अपनी सफलता की कहानी साझा की।