अंबेडकर नगर में एक अवैध क्लिनिक में 12वीं के छात्र और बीए ग्रेजुएट ने 28 वर्षीय महिला का सिजेरियन ऑपरेशन किया। अत्यधिक रक्तस्राव से महिला की मौत हो गई। पुलिस ने क्लिनिक सील कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

लखनऊ के पास अंबेडकर नगर में मेडिकल लापरवाही का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक 28 साल की महिला की जान चली गई। आरोप है कि एक गैर-रजिस्टर्ड और बिना सर्टिफाइड प्राइवेट क्लिनिक में 12वीं के छात्र और एक बीए ग्रेजुएट ने उसका अवैध सिजेरियन ऑपरेशन किया था। यह घटना तब सामने आई जब इस महीने की शुरुआत में ऑपरेशन के बाद महिला की हालत बिगड़ गई। रिपोर्ट्स में महिला की पहचान प्रियंका के तौर पर हुई है। उसके परिवार वालों ने अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। बताया जा रहा है कि यह ऑपरेशन बुखिया गांव के नवजीवन अस्पताल में किया गया था। स्थानीय पुलिस का कहना है कि यह क्लिनिक लगभग पांच सालों से बिना किसी मेडिकल लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन के चल रहा था।

पुलिस जांच के मुताबिक, मालीपुर के रहने वाले 32 साल के योगेश वर्मा, जिसके पास सिर्फ बीए की डिग्री है, और सुल्तानपुर के 19 साल के 12वीं के छात्र शुभम विश्वकर्मा ने यह सिजेरियन ऑपरेशन किया। इन दोनों के पास कोई मान्यता प्राप्त मेडिकल ट्रेनिंग या योग्यता नहीं थी।

ज्यादा ब्लीडिंग होने से महिला की मौत

ऑपरेशन के बाद प्रियंका को कथित तौर पर बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होने लगी और कई दिक्कतें शुरू हो गईं। उसे पहले उस गैर-रजिस्टर्ड क्लिनिक से पास के एक हेल्थ सेंटर ले जाया गया और बाद में लखनऊ के एक अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। उसके परिवार ने इस पर गुस्सा जताया और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिससे यह मामला सुर्खियों में आ गया और पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। इसके बाद अधिकारियों ने क्लिनिक को सील कर दिया और एक FIR दर्ज की गई। बताया जा रहा है कि इस हंगामे के बीच अस्पताल की संचालक रूबी मौके से फरार हो गई।

पिता की मदद करने वाला शख्स खुद को बना लिया डॉक्टर

पुलिस अधिकारियों ने शुरुआती जांच में बताया कि वर्मा ने पहले अपने पिता, जो एक रिटायर्ड वार्ड बॉय हैं, की मदद करते हुए कुछ मामूली अनुभव हासिल किया था। लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि इससे वह सर्जरी करने के काबिल नहीं हो जाता। जांच जारी है और दोनों आरोपी अब हिरासत में हैं। इस चौंकाने वाले मामले ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों और स्थानीय प्रशासकों के बीच फिर से यह मांग तेज कर दी है कि मेडिकल लाइसेंसिंग कानूनों को सख्ती से लागू किया जाए। साथ ही, प्राइवेट अस्पतालों का नियमित ऑडिट हो, खासकर ग्रामीण और छोटे शहरी इलाकों में, जहां अयोग्य डॉक्टर बिना किसी रोक-टोक के काम करते रहते हैं।

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, अधिकारियों ने वादा किया है कि जो कोई भी बिना सही योग्यता के इलाज करके मरीजों की जान खतरे में डालने का दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।